भारत ने साल 2027 तक मलेरिया मुक्त और साल 2030 तक मलेरिया को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा है. भारत में हर साल लगभग 3 लाख से ज्यादा लोगों की मौत मलेरिया से हो जाती है. भारत ने मलेरिया से बचने के लिए इसे पूरी तरह से खत्म करने का लक्ष्य रखा है.
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने विश्व मलेरिया दिवस (25 अप्रैल) को 'राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम का आयोजन किया था. आईसीएमआर ने भारत से साल 2027 तक मलेरिया को मुक्त करने और साल 2030 तक मलेरिया को पूरी तरह से खत्म करने का लक्ष्य रखा है.
मुख्य तथ्य:
• मलेरिया के खतरों को बताते हुए आईसीएमआर ने कहा कि मलेरिया से निपटने के लिए समय समय पर टेक्निकल, फाइनेंसशियल, ऑपरेशन और प्रशासनिक समस्याओं में उतार चढ़ाव देखे गए हैं.
• विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक विश्व मलेरिया रिपोर्ट के अनुसार साल 2018 के दौरान भारत में साल 2016 के मुकाबले साल 2017 में मलेरिया के मामलों में 24 फीसद की कमी पाई गई है.
• रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि मलेरिया पर नियंत्रण पाने के लिए भारत का खर्च दक्षिण पूर्व एशिया में सबसे कम है.
• डब्ल्यूएचओ के अनुसार, मलेरिया को खत्म करने के लिए व्यापक तरीका अपनाना होगा. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया को लेकर लोगों में जागरुकता फैलाने की अधिक आवश्यकता है.
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भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के बारे में:
• भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), नई दिल्ली, भारत में जैव-चिकित्सा अनुसंधान हेतु निर्माण, समन्वय और प्रोत्साहन के लिए शीर्ष संस्था है. यह विश्व के सबसे पुराने आयुर्विज्ञान संस्थानों में से एक हैं.
• इस परिषद को भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त होती है. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री परिषद के शासी निकाय के अध्यक्ष हैं. जैवआयुर्विज्ञान के विभिन्न विषयों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की सदस्यता में बने एक वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड द्वारा इसके वैज्ञानिक एवं तकनीकी मामलों में सहायता प्रदान की जाती है.
• इस बोर्ड को वैज्ञानिक सलाहकार दलों, वैज्ञानिक सलाहकार समितियों, विशेषज्ञ दलों, टास्क फोर्स, संचालन समितयों, आदि द्वारा सहायता प्रदान की जाती है, जो परिषद की विभिन्न शोध गतिविधियों का मूल्यांकन करती हैं और उन पर निगरानी रखती हे. महानिदेशक, परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष हैं तथा वे स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव भी हैं.
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