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कॉलेज की पढ़ाई के दौरान प्रेम समस्या और उसका समाधान

Feb 9, 2018 13:38 IST
    Romance in college
    Romance in college

    कॉलेज में पढ़ाई करते समय विपरीत लिंग के साथ मित्रता करना स्वाभाविक और सहज है. छात्रों के मानसिक और सामाजिक विकास के लिए यह जरुरी भी है. लेकिन उम्र की इस दहलीज पर कभी कभी यह दोस्ती अज्ञानता वश क्रश, मोह, प्रेम संबंध, या रोमांस में बदल जाती है. कभी कभी यह दोस्ती एक अप्रत्याशित, अनुचित और अप्रिय स्थिति का कारण भी बन जाती है. ऐसे कई उदाहरण देखने को मिलते हैं जहाँ लड़के लड़कियां अपने गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड से तकरार या कहासुनी के कारण बहुत ज्यादा तनाव में आ जाते है और कभी कभी अप्रत्याशित हिंसक कदम भी उठा लेते हैं. इस वजह से उनकी प्रतिभा तथा अध्ययन दोनों बुरी तरह से प्रभावित होते हैं. 

    संबंधों की प्रकृति

    कॉलेज की मित्रता जब रोमांस का रूप धारण करने लगती है तो यह छात्रों के हित में नहीं होता है. इस दौरान लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते और इसे दो छात्रों के बीच पारस्परिक मैत्री का नाम दे देते हैं. लेकिन यह रोमांस किशोरावस्था की एक गलती साबित हो सकती है. इस दौरान छात्रों को इस विषय पर विशेष रूप से ध्यान देने की  आवश्यकता होती है क्योंकि इस अवस्था में छात्र अभी शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्तर पर पूरी तरह परिपक्व नहीं होते हैं और जीवन को उसके सही परिप्रेक्ष्य में नहीं समझ पाते हैं.  

    यहाँ उन्हें अपने संबंधो की प्रकृति को समझकर उसके अनुरूप आचरण करने की आवश्यकता होती है. उन्हें यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि हमारा सम्बन्ध,विश्वास,सही समझ और पारस्परिक सम्मान की भावना पर अवलंबित है. इसे जीवन में कामयाबी हासिल करने तक परस्पर विश्वास के साथ बनाये रखें. उन्हें यह भी समझने का प्रयास करना चाहिए कि आगे चलकर अपना निर्णय खुद लेने की स्थिति में आ जाने के बाद इन सम्बन्धों पर गहराई से विचार कर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है. तब तक आप एक बहुत अच्छे दोस्त के दोस्ती के एहसास के साथ अपने लक्ष्य पर फोकस करें.

    कॉलेज में रोमांस

    1. कॉलेज के दौरान विकसित रोमांस को इन्फैचुएशन,क्रश,जुवेनाइल लव,पप्पी लव के रूप में जाना जा सकता है. ये सारी बातें छात्रों को समझाई जानी चाहिए साथ ही उन्हें यह भी बताने की कोशिश की जानी चाहिए कि अभी इस अवस्था में आपका मन मस्तिष्क अविकसित अवस्था में है और आप सीखने की प्रक्रिया से गुजर रहें हैं.यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है इसे नजरअंदाज कर आगे बढिए.
    2. इस  उम्र में आपको अपने अध्ययन पर पूरी तरह ध्यान देना चाहिए. आप अपनी पढ़ाई में अच्छा करने के क्रम में अपने मित्रों का सहयोग ले सकते हैं लेकिन जिन बातों का आपकी पढ़ाई और प्रोग्रेस से कोई लेना देना नहीं है उस पर अपना समय बर्बाद कर भविष्य में पाने वाले ग्रेड को प्रभावित न करें.
    3. कभी कभी तनाव से मुक्त होने और थोड़ी देर की शांति के लिए बहुत सारे छात्र टाईमपास दोस्ती करते हैं,लेकिन इसका वांछित परिणाम हानिकारक होता है.
    4. अगर आपका किसी के साथ प्यार भरा रिश्ता है तो हो सकता है कि उसके कार्यों से कभी आपका दिल टूटे तो आपका ब्रेकअप होने की संभावना हो सकती है. इस तरह की स्थिति कहीं न कहीं मानसिक आघात का कारण बनेगी जो आपके स्टडी और रिजल्ट दोनों को प्रभावित करेगी. कॉलेज की पढ़ाई के दौरान आपका आघात की स्थिति में पहुंचना आपके विकास के लिए सही नहीं है.
    5. एकतरफा प्यार हमेशा जोखिम भरा होता है. आपको सबसे पहले अपने पसंदीदा दोस्त के साथ एक स्वस्थ्य सम्बन्ध स्थापित करना चाहिए, उसके स्वभाव, उसके साथ अपने सामंजस्य आदि के विषय में जाँच पड़ताल के लिए समय लेना चाहिए तब कोई निर्णय लेना चाहिए. अभी आप कॉलेज में है और आपके पास  इन सभी चीजों के लिए पर्याप्त समय नहीं है और आपकी प्राथमिकता अलग है.
    6. इस उम्र में रोमांस के चक्कर में पड़कर आप अन्य सामाजिक पहलूओं से हट जायेंगे, जिससे आपके व्यक्तित्व का पूर्ण विकास बाधित होगा.
    7. कभी कभी आपका साथी आपको कुछ गलत आदतों के लिए आप पर दबाव डाल सकता है. उदाहरण के लिए शराब चखने या सिगरेट पीने के लिए कह सकता है जो कहीं न कहीं आपके स्वस्थ्य के लिए हानिकारक है और भविष्य में इस तरह के गलत आदतों का शिकार बनाता है.
    8. कई बार क्लास में कुछ छात्रों द्वारा ऐसी टिप्पणी की जाती है कि अगर तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है तो तुम स्मार्ट या मॉडर्न नहीं हो और ऐसी स्थिति में छात्र विवशता वश दोस्ती या प्रेम करते है. यही बात लड़कियों पर भी लागू होती है. दूसरी तरफ किसी के साथ डेटिंग करने के कारण इस दौरान लड़के तथा लड़कियों की गलत छवि भी बनती है जो करियर के लिहाज से बिलकुल सही नहीं है. 

    9. इस दौरान छात्र अपना अधिकांश समय डेटिंग में गुजारते हैं और अपने दोस्तों,मित्रों से कटते चले जाते हैं. इस समय वे पर्याप्त स्टडी तो नहीं ही कर पाते, जरुरत पड़ने पर दोस्त मित्र भी उनका साथ नहीं देते.

    निष्कर्ष:

    वस्तुतः कॉलेज का समय जीवन का निर्णायक समय होता है. इसी दौरान छात्र अपने करियर पर पूरी तरह फोकस करते हैं . माता-पिता, शिक्षकों और अभिभावकों को इस अवधि में छात्रों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. एक गलत कदम छात्र के मन को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है. छात्रों को कभी भी इस बात का एहसास नहीं दिलाना चाहिए कि विपरीत लिंग से दोस्ती करना सामजिक और भावनात्मक दृष्टिकोण से उचित नहीं है.

    उसके हर बात को खुले मन से स्वीकार करते हुए उस पर विचार कर अपनी बात और व्यवहार से छात्रों को पूरी तरह संतुष्ट करना चाहिए.

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