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14वें वित्त आयोग की क्या सिफरिशें हैं और इसका गठन क्यों किया जाता है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 में वित्त आयोग की स्थपाना की व्यवस्था की गयी है. इसका गठन 5 वर्षों के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है. अब तक 13 वित्त आयोग गठित किया चुके हैं और वर्तमान में 14 वें वित्त आयोग का कार्यकाल (2015-2020) चल रहा है. 14 वें वित्त आयोग का गठन रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर Y.V. रेड्डी की अध्यक्षता में किया गया है.
Oct 9, 2017 04:08 IST
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Chairman of 14 Finance Commission Mr. Y.v. Reddy
Chairman of 14 Finance Commission Mr. Y.v. Reddy

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 में वित्त आयोग की स्थपाना की व्यवस्था की गयी है. इसका गठन 5 वर्षों के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है. अब तक 13 वित्त आयोग गठित किया चुके हैं और वर्तमान में 14 वें वित्त आयोग का कार्यकाल (2015-2020) चल रहा है. 14 वें वित्त आयोग का गठन रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर Y.V. रेड्डी की अध्यक्षता में किया गया है. इसने अन्य सदस्यों के नाम हैं: सुषमा नाथ, M. गोविंदा राव, डॉ सुदिप्तो मंडल और अभिजीत सेन.
वित्त आयोग का गठन क्यों किया जाता है?
जैसा कि हमें पता है कि भारत एक संघीय संरचना वाला देश है और यहाँ पर राज्यों के पास कर लगाने के अधिकार कम होने के कारण उनकी आय के स्रोत भी कम हैं. ज्यादातर कर जैसे आयकर, उत्पाद कर, सीमा शुल्क, बिक्री कर और एंटी डंपिंग ड्यूटी आदि लगाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास होता है और इन्ही करों से करों का बहुत बाद हिस्सा बनता है. ऐसी परिस्तिथियों में राज्यों को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार का मुंह ताकना पड़ता है. इसी कारण राष्ट्रपति इन राज्यों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए वित्त आयोग का गठन करता है.
अर्थात वित्त आयोग हर 5 साल के बाद केंद्र से यह सिफारिश करता है कि वह अपने कुल करों के कितने प्रतिशत हिस्से को राज्यों में बांटे.
राज्यों के बीच कर की राशि को बाँटने का क्या पैमाना (criteria) है?
आयोग ने राज्यों के बीच कर के बंटवारे को निम्न 5 आधारों पर बाँटने का फैसला किया है ये हैं:
1. जनसँख्या (1971) को 17.5% का भार दिया गया है.
2. जनसांख्यिकीय बदलाव को 10% का भारांक दिया गया है.
3. आय असमानता को 50% भारांक
4. प्रदेश के क्षेत्रफल को 15% भारांक
5. वन आवरण (forest cover) का भारांक 7.5% है

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criteria for 14th fianance commission
Image source:ideasforindia.in
14 वें वित्त आयोग ने 15 दिसम्बर 2014 को राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है और आयोग द्वारा दी गयी सिफारिशें इस प्रकार हैं:
1. कुल संघ कर राजस्व में राज्यों का हिस्सा 32% से बढाकर 42% कर दिया जाना चाहिए.
2. आयोग की सिफारिशों के अनुसार वर्ष 2019-20 तक की पांच साल की अवधि में राज्यों को कुल मिलाकर 39.48 लाख करोड़ रुपये की राशि मिलेगी.
3. पंचायतों और नगरपालिकाओं सहित सभी स्थानीय निकायों को 31मार्च, 2020 को समाप्त होने वाले पांच वर्ष की अवधि के लिए कुल 288,000 करोड़ रुपये के अनुदान का प्रावधान किया गया है.
4. वित्त आयोग ने वित्तीय समेकन संबंधी सुझाव भी प्रस्तुत किए हैं. इसमें 2016-17 के बीच राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3% के दायरे में लाना होगा.
5. राजस्व  घाटे को 2019-20 तक पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य है.
6. आयोग ने प्रभावी राजस्व घाटे की संकल्पना को समाप्त करने के लिए एफआरबीएम (Fiscal Responsibility and Budget Management Act) कानून में संशोधन का सुझाव दिया है.
7. आयोग ने राष्ट्रीय निवेश फंड (National Investment Fund) को खत्म करने की सिफारिश की है. जिससे सरकार के लिए सार्वजानिक क्षेत्र की कंपनियों से होने वाली आय को तुरंत खर्च करना आसान होगा.
8. आयोग ने कहा है कि सरकारी कंपनियों में विनिवेश (disinvestment)से मिलने वाली रकम का एक हिस्सा राज्यों को भी दिया जाना चाहिए.
9. आयोग ने बिजली चोरी पर सख्ती करने की भी सिफारिश की है जिससे बिजली चोरी कम होगी और इससे केंद्र सरकार का सब्सिडी बोझ कम होगा.
10. आयोग ने 5 वर्षों में पंचायतों के लिए 2,00,292  करोड़ रुपये और नगर पालिकाओं के लिए 87,143 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है.
11. आयोग ने सबसे अधिक करों का हिस्सा उत्तर प्रदेश को दिया है जिसको कुल कर आवंटन का 17.95% दिया गया है. इसके बाद बिहार को 9.66% मध्य प्रदेश को 7.54% और पश्चिम बंगाल को 7.32% हिस्सा दिया गया है.
अन्य राज्यों की स्थिति इस प्रकार है;

14 FINANCE COMMISSION MONEY ALLOCATION
वित्त आयोग की रिपोर्ट में जम्मू कश्मीर को कुल 5 सालों के लिए 59666 की सहायता दी जाएगी जबकि अन्य राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश को 40,625 करोड़, आंध्र प्रदेश को 22,113 करोड़, नागालैंड को 18,475 और पश्चिम बंगाल को 11,760 करोड़ की आर्थिक सहायता दी जाएगी.
इस प्रकार आपने पढ़ा कि वित्त आयोग किन मापदंडों के आधार पर राज्यों को केंद्र से करों में हिस्सा दिलवाने की सिफारिश करता है.

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