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पीयर प्रेशर क्या है? स्कूल के छात्रों के लिए इससे बचने के कुछ आसान उपाय

Apr 5, 2018 16:51 IST
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Peer Pressure
Peer Pressure

बच्चे अपने दोस्तों से काफी जल्दी प्रभावित हो जाते हैं क्योंकि वे दोस्तों से अलग नहीं रहना चाहते और अपना मज़ाक नहीं बनाना चाहते हैं. कई बार उत्सुकता के कारण भी बच्चे दोस्तों से प्रभावित होने लगते हैं. अक्सर किशोरावस्था में  बच्चे अपने दोस्तों, सहपाठियों को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं. कभी-कभी यह सहकर्मी प्रभाव सकारात्मक होता है जिसमें एक बच्चा खेल से जुड़ी गतिविधियों में अधिक भाग लेने या पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित होता है क्योंकि उसके दोस्त ऐसा कर रहे होते हैं. सहकर्मियों के दबाव के तहत होने वाली सकारात्मक गतिविधियां नीचे अंकित हैं:

1. छात्र स्कूल में नियमित हो जाते हैं.

2. शैक्षणिक प्रदर्शन अच्छा हो जाता है.

3. शिक्षा को पूरा करने या आगे की शिक्षा के लिए प्रेरणा मिलती है.

4. खेल और अन्य पाठयक्रम गतिविधियों में भाग लेने में की प्रेरणा मिलती है .

लेकिन कभी कभी दोस्तों का गलत प्रभाव भी पड़ सकता है जिसकी वजह से बच्चे गलत चीजों का शिकार बन जाते हैं और अगर माता-पिता बच्चों पर ज़बरदस्ती करने की कोशिश करते हैं तो उसका उल्टा असर होता है और बच्चे आक्रामक हो जाते हैं या माता-पिता से अपनी बातें छुपाने लगते हैं.

सहकर्मियों के दबाव के तहत होने वाली नकारात्मक गतिविधियां:

1. धूम्रपान या तंबाकू/ हुक्का का सेवन.

2. शराब (18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए अवैध)पीने की कोशिश करना.

3. ड्रग्स या मादक पदार्थों का उपभोग.

4. अभिभावकों को बिना बताये स्कूल या कॉलेज छोड़ करना.

5. परीक्षा में नकल करना.

6. डेटिंग या वयस्क संबंधों में शामिल होना.

7. वज़न कम करने की दवाइयों का अनुचित तरीके से सेवन करना.

8. अस्वास्थ्यकर सौंदर्य या फैशन टिप्स को अपनाने की कोशिश करना.

9. कभी-कभी, छात्र अपने माता-पिता को फोन / लैपटॉप या महंगे गैजेट खरीदने के लिए मजबूर करते हैं क्योंकि उनके दोस्तों के पास वह होते हैं .

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छात्रों के लिए पीयर प्रेशर से निपटने के तरीके:

1. मना करना सीखें: यदि आपको ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आपका सहकर्मी या मित्र आपको किसी ऐसे गतिविधियों के लिए प्रेरित कर रहा है जो आपके लिए बिलकुल सही नहीं तो बीना डरे आप अपने मित्र को ऐसी गतिविधियों के लिए मना करना सीखें.

2. बड़ों से बात करें: यदि सहकर्मियों द्वारा आप पर दबाव बढ़ता रहे , तो आप इस बारे में सबसे पहले अपने माता-पिता के साथ या स्कूल में शिक्षकों और सलाहकारों(counsellors)से परामर्श कर सकते हैं.

3. नजरअंदाज करना सीखें: आपको अपने दोस्तों की सभी गतिविधियों में शामिल होने की आवश्यकता नहीं है और यदि वे हानिकारक गतिविधियों में शामिल हैं तो ऐसी घटनाओं से बचने के लिए बेहतर है आप उन्हें उस समय के लिए अनदेखा करें.

4. सही दोस्त चुनें: यदि आप अपने किसी मित्र के साथ सहज महसूस नहीं करते तो आपको सलाह है कि आप अपने मित्रों या सहपाठियों का चुनाव अपने अनुसार करना सीखें. जिनके साथ आप सुखद महसूस कर सकें.

अभिभावकों के लिए कुछ खास टिप्स जिनके ज़रिए उन्हें अपने बच्चों को इन नकारात्मक गतिविधियों से दूर करना आसान होगा:

•बच्चों से बात करें: अपने बच्चे से बात करें और उसे जीवन में सही निर्णय लेने में मदद करें. बच्चे से उसकी दिनचर्या, स्कूल और मित्रों के बारे में रोज़ पूछें जिससे वो आपसे अपने मन की बात बता सके.

•ना करें: अपने बच्चे को न बोलना भी सिखाएँ. उसे बताएं की उसे दोस्तों को खुश करने के लिए हर बात मानने की ज़रूरत नहीं है. वो अपने मन के अनुसार दोस्तों की बात मान सकता है या न भी कर सकता है.

•गलत आदतों के बारे में बताएं: बच्चों को गलत आदतों और उनसे होने वाले नकारात्मक प्रभाव के बारे में समझाएं जैसे की सिगरेट पीने के नुकसान या शराब के स्वास्थ पर क्या दूरप्रभाव होते हैं, उन्हें ज़रूर बताएं ताकी अगर उनके दोस्त कभी उनको ऐसी गलत आदतों के लिए उकसाएँगे तो वो उनको मना कर पाएंगे.

•विश्वास दिलाएँ: अपने बच्चे को हमेशा यह विश्वास दिलाएँ की आप हमेशा उसके साथ हैं अर्थात आप उसे किसी भी परिस्थिति में आप अकेला नहीं छोड़ेंगे. ऐसा करने से वो अपनी बातों को आपसे नहीं छुपाएगा और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा.

निष्कर्ष: आशा है कि हमारे बताये हुए सुझाव को छात्र समझ कर अपने जीवन-शैली में होने वाली ऐसी गतिविधियों को सही तरीके से समझ पाएंगे, क्यूंकि छात्रों को यह जानना बहुत ज़रूरी है कि सहकर्मियों के दबाव के तहत होने वाली नकारात्मक गतिविधियां आपके भविष्य के नीव पर बहुत बुरा प्रभाव डाल सकती है. साथ ही साथ अभिभावकों को सलाह है कि वह बताए गए सुझाव के अनुसार अपने बच्चे को सही और गलत की परख करना सिखायें.

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