विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद और मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने संयुक्त रूप से 24 मई, 2017 को “परिणाम मंजूषा” के साथ “ई-सनद” की शुरूआत की थी.
“ई-सनद” कार्यक्रम क्या है
"ई-सनद", प्रमाण पत्रों के डिजिटलीकरण के लिए विदेश मंत्रालय द्वारा दो अन्य मंत्रालयों के साथ मिलकर शुरू की गई एक पहल है. “ई-सनद” को शुरू करने का उद्देश्य भारत के साथ-साथ विदेशों में भारतीय आवेदकों को संपर्क रहित, कैश रहित और पेपर रहित दस्तावेजों के ऑनलाइन सत्यापन की सुविधा उपलब्ध करवाना है. “पारिणाम मंजूषा” के साथ “ई-सनद” के एकीकरण से आवेदकों को विभिन्न राज्यों में संबंधित अधिकारियों के पास दस्तावेजों को सत्यापित कराने के लिए लंबी यात्रा में लगने वाले समय और बहुमूल्य धन को बचाने में मदद मिलेगी. इस कार्यक्रम के माध्यम से आवेदक ऑनलाइन भी आवेदन दाखिल कर सकते हैं.
शुरूआत में “ई-सनद” पोर्टल, “केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड” (CBSE) की सहायता से ऑनलाइन “स्कूल त्यजन प्रमाणपत्र” या माइग्रेशन सर्टिफिकेट (School Leaving Certificate) की सुविधा प्रदान करेगी. बाद में इस पोर्टल के माध्यम से केन्द्रीय विश्वविद्यालयों से संबंधित दस्तावेजों को भी ऑनलाइन प्राप्त किया जा सकता है.
राज्यों में “ई-सनद” पोर्टल के क्रियान्वयन के लिए, एक पायलट परियोजना के रूप में तेलंगाना सरकार के सामान्य प्रशासन (NRI) विभाग के साथ एक समझौता किया गया है.
(श्रीमती सुषमा स्वराज, श्री प्रकाश जावड़ेकर और रविशंकर प्रसाद “ई-सनद” कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए)
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केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबंधित दस्तावेज जैसे- अंक पत्र (mark-sheets) और स्थानांतरण प्रमाण पत्र (migrations certificates) आदि की प्राप्ति के लिए पहले ही “परिणाम मंजूषा” नामक एक पोर्टल की शुरूआत की जा चुकी है. देश में प्रमाण पत्रों के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए “परिणाम मंजूषा” को “ई-सनद” के साथ जोड़ा गया है.
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“ई-सनद” पोर्टल की शुरूआत क्यों की गई है
विभिन्न संस्थानों में बिचौलियों को समाप्त करने के लिए इस पहल की शुरूआत की गई है. अक्सर ऐसा देखा जाता है कि अगर किसी व्यक्ति को अपना प्रमाण पत्र प्राप्त करना या किसी अधिकारी से सत्यापित कराना होता है तो पहले वह एक बिचौलिये को ढूंढ़ता है, फिर दस्तावेजों के सत्यापन के लिए उसे रिश्वत देता है. इसी प्रकार विदेश जाने वाले व्यक्तियों को कई दस्तावेजों को सत्यापित करवाना पड़ता है, लेकिन बिचौलियों के कारण दस्तावेजों के सत्यापन में काफी समय लगता है. कई बार दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान छात्रों के बहुमूल्य दस्तावेज खो जाते है. इसलिए अगर सरकार ऐसे किसी भी पोर्टल को लॉन्च करती है, जहां से नियोक्ता या संस्थान आवेदक के दस्तावेजों को ऑनलाइन ही देखकर उसकी नियुक्ति की पुष्टि करती हैं तो संबंधित मंत्री एवं मंत्रालय प्रशंसा के पात्र होंगे.
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अतः सरकार ने इस सेवा की शुरूआत मूल रूप से विदेश जाने वाले लोगों को दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को डिजिटाइज़ करने के लिए लॉन्च किया है, ताकि वे इसके लिए सरकारी कार्यालयों में जाकर परेशान न हो सकें.
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इस अवसर पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि "चूंकि सत्यापन केन्द्रों (जहां कोई अपना प्रमाणपत्र सत्यापित करवा सकता है) की संख्या में वृद्धि करना पर्याप्त नहीं था, इसलिए हम एक स्थायी समाधान चाहते थे जिसके तहत किसी भी व्यक्ति को शारीरिक रूप से कार्यालय में जाने और कागजातों को सत्यापित करवाने की आवश्यकता न हो. "उन्होंने कहा कि पासपोर्ट आवेदन प्रक्रिया के सरलीकरण के बाद से पासपोर्ट आवेदन में लगभग 30% की वृद्धि हुई है.
(ऑनलाइन ई-सनद देखती छात्राएं)
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इस अवसर पर केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के चेयरमैन आर.के. चतुर्वेदी ने कहा कि यदि कोई छात्र-छात्रा “ई-सनद” के माध्यम से 2016 के प्रमाणपत्र प्राप्त करना चाहते हैं तो उन्हें इसके लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा. लेकिन यदि कोई छात्र-छात्रा पुराने प्रमाण पत्र प्राप्त करना चाहते हैं तो उन्हें 100 रूपए का भुगतान करना होगा. उन्होंने कहा कि “ई-सनद” नियोक्ताओं(employers) के लिए भी काफी उपयोगी होगा, क्योंकि इसके माध्यम से वे संभावित कर्मचारियों के दस्तावेजों को ऑनलाइन सत्यापित करने में सक्षम होंगे.
इस अवसर पर इस पहल का स्वागत करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि सरकार भारत को बहुत तेजी से डिजिटलीकरण की ओर ले जाना चाहती है, इसलिए यह पहल इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी.
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