स्टील और स्टेनलेस स्टील के बीच क्या अंतर होता है?

स्टील और स्टेनलेस स्टील देश में इस्तेमाल किए जाने वाले सामान्य पदार्थ हैं. इन दोनों के बीच गुण, संरचना, वजन, मूल्य आदि को लेकर अंतर हैं. इस लेख में स्टील और स्टेनलेस स्टील के बीच क्या अंतर होता है के बारे में अध्ययन करेंगे.
Feb 9, 2018 15:01 IST
    Steel Vs Stainless Steel

    स्टील और स्टेनलेस स्टील दोनों ही धातु हैं और दुनिया में इस्तेमाल होने वाले आम पदार्थों में से ही एक हैं. ये व्यापक रूप से वाणिज्यिक और उपभोक्ता अनुप्रयोगों के रूप में उपयोग किए जाते है. स्टील और स्टेनलेस स्टील के बीच ताकत, लचीलापन, कठोरता, लागत, आदि संदर्भ में भिन्नताएं हैं. इसके अलावा मुख्य अंतर उन घटकों में निहित है, जो इसे उपयोगी बनाने के लिए स्टील में जोड़े जाते हैं यानी स्टेनलेस स्टील और कार्बन स्टील को उनके alloying तत्वों और उनकी रचनाओं द्वारा विभेदित किया जा सकता है. इस लेख में स्टील और स्टेनलेस स्टील के बीच क्या अंतर होता है के बारे में अध्ययन करेंगे.
    स्टील और स्टेनलेस स्टील के बीच अंतर
    1. स्टील, लोहा और कार्बन को जोड़कर बनता है. जिससे लोहा और कड़क हो जाता है. इसे प्लेन कार्बन स्टील या हल्का स्टील (mild steel) के रूप में भी जाना जाता है.  इसमें कम गलनांक वाली उच्च कार्बन सामग्री होती है. दूसरी तरफ स्टेनलेस स्टील में एक उच्च क्रोमियम सामग्री होती है जो स्टील की सतह पर अदृश्य परत बनाती है जिससे इसे धुंधला या बाहरी परत को खराब होने से बचाया जा सकता है.
    2. स्टेनलेस स्टील में क्रोमियम, निकल, नाइट्रोजन और मोलिब्डेनम आदि मिलाकर तैयार किया जाता है. स्टेनलेस स्टील जंग प्रतिरोधी है और स्टील में ऐसे पदार्थ नहीं होते है जिसके कारण उसमें दाग और जंग लग जाता हैं. स्टेनलेस स्टील जल्दी खराब नहीं होता है. स्टेनलेस स्टील में जंग क्रोमियम के कारण नहीं लगता है. क्रोमियम एक अदृश्य, पतली और पक्षपाती ऑक्साइड परत बनाता है, जिससे स्टेनलेस स्टील की सतह निष्क्रिय हो जाती है. इसके लिए क्रोमियम स्टील में होना अनिवार्य है और साथ ही ऑक्सीजन युक्त वातावरण. यह निष्क्रिय परत नीचे की धातु को हवा और पानी से कवर करके बचाता है. अगर परत पर खरोंच भी होती है तो खुद ठीक हो जाती है.
    3. स्टील और स्टेनलेस स्टील की ताकत: स्टील, स्टेनलेस स्टील की तुलना में थोड़ा अधिक मजबूत होता है क्योंकि इसमें कार्बन होता है. इसके अलावा, कठोरता के मामले में यह स्टील की तुलना में भी कमजोर होता है.
    4. कार्बन स्टील स्टेनलेस स्टील की तुलना में कम संक्षारण प्रतिरोधी है.

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    5. चुंबकीय गुण: कार्बन स्टील चुंबकीय है, लेकिन कुछ स्टेनलेस स्टील्स चुंबकीय नहीं होते हैं. अर्थात स्टेनलेस स्टील की 300 श्रृंखला में क्रोमियम और निकल होता है, जो इसे अचुंबकीय बनाता है, लेकिन स्टेनलेस स्टील की 400 श्रृंखला में केवल क्रोमियम होता है जो इसे चुंबकीय बनाता है.
    6. उपस्थिति (दिखावट): कार्बन स्टील मैट फिनिश के साथ फीका (dull) दिखता है, जबकि स्टेनलेस स्टील चमकदार होता है. स्टेनलेस स्टील पर क्रोमियम की कोटिंग होने के कारण यह इसको आकर्षक बनाता है और पेंट करने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती है.
    7. स्टेनलेस स्टील की तुलना में कार्बन स्टील अधिक लचीला, टिकाऊ और ज्यादा तापीय चालकीय (thermal conductivity) होता है. कार्बन स्टील के आवश्यक यांत्रिक गुणों को गर्मी उपचार के द्वारा भी बदला जा सकता है.
    8. कार्बन स्टील कठोर और मजबूत होता है. मोटर्स और बिजली के उपकरणों में बड़े पैमाने पर इसका चुंबकीय गुणों के कारण उपयोग किया जाता है और स्टेनलेस स्टील की तुलना में कार्बन स्टील से वेल्डिंग आसानी से हो सकता है. स्टेनलेस स्टील का उपयोग कटलरी आदि में होता है.
    9. वजनः स्टील का वजन स्टेनलेस स्टील से कम होता है और कठोर गुण  होने के कारण भी स्टेनलेस स्टील का वजन अधिक हो जाता है. स्टेनलेस स्टील को विनिर्माण प्रक्रिया में संभालना भी मुश्किल होता है.
    10. कार्बन स्टील, स्टेनलेस स्टील्स की तुलना में आमतौर पर इस्तेमाल होता है और सस्ता होता है क्योंकि इसकी मुख्य ऑलिंगिंग कार्बन है, जबकि अपेक्षाकृत महंगा क्रोमियम स्टेनलेस स्टील्स का मुख्य ऑलॉयंग तत्व है.
    उपरोक्त लेख से हमने स्टील और स्टेनलेस स्टील, उनके गुण, बनावट, रचना आदि के बारे में अध्ययन किया है.

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