भारत एक ऐसा देश है जहाँ पर 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता' वाली कहावत प्रचलित है वहीँ पर औरत को नर्क का द्वारा भी कहा जाता है. लेकिन अब भारत में महिलाओं की स्थिति बहुत तेजी से बदल रही है.
अब शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र बचा हो जिस पर पुरुषों का एकाधिकार रहा हो. आज,विज्ञान एवं तकनीक, खेल, पर्यटन, अन्तरिक्ष हर क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों के साथ कदमताल कर रहीं हैं.
इसी दिशा में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि अब महिलाओं को भी पुरुषों की तरह नौसेना में स्थायी कमीशन मिलेगा. आइये इस निर्णय के बारे में और विस्तार से जानते हैं.
सरकार इससे पहले कोर्ट में यह तर्क दे रही थी कि भारत के रूस निर्मित जहाजों में महिलाओं के लिए अलग से स्नानागार और टॉयलेट की व्यवस्था नहीं है. इसके अलावा महिलाओं की शारीरिक स्थिति और पारिवारिक दायित्व जैसी बहुत-सी बातें उन्हें कमांडिंग अफसर बनाने में बाधक कारक हैं. इसलिए उन्हें नौसेना में स्थायी कमीशन नही दिया जाता है.
वायुसेना और थलसेना की महिला अधिकारियों को स्थाई कमीशन मिलने के बाद, नौसेना की 19 महिला अफसरों ने अपना हक पाने के लिए, दिल्ली हाईकोर्ट का दरबाजा खटखटाया था. इन महिला अधिकारियों ने कहा कि उन्हें स्थायी कमीशन मिलने के बाद उन्हें भी पेंशन जैसे सेवानिवृत्ति लाभ मिलने लगेंगे.
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2010 में नौसेना अधिकारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए, केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय से कहा कि महिलाओं को जबरन रिटायर करने का निर्णय गलत है और याचिकाकर्ता महिला अधिकारियों को जल्द से जल्द स्थाई कमीशन प्रदान करने के निर्देश दिए.
केंद्र सरकार को यह निर्णय पसंद नहीं आया और उसने सुप्रीम कोर्ट में अपील की.शीर्ष न्यायालय ने 17 मार्च 2020 को अपने निर्णय में कहा कि सरकार की सोच अतार्किक है और समानता के अधिकार के खिलाफ है. सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को तीन महीने के भीतर तौर-तरीके पूरे करने को कहा है.
वर्तमान में क्या व्यवस्था है? (Present situation of short term commission for women in Indian Navy )
नौसेना में महिला और पुरुष दोनों अधिकारियों की नियुक्ति शॉर्ट टर्म कमीशन में यानी चौदह साल के लिए की जाती है. इस अवधि के बाद महिला अफसरों को जबरन सेवानिवृत्त कर दिया जाता है लेकिन पुरुष अफसरों को तो स्थायी कमीशन दे दिया जाता है.
इससे महिला अधिकारियों को पेंशन ले लाभ नहीं मिलते थे. इसके अलावा महिलाओं की तैनाती शैक्षणिक, प्रशासनिक, और चिकित्सा विभागों में ही की जाती है अर्थात उन्हें जंगी जहाजों और समुद्र के अंदर ड्यूटी पर नहीं भेजा जाता है.
स्थायी कमीशन बनने से महिलाओं के फायदे (Benefits of Permanent Commission for Women in Indian Navy)
1. महिलाओं की तैनाती शैक्षणिक, प्रशासनिक, और चिकित्सा विभागों के अलावा अन्य विभागों भी की जा सकेगी.
2. महिलाओं को पुरुषों के सामान पेंशन जैसे सेवानिवृत्ति लाभ मिलने लगेंगे.
3. अब महिला अफसरों की तैनाती जंगी पोतों पर भी हो सकेगी. अभी तक महिला नौसेना अधिकारी समुद्र के भीतर पोतों में तैनात नहीं की जाती थीं.
इस प्रकार उम्मीद की जाती है कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद इंडियन नेवी में भारतीय महिलाओं के साथ होने वाला भेदभाव खत्म होगा और वे भी देश की रक्षा के लिए जंगी जहाज पर तैनाती की हक़दार होंगी.
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