भारत और मॉरिशस ने परम्परागत औषधि और होम्योपैथी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए 18 अप्रैल 2016 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए.
उपरोक्त समझौता ज्ञापन पर आयुष (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीपद यस्सो नाइक की हाल में की गई मॉरिशस यात्रा के दौरान सहमति बनीं थी.
भारत एवं मॉरिशस के बीच परम्परागत औषधि और होम्योपैथी के क्षेत्र में सहयोग हेतु समझौता से स्वास्थ्य एवं औषधि की परम्परागत प्रणाली के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा. दोनों देशों में विशिष्ट ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों के कारण पहले से ही यह परम्परा साझी है. इस समझौता ज्ञापन में विशेषज्ञों के आदान-प्रदान, परम्परागत औषधीय पदार्थों की आपूर्ति, संयुक्त अनुसंधान एवं विकास तथा दोनों देशों में स्वास्थ्य और औषधि की परम्परागत प्रणालियों की मान्यता शामिल हैं. इसका उद्देश्य आयुष के तहत आने वाली विभिन्न भारतीय परम्परागत प्रणालियों को बढ़ावा देना और उन्हें लोकप्रिय बनाना भी है.
यह समझौता दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए बहुत महत्वपूर्ण है. आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा रिग्पा और होम्योपैथी (आयुष) ने औषधि की भारतीय प्रणालियों का वैश्विक रूप से प्रचार करने के उद्देश्य से चीन, मलेशिया, त्रिनिडाड टोबेगो, हंगरी, बांग्लादेश और म्यांमार के साथ समझौता ज्ञापन किए हैं. अनुसंधान, प्रशिक्षण पाठयक्रम, बैठकें और विशेषज्ञों की प्रति नियुक्तियों के लिए आवश्यक वित्ती्य संसाधनों का व्य्य आयुष के लिए वर्तमान में आवंटित बजट और वर्तमान योजनाओं से पूरा किया जाएगा.
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