खगोलविदों द्वारा गर्म, बृहस्पति जैसे बहिर्ग्रहों के लिए क्लाउड एटलस निर्मित

May 28, 2020, 19:11 IST

यह मॉडल खगोलविदों को दूरस्थ और निराली दुनिया के वायुमंडल में गैसों का अध्ययन करने में मदद करेगा क्योंकि बादल वायुमंडलीय संरचना का माप प्राप्त करने में हस्तक्षेप करते हैं.

Cloud Atlas created by Astronomers for hot, Jupiter like exoplanets in Hindi
Cloud Atlas created by Astronomers for hot, Jupiter like exoplanets in Hindi

हमारे सौर मंडल में, विशाल ग्रहों और अन्य तारों के चक्कर लगाने वाले अनोखे बादल हैं जो पृथ्वी पर किसी भी चीज से बिलकुल अलग हैं, और ये गैसीय बादल जो अपने तारों - तथाकथित सबसे गर्म जुपिटरों - के करीब परिक्रमा कर रहे हैं.

कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम के खगोलविदों की एक टीम अब एक ऐसा मॉडल लेकर आई है, जो यह अनुमान लगाने में सक्षम होगा कि स्मोग युक्त मीथेन धुंध से लेकर नीलम तक कई तरह के बादल किस तरह से विभिन्न तामपान वाले जुपिटरों पर होने की उम्मीद कर सकते हैं और यह तापमान हजारों डिग्री केल्विन तक हो सकता है.

यह मॉडल खगोलविदों को दूर और अजीब दुनिया के वायुमंडल में गैसों का अध्ययन करने में मदद करेगा क्योंकि वायुमंडलीय संरचना का माप प्राप्त करने में बादल हस्तक्षेप करते हैं. यह ठंडे विशाल ग्रहों के साथ उनके चंद्रमाओं, जैसेकि शनि और बृहस्पति के चंद्रमा टाइटन के वायुमंडल को समझने में भी सहायक होगा.

अनोखे बादलों के बारे में अध्ययन:

सबसे सामान्य किस्म के बादल, जो तापमान की एक बड़ी रेंज में होने की उम्मीद कर सकते हैं, उनमें पिघली हुई क्वार्ट्ज या पिघली हुई रेत जैसी ऑक्सीजन और सिलिकॉन की ठोस या तरल बूंदें शामिल होनी चाहिए. 950 केल्विन से नीचे के तापमान वाले थोड़े ठंडे लेकिन गर्म जुपिटर के आसमान पर  हाइड्रोकार्बन धुंध छाई रहती है जो अनिवार्य रूप से स्मॉग होती है. खगोलविदों द्वारा विकसित यह मॉडल इन दूरस्थ और निराली दुनिया के वायुमंडल में गैसों का अध्ययन करने में उनकी मदद करेगा.

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में एक पोस्ट-डॉक्टरल फ़ेलो और 25 मई को जर्नल नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित इस दस्तावेज (पेपर जिसमें इस मॉडल का विवरण दिया गया है) के पहले लेखक पीटर गाओ के अनुसार, इन गर्म वायुमंडलों में जिस तरह के बादल हो सकते हैं, वास्तव में हमारे सौरमंडल में उन्हें बादल नहीं माना जा सकता है.

वे आगे कहते हैं कि हमारे पास ऐसे मॉडल रहे हैं जो विभिन्न रचनाओं की भविष्यवाणी करने में सक्षम थे, लेकिन अध्ययन का मुख्य बिंदु मूल रूप से यह आकलन करना था कि कौन सी रचना वास्तव में मायने रखती है और फिर, इसके आधार पर हमारे पास जो डाटा उपलब्ध है, उस डाटा से मॉडल की तुलना की जानी चाहिए.

यह अध्ययन बहिर्ग्रह (एक्सोप्लैनेट) वायुमंडल के पिछले अध्ययनों से कैसे लाभ उठाता है?                                                      

इस अध्ययन ने बहिर्ग्रहों के वायुमंडल के अध्ययन में पिछले एक दशक में आये उछाल का फायदा उठाया है. हालांकि ये बहिर्ग्रह बहुत दूर और दिखने में मंद हैं, कई दूरबीनें और विशेष रूप से हबल स्पेस टेलीस्कोप तारों पर फोकस करने और ग्रहों के वायुमंडल से गुजरने वाले तारों के प्रकाश को उन ग्रहों के सामने से गुजरते हुए कैप्चर करने में सक्षम है.

स्पेक्ट्रोस्कोपिक माप से पता चला है कि इन प्रकाशों का तरंग दैर्ध्य जो अवशोषित किया गया है, खगोलविदों को सूचित करता है कि कौन से तत्व वातावरण बनाते हैं. यह तकनीक और आज तक की ऐसी अन्य तकनीकों ने इन ग्रहों पर पानी, कार्बन मोनोऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, पोटेशियम और सोडियम गैसों की उपस्थिति और सबसे गर्म ग्रहों में, वाष्पीकृत एल्यूमीनियम ऑक्साइड, टाइटेनियम और लोहे की उपस्थिति होने की जानकारी प्रदान की है.

यह देखा गया है कि जबकि कुछ ग्रहों पर स्पष्ट स्पेक्ट्रोस्कोपिक विशेषताएं और स्पष्ट वायुमंडल हैं, उनमें से कई ग्रहों में बादल हैं जो तारों के प्रकाश को पूरी तरह आने से रोकते हैं, जिस वजह से बादल की ऊपरी परतों के नीचे गैसों के बारे में अध्ययन नहीं हो सकता है. गैसों की रचनाएं खगोलविदों को यह बताने में सक्षम होंगी कि ये बहिर्ग्रह कैसे बनते हैं और क्या जीवन निर्माण के तत्त्व इन ग्रहों के आसपास मौजूद हैं.

गाओ के अनुसार, कई बादल देखे गए हैं: कुछ प्रकार के कण - जो अणु नहीं, लेकिन छोटी बूंदें हैं - इन वायुमंडलों में घूम रही हैं. उन्होंने आगे कहा कि यह वास्तव में ज्ञात नहीं है कि वे किस तत्त्व से बने  हैं, लेकिन वे हमारे अवलोकनों को ख़राब या भ्रमित कर रहे हैं जिससे मीथेन और पानी जैसे महत्वपूर्ण अणुओं की संरचना और प्रचुरता का आकलन करना अधिक कठिन हो गया है.

कई अनोखे प्रकार के बादलों के लिए प्रस्ताव:

इन टिप्पणियों को समझाने के लिए, खगोलविदों ने ऐसे कई अनोखे प्रकार के बादलों का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है जो एल्यूमीनियम ऑक्साइड, पिघले हुए नमक जैसेकि पोटेशियम क्लोराइड; नीलम और माणिक के तत्त्व कोरंडम; पृथ्वी पर एक चट्टान के रूप में मौजूद मैंगनीज या जस्ता का सल्फाइड; सिलिकॉन ऑक्साइड या सिलिकेट्स जैसेकि क्वार्ट्ज जो रेत का मुख्य घटक है; और कार्बनिक हाइड्रोकार्बन यौगिक से बने होते हैं. गाओ के अनुसार, ये बादल ठोस या तरल एरोसोल हो सकते हैं.

इस मॉडल से क्या पता चलता है:

गाओ ने ऐसे कंप्यूटर मॉडल्स को अपनाया था, जिन्होंने शुरू में पृथ्वी पर पानी के बादल बनाए थे और बाद में ये मॉडल्स जुपिटर जैसे ग्रहों के बादलों के वायुमंडलों तक बढ़ाए गए जहां मीथेन और अमोनिया के बादल हैं.

उन्होंने इस मॉडल को और अधिक उच्च तापमान तक बढ़ा दिया जोकि 2,800 केल्विन या 4,600 डिग्री फ़ारेनहाइट तक गर्म गैस वाले विशाल ग्रहों पर देखा गया है और विभिन्न तत्त्वों के इन अति उच्च तापमानों पर बादलों में संघनित होने की संभावना होती है.

फिर, यह मॉडल इस बात का ध्यान रखता है कि विभिन्न परमाणुओं या अणुओं की गैसें कैसे बूंदों में संघनित होती हैं, किस तरह से ये बूंदें बढ़ती या लुप्त हो जाती हैं और क्या वे गुरुत्वाकर्षण के कारण समाप्त हो जाती हैं या हवाओं या उपरि बहाव से उनके वायुमंडल में पहुंच जाने की संभावना होती है.

गाओ का विचार है कि समान भौतिक सिद्धांत बादलों के सभी रूपों की संरचना का मार्गदर्शन करते हैं. उन्होंने आगे उल्लेख किया है कि उन्होंने जो किया है वह इस मॉडल को आगे बढ़ाने और इसे आकाशगंगा के अन्य हिस्सों में इस्तेमाल करने के लिए है, ताकि यह लोहे के बादलों, सिलिकेट के बादलों और नमक के बादलों के बारे में पता लगाने में सक्षम हो सके. उन्होंने 30 एक्सोप्लैनेट्स के बारे में  उपलब्ध डाटा से अपनी भविष्यवाणियों की तुलना की. यह डाटा आज तक दर्ज ट्रांसमिशन स्पेक्ट्रा के साथ लगभग 70 ट्रांसिटिंग एक्सोप्लैनेट्स से लिया गया है.

इस मॉडल से पता चला है कि वर्षों में निर्मित हुए कई अनोखे बादलों को बनाना मुश्किल है क्योंकि इनकी गैसों को संघनित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा बहुत अधिक है.

इस मॉडल के अनुसार, एल्यूमीनियम ऑक्साइड और टाइटेनियम ऑक्साइड अत्यधिक गर्म तापमान में उच्च-स्तरीय बादलों के रूप में घनीभूत होते हैं. अपेक्षाकृत ठंडे तापमान के एक्सोप्लेनेट्स में, ये बादल ग्रह के निकट गहराई में बनते हैं और उच्च सिलिकेट बादलों के कारण छिपे होते हैं. बहुत अधिक ठंडे  एक्सोप्लैनेट्स पर, ये सिलिकेट बादल भी वायुमंडल में गहराई पर स्थित होते हैं जिससे इन ग्रहों के ऊपर स्पष्ट वायुमंडल होता है. यहां तक ​​कि अधिक ठंडे तापमान पर, एक्सोप्लैनेट के तारे से आने वाली पराबैंगनी प्रकाश, मीथेन जैसे कार्बनिक अणुओं को बेहद लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखलाओं में परिवर्तित कर देती है, जो स्मॉग की उच्च-स्तरी धुंध बनाती है. यह स्मॉग सोडियम क्लोराइड या पोटेशियम के निचले स्तर के नमक से बने बादलों को छिपा सकता है.

गाओ ने उन खगोलविदों को 900 से 1400 केल्विन या लगभग 2,200 केल्विन की तुलना में अधिक गर्म ग्रहों पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव दिया है, जो वायुमंडल में गैसों का अधिक आसानी से अध्ययन करने के लिए एक बादल रहित ग्रह की तलाश करते हैं.

भावी टिप्पणियां भविष्यवाणियों की पुष्टि कर सकती हैं:

अध्ययन के सह-लेखक, हन्ना वेकफ़ोर्ड, जो ब्रिस्टल विश्वविद्यालय, इंग्लैंड में एक खगोल भौतिकीविद हैं, उनका उल्लेख है कि कई एक्सोप्लैनेट्स के वायुमंडलों में पहले भी बादलों की उपस्थिति को मापा गया है, लेकिन जब हम सामूहिक रूप से एक बड़े नमूने को देखते हैं तो हम इन एक्सोप्लैनेट्स के वातावरण में भौतिकी और रसायन विज्ञान को अलग कर सकते हैं. वह आगे कहती हैं, कि प्रमुख बादल प्रजातियां रेत की तरह ही आम हैं और आगामी जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) की मदद से पहली बार खुद बादलों की वर्णक्रमीय विशेषताओं को मापना वास्तव में रोमांचक होगा.

नासा के JWST, जोकि कुछ वर्षों के भीतर लॉन्च किया जा सकता है, के द्वारा की जाने वाली भविष्य की टिप्पणियों इन भविष्यवाणियों की पुष्टि करने में सक्षम होंगी और शायद हमारे ग्रह के करीब वाले ग्रहों की छिपी हुई बादल की परतों पर भी प्रकाश डालेंगी. गाओ ने उल्लेख किया था कि बृहस्पति या शनि के भीतर समान अनोखे बादल मौजूद हो सकते हैं, जिनका तापमान अन्य गर्म जुपिटरों के तापमान के समान ही होता है.

गाओ बताते हैं कि चूंकि एक ही बृहस्पति के प्रति हजारों एक्सोप्लैनेट हैं, हम आसानी से उनमें से एक ग्रुप का अध्ययन कर सकते हैं और निरीक्षण कर सकते हैं कि औसत स्थिति क्या है और बृहस्पति से इसकी तुलना कैसे हो सकती है. गाओ और उनके सहयोगियों ने अन्य एक्सोप्लैनेट्स के साथ-साथ भूरे बौनों (ब्राउन ड्वार्फ्स) से प्राप्त अवलोकन डाटा के लिए भी इस मॉडल का परीक्षण करने की योजना बनाई है, जो गैस से बने विशाल ग्रह हैं और इतने विशाल हैं कि वे लगभग तारे ही हैं और उनके आसपास बादल भी हैं.

यूसी सांता क्रूज़ के जोनाथन फोर्टनी कहते हैं कि सौर मंडल में ग्रहों के वायुमंडल का अध्ययन करने के लिए, शोधकर्ताओं के पास आमतौर पर छवियों/ इमेजेज का संदर्भ होता है लेकिन हमारे पास एक्सोप्लैनेट के मामले में ऐसा कोई भाग्य नहीं है. वे सिर्फ छाया या डॉट्स हैं जिनसे जानकारी पाना बहुत ही मुश्किल होता है. उन्होंने आगे उल्लेख किया कि इस कमी को पूरा करने के लिए हमारे पास बहुत बड़ा नमूना आकार (सैंपल साइज़) है. यह ऐसे रुझानों का पता लगाने की अनुमति देता है - ग्रहों के तापमान के साथ बादलों का रुझान – यह कुछ ऐसा है जो हमारे सौर मंडल में मौजूद नहीं है.

Anjali is an experienced content developer and Hindi translator with experience in a variety of domains including education and advertising. At jagranjosh.com, she develops Hindi content for College, Career and Counselling sections of the website. She is adept at creating engaging and youth-oriented content for social platforms. She can be contacted at anjali.thakur@jagrannewmedia.com.
... Read More

यूपीएससी, एसएससी, बैंकिंग, रेलवे, डिफेन्स और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नवीनतम दैनिक, साप्ताहिक और मासिक करेंट अफेयर्स और अपडेटेड जीके हिंदी में यहां देख और पढ़ सकते है! जागरण जोश करेंट अफेयर्स ऐप डाउनलोड करें!

एग्जाम की तैयारी के लिए ऐप पर वीकली टेस्ट लें और दूसरों के साथ प्रतिस्पर्धा करें। डाउनलोड करें करेंट अफेयर्स ऐप

AndroidIOS

Trending

Latest Education News