MTSI: केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने पूरा किया 'मदर टंग सर्वे ऑफ इंडिया', जानें कितनी भाषाओं का किया गया सर्वे?

Mother Tongue Survey of India: केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में 'मदर टंग सर्वे ऑफ इंडिया' (MTSI) को पूरा किया जिसके तहत देश की 576 भाषाओं की फील्ड वीडियोग्राफी की गयी. जानें इसके बारें में

'मदर टंग सर्वे ऑफ इंडिया'
'मदर टंग सर्वे ऑफ इंडिया'

Mother Tongue Survey of India: केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में 'मदर टंग सर्वे ऑफ इंडिया' (MTSI) को पूरा किया जिसके तहत देश की 576 भाषाओं की फील्ड वीडियोग्राफी की गयी. गृह मंत्रालय की 2021-22 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की मातृभाषा को संरक्षण प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) में एक वेब-संग्रह स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है.   

'मदर टंग सर्वे ऑफ इंडिया' के बारें में:

  • भारत में मातृभाषा के बारें में डेटा एकत्र करने के लिए 'मदर टंग सर्वे ऑफ इंडिया' परियोजना को चलाया जाता है. इसके तहत भाषाओं की विशेषता के बारें में भी जानकारी एकत्र की जाती है.
  • इनका डेटा  एनआईसी और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC) द्वारा कलेक्ट किया जायेगा जो ऑडियो-वीडियो फाइलों की मदद से किया जायेगा.
  • साथ ही इन वीडियो-ग्राफ डेटा को संग्रह के उद्देश्यों के लिए एनआईसी सर्वेक्षण पर भी अपलोड किया जाएगा.

भारत मे कितनी मातृभाषायें है?

  • भारत का भाषाई सर्वेक्षण (LSI) छठी पंचवर्षीय योजना के बाद से भारत में नियमित रूप से भाषाई शोध पर कार्य कर रहा है.
  • भारत में 2011 की भाषाई जनगणना के आंकड़ों के अनुसार मातृभाषा के रूप में 19,500 से अधिक भाषाएँ या बोलियाँ बोली जाती है. जिसको 121 'मदर टंग ग्रुप' में स्थान दिया गया है.   
  • शब्द "मातृभाषा" किसी व्यक्ति की मूल भाषा को संदर्भित करता है - अर्थात, जन्म से सीखी गई भाषा को मातृभाषा कहा जाता है साथ ही इसे पहली भाषा भी कहा जाता है. 

हिंदी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा:

2011 की भाषाई जनगणना के अनुसार, हिंदी सबसे व्यापक रूप से बोली जाने वाली मातृभाषा है. जनसंख्या के लिहाज से भारत में 52.8 करोड़ लोग हिंदी बोलते है जो भारत की कुल आबादी का 43.6 प्रतिशत है. इसके बाद बंगाली भाषा भारत में सबसे अधिक बोली जाती है. जो भारत की जनसंख्या का 8 प्रतिशत हिस्सा है.

मातृभाषा का महत्व:

किसी भी व्यक्ति या समुदाय के विकास में उसकी मातृभाषा का महत्व बहुत अधिक होता है.शिक्षा से लेकर रहन-सहन और व्यवहार में इसके प्रभाव की देखा जा सकता है. अतः मातृभाषा का महत्व अधिक बढ़ जाता है और इसके संरक्षण का भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए.

शिक्षा में मातृभाषा का महत्व:

शिक्षा के आधारभूत या शुरूआती चरणों में मातृभाषा का महत्व कहीं अधिक होता है. नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) में भी इस बात की सिफारिश की गयी है कि आठ साल तक के बच्चों के लिए स्कूलों में मातृभाषा शिक्षा का प्राथमिक माध्यम होना चाहिए.

नए NCF के अनुसार, शिक्षा के प्राथमिक माध्यम के रूप में मातृभाषा के गुणों पर जोर दिया जाना चाहिए जो प्री-स्कूल और कक्षा I-II से संबंधित है. इससे बच्चों में मातृभाषा का विकास एक अच्छे लेवल तक हो जायेगा जो उन्हें आगे की शिक्षा में मदद करेगा. सिखाने की क्षमता का विकास बच्चों में उनकी मातृभाषा में आसानी से होती है.

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