क्या प्राइवेट सेक्टर बैंक, पब्लिक सेक्टर बैंकों से अधिक सैलरी पैकेज ऑफर करते हैं?

May 11, 2018, 18:12 IST

पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के बैंकों की तुलना करने के लिए यहाँ हम दोनों के प्रास एंड कांस पर चर्चा करें। पब्लिक सेक्टर बैंक आपको एक आरामदायक और कम तनावपूर्ण जीवन प्रदान करते हैं लेकिन यह भी सत्य है कि प्राइवेट सेक्टर बैंक की तुलना में पब्लिक सेक्टर बैंक कम वेतन पैकेज प्रदान करते हैं।

Public Vs Private sector banks Salary & Career growth
Public Vs Private sector banks Salary & Career growth

हम पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर बैंक के सैलरी पैकेज और करियर ग्रोथ की तुलनाकरने से पहले हमे उनसे जुड़े कुछ तथ्यों को जानना चाहिए। यदि हम प्रवेश स्तर पर दोनों सेक्टरों के बैंकों द्वारा प्रदान की जाने वाली सैलरी की तुलना करते हैं तो पब्लिक सेक्टर बैंक में औसत सीटीसी (CTC-Cost to company)  लगभग सालाना 5.7 लाख है जबकि प्राइवेट सेक्टर के बैंक फ्रेशर्स को सालाना 4 लाख रुपये का पैकेज प्रदान करता है लेकिन अनुभव के साथ आगे बढ़ने पर,  SBI  के अध्यक्ष का 28.96  लाख  (2016-17 के आकड़ो के अनुसार) का पैकेज है वहीँ उनके समकक्ष आईसीआईसीआई बैंक (SBI का निकटतम निजी क्षेत्र का प्रतियोगी) के अध्यक्ष का पैकेज 6.09 करोड़ (2016-17 के आकड़ो के अनुसार) हैं। तो, पब्लिक सेक्टर बैंक में विभिन्न भर्तीयों के लिए आवेदन करने वाले लाखों उम्मीदवार क्यों हैं? क्या जॉब सिक्योरिटी ही इसका एकमात्र कारण है? आइये जाने।

पब्लिक सेक्टर  बैंक: प्रास एंड कांस

पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के बैंकों की तुलना करने के लिए यहाँ हम दोनों के प्रास एंड कांस पर चर्चा करें। पब्लिक सेक्टर बैंक आपको एक आरामदायक और कम तनावपूर्ण जीवन प्रदान करते हैं लेकिन यह भी सत्य है कि प्राइवेट सेक्टर बैंक की तुलना में पब्लिक सेक्टर बैंक कम वेतन पैकेज प्रदान करते हैं।

वेतन पैकेज

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में वेतन पैकेज केवल प्रवेश स्तर पर ही अच्छा कहा जा सकता है। बैंक में 4-5 साल की सेवा पूरी कर लेने के बाद आपकी करियर ग्रोथ आपके एक्सपीरियंस अर्थात् अनुभव के अनुरूप नहीं होती है।  SBI प्रवेश स्तर पर अपने अधिकारियो को लगभग 8 लाख सीटीसी ऑफर करता है वहीँ इसके चेयरमैन को   अपने करीबी प्रतिद्वंद्वी आईसीआईसीआई बैंक के सीईओ (CEO-Chief Executive Officer) से 20 गुना कम सैलरी मिलती  हैं।

कार्य से संबंधित तनाव

प्राइवेट सेक्टर बैंक में आपको टारगेट दिए जाते है आपको अपने टारगेट्स समय पर पूरा करना होता है। टारगेट न पूरा होने की दशा में आपको उचित स्पष्टीकरण देना भी होगा। ये टारगेट आगे चलकर बैंक में आपके करियर ग्रोथ को निर्धारित करते है। यह परिदृश्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए समान नहीं है, वहां, लक्ष्य आवंटित ज़रूर किए जाते हैं लेकिन वे प्राइवेट बैंकों की तरह बहुत सख्त नहीं होते है।

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करियर ग्रोथ और लर्निंग

प्रबंधन सिद्धांतों (management theories) के अनुसार, लक्ष्य जितना कठिन होता है, कर्मचारियों की उसे पूरा करने के लिए प्रतिक्रिया उतनी ही बेहतर होती है। यह कथन आसानी से प्राइवेट सेक्टर के बैंकों से संबंधित हो सकता है; जहाँ आपको सामने हमेशा नयी चुनौती होती है और आपको हर दिन उस नयी चुनौती का सामना नए तरीके से करना होता है। पब्लिक सेक्टर के बैंकों में, आपको नौकरी पाने के लिए तो कड़ी मेहनत करनी होती है, लेकिन उसके बाद, लर्निंग कर्व नीचे की तरफ बढता है क्योंकि आपको हर दिन नयी चुनौती का सामना नहीं करना होता है।

जॉब सिक्योरिटी

यह एक ऐसा पहलू है जहां पब्लिक सेक्टर बैंक में कार्यरत कर्मचारी, प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में काम कर रहे लोगो से अधिक स्कोर करते हैं। निराशाजनक प्रदर्शन के बावजूद जब तक आप कुछ अनैतिक नहीं करते हैं, तब तक आप आपकी जॉब सिक्योर है।

प्राइवेट सेक्टर बैंक: प्रास एंड कांस

प्राइवेट सेक्टर बैंकों में निश्चित रूप से सैलरी पैकेज मध्यम और वरिष्ठ प्रबंधन स्तरों (middle and senior management levels ) के लिए प्राइवेट सेक्टर बैंक की तुलना में अच्छा है, हालांकि जूनियर प्रबंधन स्तर (junior management level) के लिए पब्लिक सेक्टर बैंकों का सैलरी पैकेज बेहतर है।

बेहतर सैलरी पैकेज

यह सत्य है कि कुछ वर्षों के एक्सपीरियंस अर्थात् अनुभव होने के बाद पब्लिक सेक्टर बैंकों की तुलना में प्राइवेट सेक्टर के बैंक निश्चित रूप से आपको अधिक सैलरी पैकेज प्रदान और सुविधाये प्रदान करते है। यही कारण है कि पब्लिक सेक्टर बैंकों में मूल रूप से मध्यम प्रबंधन स्तर (middle management levels) पर  प्रतिभा का पलायन अधिक है क्योंकि इस स्तर पर प्राइवेट सेक्टर के बैंक लोगो को अधिक वेतन पैकेज प्रदान करते हैं।

नौकरी से संबंधित तनाव

बैंकिंग नौकरी का यह पहलू पब्लिक सेक्टर बैंकों से अधिक प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में है। प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में आपको लगातार चुनौतिया दी जाती है और आपको हर रोज़ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होता है। आपको समय पर अपने लक्ष्यों को पूरा ही करना होगा अन्यथा कभी भी आपको अपनी नौकरी गवानी पड़ सकती हैं। इस मामले में पब्लिक सेक्टर के बैंक बेहतर हैं क्योंकि आवंटित लक्ष्यों के संदर्भ में बहुत यहाँ बहुत ही कम तनाव है।

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चुनौतीपूर्ण असाइनमेंट और सीखने के अवसर

यह एक ऐसा पहलू है जहां प्राइवेट सेक्टर  के बैंक , पब्लिक सेक्टर के बैंक से ज्यादा स्कोर करते हैं क्योंकि एक बार जब आप प्राइवेट सेक्टर में  अपने काम में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो आपको अधिक चुनौतीपूर्ण असाइनमेंट दिए जाएंगे और आपको कुछ ही समय में कॉर्पोरेट सीढ़ी के माध्यम से तेज़ी से अपने करियर में आगे बढ़ पायेगे।

प्राइवेट सेक्टर बैंकों में मेरिटोक्रेसी नियम (Meritocracy rules)

यह उन उम्मीदवारों के लिए है जो  IBPS PO परीक्षा के माध्यम से नौकरी पाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं ।(SBI एक ऐसा  सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है जो अभी भी मेरिटोक्रेसी को मानता है) पब्लिक सेक्टर बैंक में नौकरी पाने के लिए कड़ी मेहनत और प्रतिभा की आवश्यकता होती है,  परन्तु नौकरी ज्वाइन करने के बाद  अर्थात् करियर ग्रोथ के लिए प्रतिभा की न्यूनतम भूमिका होती है। वरिष्ठता आधारित (seniority based) प्रमोशन पालिसी तथा अन्य नीतियों के कारण पब्लिक सेक्टर बैंक में प्रतिभाशाली लोगों को अक्सर निराश होना पड़ता हैं। पब्लिक सेक्टर बैंकों को प्रतिभाशाली लोगों के करियर ग्रोथ के लिए नई नीतियो  को लागू करने की आवश्यकता है।

प्राइवेट सेक्टर  बैंकों में परफॉरमेंस बेस्ड इंसेंटिव (Performance Based Incentive) है

प्राइवेट सेक्टर में अच्छा प्रदर्शन करने पर कई बैंक इंसेंटिव प्रदान करते है। जबकि पब्लिक सेक्टर बैंक में अभी तक ऐसी कोई भी प्रोत्साहन नीति नहीं हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में पब्लिक सेक्टर बैंकों के लिए टैलेंट रिटेंशन एक प्रमुख मुद्दा रहा है क्योंकि बेहतर पैकेज के कारण पब्लिक सेक्टर बैंक के कर्मचारी निजी क्षेत्र के बैंक की तरफ आकर्षित होते है। SBI ने इस प्रवृत्ति को समझ लिया है और भारत सरकार के अनुमोदन के अधीन एक नई प्रोत्साहन योजना शुरू करने का फैसला किया है। SBI ने वित्त मंत्रालय के समक्ष यह प्रस्ताव रखा है कि उसे अपने लाभ का लगभग 3% हिस्सा अपने कर्मचारियों के बीच साझा करने की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि कर्मचारी संगठन से जुड़ा महसूस करे। लेकिन अभी तक यह देखना बाकी है कि क्या भारत सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है।

स्पष्ट रूप से पब्लिक सेक्टर और प्राइवेट सेक्टर  के बैंकों में काम करने के अपने फायदे और नुकसान हैं। यदि आपके पास अनुभव है और आप पैकेज को अधिक महत्व देते है तो प्राइवेट सेक्टर  के बैंक आपके लिए बेहतर है जबकि एक फ्रेशर के पब्लिक सेक्टर बैंक ज्वाइन करना बेहतर हो सकता हैं। सही निर्णय आपकी रूचियों और प्राथमिकताओ पर आधारित होना चाहिए।

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Jagran Josh
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Education Desk

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