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Mukarram Jah: हैदराबाद के आठवें निज़ाम मुकर्रम जाह का निधन, जानें कब बनें थे निजाम

हैदराबाद के आठवें निजाम मुकर्रम जाह का हाल ही में इस्तांबुल, तुर्की में निधन हो गया. वे 89 वर्ष के थे और कुछ समय से बीमार चल रहे थे. मुकर्रम जाह अपने दादा मीर उस्मान अली खान के निधन के बाद 6 अप्रैल, 1967 को उन्हें आसफ जाह (Asaf Jah) आठवें का ताज पहनाया गया था.  

हैदराबाद के आठवें निज़ाम मुकर्रम जाह का तुर्की में निधन
हैदराबाद के आठवें निज़ाम मुकर्रम जाह का तुर्की में निधन

The eighth Nizam of Hyderabad passed away: हैदराबाद के आठवें निजाम मुकर्रम जाह (Mukarram Jah) का हाल ही में इस्तांबुल, तुर्की में निधन हो गया. वे 89 वर्ष के थे और कुछ समय से बीमार चल रहे थे. 

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया साथ ही उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना भी व्यक्त की.

उनके पार्थिव शारीर को हैदराबाद में चौमहल्ला पैलेस (Chowmahalla palace) ले जाया जायेगा और आवश्यक अनुष्ठानों के पूरा होने के बाद आसफ जाही परिवार के मकबरे के पास दफन किया जाएगा. आसफ जाही का मकबरा चारमीनार के बगल में मक्का मस्जिद के प्रवेश द्वार पर स्थित है.       

मुकर्रम जाह के बारें में:

हैदराबाद के आठवें मुकर्रम जाह का जन्म वर्ष 1933 में राजकुमार आजम जाह (Azam Jah) और राजकुमारी दुर्रू शेहवार (Durru Shehvar) के घर हुआ था.

जाह की प्रारंभिक शिक्षा देहरादून के दून स्कूल में हुई. इसके अलावा उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (London School of Economics) और रॉयल मिलिट्री अकादमी सैंडहर्स्ट ( Royal Military Academy Sandhurst) में भी अध्ययन किया था.

मुकर्रम जाह की पांच बार शादी हुई थी. उनकी पहली पत्नी एक तुर्की मूल की एअक रईस महिला एसरा बिरगिन (Esra Birgin) थी. इनसे,उनके दो बच्चे प्रिंस अज़मेत जाह (Prince Azmet Jah) और साहिबज़ादी शेखयार बेगम (Sahibzadi Shehkyar Begum) थी.  

अपने पिता की तरह, मुकर्रम 1980 के दशक तक भारत के सबसे अमीर व्यक्ति थे. हालाँकि, 1990 के दशक में, तलाक के निपटारे में उन्होंने कुछ संपत्ति खो दी थी.

कब बनें थे हैदराबाद के निजाम?

मुकर्रम जाह अपने दादा मीर उस्मान अली खान के निधन के बाद 6 अप्रैल, 1967 को उन्हें आसफ जाह (Asaf Jah) आठवें का ताज पहनाया गया था. मीर उस्मान अली खान (Mir Osman Ali Khan) का फरवरी 1967 में निधन हो गया था.

हैदराबाद के निजाम:

निज़ाम हैदराबाद राज्य के वंशानुगत शासक थे, जो शुरू में दिल्ली में मुगल सम्राट की ओर से इस क्षेत्र पर शासन करते थे. मुग़ल शासक औरंगजेब की मृत्यु के बाद वे स्वतंत्र शासक बन गए थे. आसफ जाही वंश मूल रूप से तुर्क थे. वर्ष 1948 में भारतीय संघ में शामिल होने तक निजाम राजवंश ने हैदराबाद रियासत पर शासन किया था. 

निज़ाम-उल-मुल्क (Nizam-ul-Mulk) जिन्हें चिन क़िलिच कमरुद्दीन ख़ान (Chin Qilich Kamaruddin Khan) से भी जाना जाता था. वह हैदराबाद के पहले निज़ाम थे जो मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब के एक वफादार सेनापति भी थे.

भारत के दक्कन में जब मराठा सत्ता में आयें तो उनके और हैदराबाद के निज़ाम के बीच कई संघर्ष हुए जिसके बाद निजाम अपने कई क्षेत्र खो दिए थे. निजाम अली खान, जिन्हें आसफ जाह II भी कहा जाता है, 1762 से 1803 तक हैदराबाद के निजाम थे.

हैदराबाद के भारतीय संघ में विलय के बाद, सातवें निजाम मीर उस्मान अली खान ने 26 जनवरी, 1950 से 31 अक्टूबर, 1956 तक राज्य के राज प्रमुख के रूप में कार्य किया था.

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