तैमूर के हमले के बाद ,1414 ई मे तुगलक वंश का अंत हो गया और खिज्र खान ने सैय्यद वंश की स्थापना की। वह तैमूर के डिप्टी के रूप मे दिल्ली की गद्दी पर बैठा। सात साल तक शासन करने के बाद 20 मई 1421 ई को खिज्र खान की मृत्यु हो गयी। खिज्र खान के बाद उसका बेटा मुबारक खान राजा बना। हालांकि जल्दी ही उसकी हत्या हो गयी और उसकी जगह पर उसका भतीजा मौहम्मद खान गद्दी पर बैठा। मुबारक खान के बारे में विस्तृत जानकारी तारिख-ए-मुबारक शाही नामक पुस्तक में मिलती है जिसके लेखक याहया बिन अहमद सरहिन्दी हैं।
सैय्यद वंश के आखिरी शासक अलाउद्दीन आलम ने 19 अप्रेल 1451 ई को स्वेच्छा से अपने सेनापति बहलोल खान को दिल्ली सल्तनत की कमान सौंप दी और स्वयं बदायूं चले गये जंहा 1478 ई मे उनकी मृत्यु हुई।
सैय्यद के अंत के बाद ही जल्द ही पूरा भारत छोटे-छोटे स्वतंत्र राज्यों मे बंट गया इनमे से कुछ राज्या इतने छोटे थे कि उनका कुल क्षैत्रफल 30 से 40 वर्ग किलोमीटर ही था।
इसी के साथ, दक्षिण में दो नये साम्राज्यों का उदय हुआ। इसने एक मुस्लिम तथा दूसरा हिंदू था। बहामनी साम्राज्य एक मुस्लिम साम्राज्य था जबकि विजयनगर साम्राज्य एक हिंदू साम्राज्य के रूप मे उभरा।
सय्यद वंश दिल्ली सल्तनत का चौथा वंश था जिसका शासनकाल 1414 ई से 1451 तक था।
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