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जानें रैन्समवेयर क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है

पिछले कुछ दिनों से कंप्यूटर जगत में एक अनजाना नाम सुर्खियों में छाया हुआ हैl दुनिया की हर बड़ी कम्पनियों, सुरक्षा एजेंसियों, विभिन्न मंत्रालयों एवं शैक्षिक संस्थानों में इस नाम की चर्चा चल रही हैl यह नाम है- रैन्समवेयरl क्या आपको पता है रैन्समवेयर क्या है और क्यों कंप्यूटर जगत इस नाम से घबराया हुआ है? यदि आपका उत्तर नहीं है तो इस लेख को पढ़ने के बाद आपको अपने प्रश्न का उत्तर मिल जाएगाl
May 15, 2017 15:55 IST
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रैन्समवेयर एक खतरनाक सॉफ्टवेयर है जो किसी व्यक्ति के कंप्यूटर में स्थित फाइलों को लॉक कर देता है या उन्हें कोड के रूप में बदल देता है और मांग करता है कि वह व्यक्ति अपनी फाइलों को वापस प्राप्त करने के लिए उसे भुगतान करेl “वाना डीक्रीपटर” या “वानाक्राई” रैन्समवेयर का एक रूप है, जो माइक्रोसॉफ्ट के विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम को प्रभावित करता हैl

जब कोई कंप्यूटर सिस्टम रैन्समवेयर वायरस से संक्रमित हो जाता है, तो उस सिस्टम पर एक पॉप अप विंडो दिखाई देता है, जिसके बाएं ओर उलटी गिनती वाला एक टाइमर दिखाई देता है जो उस कंप्यूटर के उपयोगकर्ता को तीन दिनों के भीतर अपनी सभी फाइलों को पुनः प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता हैl यह टाइमर यह भी बताता है कि यदि कोई व्यक्ति तीन दिनों के भीतर भुगतान करने में असफल रहता है, तो यह शुल्क दोगुना हो जाएगा  और यदि वह सात दिनों के भीतर भुगतान नहीं कर पता है, तो वह फाइल को हमेशा के लिए खो देगाl इसके अलावा टाइमर यह भी बताता है कि भुगतान केवल बीटकॉइन के माध्यम से ही स्वीकार किया जाता हैl
cyber attack
Image source: जन संगठन

रैन्समवेयर की शुरूआत कहाँ से हुई

ऐसा माना जा रहा है कि हैकरों ने अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के साथ कथित तौर पर जुड़े विंडोज “इंटरनल ब्लू” का फायदा उठाया हैl हैकरों के समूह "शैडो ब्रोकर्स" द्वारा इस वायरस को फैलाया गया हैl माइक्रोसॉफ्ट ने मार्च में इस हमले के संदर्भ में एक पैच जारी किया था, जिसे MS17-170 के रूप में जाना जाता हैl

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रैन्समवेयर वायरस इतनी तेजी से कैसे फैल गया

चूंकि रैन्समवेयर वर्ड डॉक्यूमेंट, पीडीएफ और ऐसे अन्य फाइलों में छुपा रहता है, जिसे आम तौर पर ईमेल के माध्यम से भेजे जाता हैl इसके अलावा द्वितीयक संक्रमण माध्यम जैसे- पैन ड्राइव, हार्ड डिस्क के उपयोग के कारण पहले से ही वायरस से प्रभावित कंप्यूटर में यह वायरस हमला करता हैl इसी कारण से यह वायरस बहुत कम समय में 150 से अधिक देशों में फैल गयाl

भारत में रैन्समवेयर वायरस का प्रभाव

रैन्समवेयर वायरस से भारत में एक दर्जन से अधिक संस्थाएं प्रभावित हुई हैं, जिनमें मुंबई, हैदराबाद, बेंगलूरू और चेन्नई की कुछ कंपनियां भी शामिल हैं। आंध्र प्रदेश के पुलिस विभाग ने कहा है कि उसके करीब 18 कंप्यूटर रैन्समवेयर से प्रभावित हुए हैं। दक्षिण भारत के दो बैंक, मुंबई में एक बड़ी कंपनी और चेन्नई में रेनो का भारतीय कामकाज भी इस वायरस से प्रभावित हुआ हैl
ransomware
Image source: antoanthongtin.ictu.edu.vn

रैन्समवेयर वायरस से बचने के उपाय

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने रैन्समवेयर वायरस से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय बताए हैं:-

1. समय-समय पर अपने डाटा की बैकअप लेते रहें

यदि एक बार अगर वाइरस ने आपकी फाइलों को कोडित कर दिया तो आपके पास उन्हें वापस प्राप्त करने के लिए बहुत कम विकल्प बचेंगे। अतः बेहतर होगा कि आप जरूरी फाइलों का बैकअप ले लिया करेंl विशेषज्ञों की राय यह है कि हमें हमेशा “मल्टिपल बैकअप” लेना चाहिए। फिजिकल हार्ड ड्राइव के अलावा “क्लाउड सर्विसेज” पर भी अपने डेटा का बैकअप लेते रहना चाहिएl अगर आप हार्ड ड्राइव में बैकअप ले रहे हैं तो उसे अपने नेटवर्क से डिस्कॉनेक्ट करके रखना चाहिएl

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2. सिस्टम को अपटेड रखना
BleepingComputer.com चलाने वाले न्यूयॉर्क के ब्लॉगर “लॉरेंस अब्राम्स” का कहना है कि बहुत से संस्थान सिक्यॉरिटी अपग्रेड इंस्टॉल नहीं करते क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे बग्स आ सकते हैं या फिर वे डाउनटाइन से बचने के लिए अपने सिस्टम को अपडेट नहीं करते। सिक्यॉरिटी फर्म FireEye का कहना है कि आपको हमेशा अपने सिस्टम अपडेटेड रखने चाहिए। रैन्समवेयर वाइरस ने विंडोज़ XP, विंडोज़ 7 और विंडोज़ 8 को टारगेट किया है जिन्हें अब माइक्रोसॉफ्ट ने सर्विस देना बंद कर दिया है। बावजूद इसके पुराने सिस्टम्स के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने एक पैच जारी किया है ताकि इन रैन्समवेयर वायरस से बचा जा सके।
 step to prevent ransomeware attack
Image source: Acronis

3. एंटी वायरस का इस्तेमाल करना

एंटी-वाइरस का इस्तेमाल करने से आप वाइरसों के हमले से बच सकते हैं। एंटी-वाइरस स्कैनिंग के जरिए वाइरसों का पता लगा लेते हैं और उन्हें ब्लॉक कर देते हैं। छोटे-मोटे साइबर क्रिमिनल उन लोगों को निशाना बनाते हैं जिन्हें वाइरस की ज्यादा जानकारी नहीं होती है। इसलिए बेहतर होगा कि आप हमेशा अपने सिस्टम में अच्छा एंटी-वाइरस रखें।

4. अपने कर्मचारियों को इस बारे में जागरूक करें

सभी कम्पनियों एवं संस्थाओं के लिए जरूरी है कि वह अपने कर्मचारियों को इस अटैक के बारे में बताएं और उन्हें सचेत करेंl पहली बात तो यह है कि किसी को भी संदिग्ध लिंक्स पर क्लिक नहीं करना चाहिए और ऐसे अटैचमेंट्स भी नहीं खोलने चाहिएl क्योंकि हैकर्स यूजर्स को इन्फेक्टेड ईमेल लिंक्स के जरिए शिकार बनाते हैंl जैसे ही इन्फेक्टेड अटैचमंट्स खोले जाते हैं, आउटडेटेड सिस्टम हैकिंग के शिकार हो जाते हैंl यही नहीं, एक सिस्टम के जरिए यह वाइरस उस नेटवर्क के अन्य कंप्यूटर्स को भी अपनी चपेट में ले सकता हैl अतः सिस्टम ऐडमिनिस्ट्रेटर्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कर्मचारियों को नेटवर्क के उन हिस्सों का ऐक्सेस नहीं मिलना चाहिए जो संस्थान के लिए महत्वपूर्ण हो लेकिन कर्मचारियों के लिए जरूरी न होl इससे रैन्समवेयर वायरस के हमले को रोका जा सकता हैl

5. रैन्समवेयर का हमला होते ही नेटवर्क बंद कर दें

यदि आपके सिस्टम में रैन्समवेयर का हमला हो चुका है तो तुरंत अपने कंप्यूटर्स को नेटवर्क से डिस्कनेक्ट कर देंl नेटवर्क के बंद करने से कोडिंग की प्रक्रिया रूक जाएगी और अन्य फाइलें प्रभावित होने से बच जाएंगीl हैकर्स कई बार मेसेज भेजते हैं कि आप अपने नेटवर्क को चालू रखें वरना और नुकसान हो सकता है मगर उनकी बातों में न आएंl अगर आपकी फाइलें लॉक हो गई हैं और आपसे फिरौती मांगी जा रही है तो ध्यान रखें, कानून और साइबर सिक्यॉरिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे हैकर्स भविष्य में और हमलों को अंजाम दे सकते हैंl साथ ही इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि आपकी फाइलें आपको पुनः प्राप्त हो जाएंगीl

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