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21 जून को योग दिवस से रोजाना करें ये आसन, रहें फिट और तंदुरुस्त

हर साल 21 जून को मनाया जाने वाला इंटरनेशनल योग डे हमें अपनी फिजिकल और मेंटल हेल्थ कायम रखने के लिए अपने रोज़मर्रा के जीवन में योग को अपनाने की प्रेरणा देता है. कुछ सरल आसन हमारे लिए काफी फायदेमंद होते हैं. इसके अलावा, ये हमारी मेमरी और कंसंट्रेशन भी बढ़ाते हैं.

Jun 19, 2019 17:14 IST
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Yoga Day Special
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विश्व के कई देश हर साल 21 जून को योग दिवस मनाते हैं. पूरे विश्व में योग दिवस मनाने की शुरुआत 21 जून, 2015 से हुई थी. दरअसल, 21 जून को उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे बड़ा दिन होता है. विश्व में स्वास्थ्य, भाईचारे और शांति की स्थापना के लिए यूनाइटेड नेशन ऑर्गेनाइजेशन द्वारा 21 जून को योग दिवस मनाने की परंपरा की शुरुआत की गई. जैसेकि हम सभी यह जानते हैं कि, 27 सितम्बर 2014 को यूनाइटेड नेशन्स की जनरल असेंबली में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था. इस प्रस्ताव में उन्होंने कहा था -

योग प्राचीन भारतीय परम्परा का अमूल्य उपहार है. यह मन और शरीर, विचार और कार्य, सयंम और इच्छा-पूर्ति तथा मनुष्य और प्रकृति के बीच एकीकरण स्थापित कर खुद को स्वस्थ्य और सयंमित रखने का संपूर्ण दृष्टिकोण है. यह किसी तरह की एक्सरसाइज नहीं है. यह खुद को समझने तथा अपनी आत्मा को जानने की प्रोसेस है. अपने लाइफ-स्टाइल को बदलकर तथा अपने अन्दर चेतना का विकास कर हम अपना संपूर्ण विकास कर सकते हैं. इसलिए आइए इस योग दिवस के अवसर पर हम कुछ आसन और प्राणायाम रोजाना करने का संकल्प करें.

रोजाना योग करने से मिलते हैं अनेक लाभ

प्राचीन भारत की अमूल्य धरोहर योग में शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक क्रियाओं को रोजाना करना शामिल किया जाता है. रोजाना योग करने से हमें कई हेल्थ बेनिफिट्स मिलते हैं और शरीर, मन और सांसों के एकीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत होती है. योग के मुख्य लाभ हैं -

  • बेहतर हेल्थ
  • मज़बूत मानसिक शक्ति
  • शारीरिक शक्ति में वृद्धि
  • प्रतिरक्षण क्षमता का विकास
  • चेतना और आत्मा को भी मिलते हैं अनेक लाभ

आज के इस बदलते हुए परिवेश में छात्रों के साथ सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए योग बहुत जरुरी है ताकि वे सयंमित रूप से अपना कार्य करते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकें. तनाव से छुटकारा पाने का एकमात्र साधन योग की मुद्राएं, प्राणायाम और ध्यान ही है.

इस आर्टिकल में हम कुछ सरल लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से खास आसनों की चर्चा कर रहे हैं जिन्हें रोजाना करके आप अपने तन-मन को बिलकुल स्वस्थ रख सकते हैं. आइये आगे पढ़ें:

सूर्य नमस्कार

यदि आप स्वस्थ्य रहने का कोई आसान तरीका खोज रहे हैं तो ‘सूर्य नमस्कार’ आसन आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प है. सूर्य नमस्कार' का शाब्दिक अर्थ ‘सूर्य को नमस्कार करना’ है. यह योग आसन शरीर को सही आकार देने और स्वस्थ रखने के साथ ही, आपके मन को शांत रखने का उत्तम तरीका है. ऐसा माना जाता है कि केवल सूर्य नमस्कार आसन करने पर ही आपको सभी आसन क्रियाएं करने का लाभ मिल जाता है. अगर आप रोजाना योग के लिए केवल 10 मिनट का समय ही निकाल सकते हैं तो केवल सूर्य नमस्कार के माध्यम से ही आप अपने तन-मन को स्वस्थ रख सकते हैं क्योंकि सूर्य नमस्कार 12 शक्तिशाली योग आसनों का एक समन्वय है. यह एक उत्तम कार्डियो-वॅस्क्युलर एक्सरसाइज भी है और स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है. सूर्य नमस्कार हमारे मन और शरीर को पूरी तरह तंदुरुस्त रखता है.

सूर्य नमस्कार को रोजाना सुबह के समय खाली पेट करना चाहिए. इसमें कुल 12 योगासन शामिल होते हैं जो निम्नलिखित हैं:

  • प्रणामासन
  • हस्तोत्तानासन  
  • हस्त पादासन
  • अश्व संचालानासन
  • दण्डासन
  • अष्टांग नमस्कार
  • भुजंगासना
  • पर्वतासन
  • अश्व संचालानासन
  • हस्त पादासन
  • हस्तोत्तानासन  
  • ताड़ासन

 

 

गरुड़ासन

यह आसन अगर नियम से किया जाए तो इससे आपके हाथ या पैर का दर्द ठीक हो सकता है. हाथ या पैरों में अन्य कोई विकृति हो तो इससे यह दूर हो जाता है. अगर आप किसी गुप्त रोग, पेशाब रोग एवं गुर्दे के किसी सामान्य रोग से पीड़ित हैं तो भी यह आसन करना आपके लिए अति उतम साबित हो सकता है.

बकासन


“बक” शब्द का अर्थ “बगुला” नामक पक्षी है. इस आसन में शरीर की स्थिति बगुले के समान हो जाती है. इसलिए इस आसन को “बकासन” कहते हैं.

इस आसन को करने के लिए दोनों हाथों के पंजे धरती पर रखकर अपने दोनों घुटनों को बाजुओं के सहारे ऊपर उठाकर,पैरों सहित ऊपर को उठाएं. केवल हाथों के पंजे जमीन पर रहें और शेष शरीर अन्तराल में रहे. इसको करने से नीचे दिए गए लाभ होते हैं:

  • इस आसन से मन को स्थिर रखा जा सकता है.
  • बाजुओं को बल मिलता है और हदय-गति नियमित रहती है.
  • इस आसन से हाथों और भुजाओं की मांशपेशियां तथा नस-नाड़ियां मजबूत बनती हैं.

पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन दो शब्दों से मिलकर बना है -‘पश्चिम’ का अर्थ होता है पीछे और ‘उत्तान’ का अर्थ होता है तानना. इस आसन के दौरान रीढ़ की हड्डी के साथ शरीर का पिछला भाग तन जाता है जिसके कारण इसका नाम पश्चिमोत्तानासन पड़ गया है. यह स्वस्थ के लिए काफी लाभदायक आसन है. यह विभिन्न  प्रकार की बीमारियों को दूर करने में मदद करता है.

 

  • अगर आपको अपनी पेट की चर्बी कम करनी हो तो यह आसन का नियमित रूप से करें. यह पेट को कम करने के साथ-साथ कमर को पतला करने में भी मदद करता है.
  • यह आसन वीर्य (Semen) से सम्बंधित परेशानियों को दूर करता है.
  • इसका नियमित अभ्यास करने से पेट की पेशियां मजबूत होती है और यह आसन पाचन से सम्बंधित परेशानियां जैसे कब्ज, अपच को दूर करने में सहायक है.
  • इस आसन के अभ्यास से त्वचा के कई रोगों को दूर करने में सहायता मिलती है.
  • यह आसन साइटिका से सम्बंधित रोगों को दूर करता है.
  • पश्चिमोत्तानासन का नियमित अभ्यास करने से तनाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है. यह आसन क्रोध को दूर करके मन को शांत और प्रसन्न रखता है. इस आसन को करने से गुस्सा कम आता है.
  • पश्चिमोत्तानासन के अभ्यास से आप गुर्दे की पथरी को रोक सकते हैं.
  • यह बवासीर में लाभकारी है.
  • यह आसन मेरुदंड को लचीला बनाता है और हमें कई रोगों से बचाता है.

आप भी इस बार 21 जून को इंटरनेशनल योगा डे से इन सरल लेकिन खास आसनों अपनी रोजमर्रा के जीवन में शामिल करें और अपने तन-मन को स्वस्थ रखें. योग हमारे शरीर और मन को कई बीमारियों से होने वाली तकलीफों से बचाकर डॉक्टर की फीस और दवाइयों का खर्च भी बचाता है. इसके साथ ही हम हेल्दी रहकर अपनी, अपने परिवार, समाज और देश की बहुत अच्छी देखभाल कर सकते हैं क्योंकि ‘तंदुरुस्ती हजार नियामत’ है.

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