Jagran Josh Logo

जैवविविधता के लाभ

22-DEC-2015 12:48

    कृषि, वानिकी, मत्स्यिकी, स्थायी प्राकृतिक जलक्रम, उपजाऊ मृदा, संतुलित जलवायु तथा अनेक अन्य वृहद पारिस्थितिक तंत्र जैव विविधता के संरक्षण पर निर्भर करते हैं। खाद्य पदार्थों का उत्पादन जैव विविधता के लिए विभिन्न प्रकार के खाद्य पौधों, परागण की प्रक्रिया, कीट नाशक, पौषक तत्वों तथा बीमारियों से सुरक्षा एवं बचाव पर निर्भर करता है। औषधीय पौधे तथा उत्पादित औषधियाँ दोनों ही जैव-विविधता पर निर्भर करती हैं। जैव विविधता में कमी के कारण मनुष्य में बीमारियों के संक्रमण की अधिकता तथा स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च में वृद्धि देखी गई हैं।

    जैवविविधता के लाभ

    1. उपभोगिक प्रयोग मान: लकड़ी का सीधा प्रयोग, भोजन, ईंधन की लकड़ी, समुदायों द्वारा चारे का प्रयोग।

    2. उत्पादित प्रयोग मान: जैव प्रौद्योगिकी वैज्ञानिक जैविक क्षेत्रों में पौधों तथा जीवों में ऐसी आनुवांशिक विशेषताओं को खोजते हैं जिन्हें बेहतर किस्म की फसलें जो कृषि तथा पौधों के कार्यक्रमों या बेहतर पशुधन प्राप्त करने में सहायता करती हैं। उद्योगपतियों के लिए, जैव विविधता नए उत्पाद बनाने का भण्डार गृह है। भेषज वैज्ञानिकों के लिए जैव विविधता एक कच्चा पदार्थ है जिससे पौधों या जीवों से उत्पन्न होने वाली नई दवाईयाँ प्राप्त की जा सकती हैं। कृषि वैज्ञानिकों के लिए जैव विविधता फसलों को बेहतर किस्मों को उत्पन्न करने में सहायता करती है।

    3.

    औषधि

    स्रोत

    प्रयोग

    एट्रोपीन

    बैलाडोना

    एन्टीकोलीनर्जिक, डायरिया में आंतों के दर्द को कम करना।

    बोमलेन

    अन्नानास

    तन्तुओं में दर्द से हुई सूजन को कम करना।

    कैफीन

    चाय, कॉफी

    केन्द्रीय कोशिका तंत्र को जगाना।

    कपूर

    कपूर का पेड़

    एक जगह पर रक्त का प्रसार बढ़ाना रेबीफेशीएन्ट

    कोकेन

    कोकोआ

    एनलजैसिक तथा लोकल एनैस्थैटिक, दर्द को कम करना विशेषता शल्य चिकित्सा में।

    कोडीन

    अफीम, पॉपी

    एनलजैसिक, दर्द निवारक

    मोर्फीन

    अफीम, पॉपी

    एनलजैसिक, दर्द निवारक

    कोल्चीसोन

    ऑट्मन क्रोकस

    एन्टी कैन्सर

    डिजीटोक्सिन

    कौमान फाक्सग्लोव

    हृदय रोगों में लाभकर

    डाओस्जेनिन

    वाइल्ड यैम्स

    महिला गर्भरोधन तथा गर्भाधारण रोकने में सहायक

    एल-डोपा

    वेल्वेट बीन्स

    पार्किन्सन रोग के ईलाज में सहायक

    एरगोटामीन

    राई-स्मट या एरगोट

    माइग्रेन, सिरदर्द तथा हीमोरेज के ईलाज में सहायक

    ग्लैजीओवाइन

    ओकोटिआ ग्लैजिओवी

    एन्टी डिपैसेन्ट

    गौसीपोल

    कौटन

    मेल कान्ड्रासैप्टिव

    एन्डीसिन एन-आक्साइड

    हैलीओट्रोपियम इन्डीकम

    एन्टी कैन्सर एजेन्ट

    मैन्थाल

    पुदीना

    रूबीफेशीन्ट, रक्त के प्रवाह को बढ़ाना

    मोनोक्रोटालिन

    कोटोलारिया सैसिलिफ्लोरा

    एन्टी कैन्सर एजेन्ट

    पैपेन

    पपीता

    अधिकाधिक प्रोटीन तथा म्यूकस को द्रवित करना पाचन क्रिया में

    पैनीसिलिन

    पैनीसिलीयम फन्गस

    एन्टीबायोटिक बैक्टीरिया समाप्त करना, संक्रमण रोकना

    क्यूनीन

    पीला सिन्कोना

    मलेरिया में लाभदायक

    रिसर्पाइन

    भारतीय स्नेकरूट

    उच्च रक्त चाप में सहायक

    स्कोपोलामीन

    थोर्न एप्पल

    सेडेटिव

    टैक्सोल

    पैसिफिक यू

    एन्टी कैन्सर

    विन्बलास्टीन

    रोसी पेरीविंकल

    एन्टी कैन्सर

    कई प्रकार के उद्योग मुख्यत: फार्मास्यूटिकल्स अधिक आर्थिक मूल्य वाले यौगिकों को पहचानने पर निर्भर करती है जिन्हें अनेक जंगली प्रजातियों तथा प्राकृतिक वनों में पाये जाने वाले पौधों में ढूँढा जाता है। इसे जैविक पूर्वेक्षण (Biological Prospecting) कहते हैं।

    4. सामाजिक मूल्य – जैव-विविधता के उपभागक तथा उत्पादित मान निकटतम रूप से पारंपरिक समुदायों के सामाजिक चिंतन से संबंधित हैं। पारिस्थितिक तंत्र के लोग जैव विविधता को अपने जीवन का एक भाग समझकर तथा अपने सांस्कृतिक तथा धार्मिक विचारों के द्वारा मूल्य देते हैं। अनेक प्रकार की फसलों को पारंपरिक कृषि तंत्रों में उगाया जाता है तथा इससे अनेक प्रकार के उत्पादों को प्रत्येक वर्ष उगाने तथा बिक्री करने की आज्ञा मिली है। पिछले कुछ वर्षों में किसानों को नकदी फसलें भारतीय तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजारों के लिए उगाने के लिए आर्थिक लाभांश मिलने लगे हैं। इस कारण आम बाजारों में खाद्य पदार्थों की कमी, बेरोजगारी (क्योंकि नकदी फसलों मुख्यत: मशीनों उगाई जाती हैं) भूमिहीनता तथा भुखमरी तथा बाढ़ के प्रकोप की संभावना ने जन्म लिया है।

    5. नैतिक मूल्य – जैव-विविधता के संरक्षण से संबंधित नैतिक मूल्य मुख्यत: सभी प्रकार के जीवनों को संरक्षित करने पर निर्भर हैं। सभी प्रकार के जीवनों को पृथ्वी पर पनपने का अधिकार है। मनुष्य केवल पृथ्वी की विस्तृत जातियों के परिवारों का मात्र छोटा अंश है। परम्पराओं के द्वारा, भारतीय सभ्यता ने प्रकृति को कई पीढ़ियों तक सुरक्षित रखा है। यह कई संस्कृतियों की प्राचीन दर्शन का मुख्य भाग है। हमारे देश में हमारे पास कई प्रथाएं हैं जिन्हें कई राज्यों में आदिवासी जनजातियों ने संरक्षित किया है। यह पवित्र स्थान जो कि पवित्र मंदिरों के समीप स्थित है यह, जीन बैंक (पौधों के लिए) का काम करते हैं।

    6. सौंदर्य मूल्य – ज्ञान तथा जैवविविधता की उपस्थिति की प्रशंसा भी जैवविविधता को संरक्षित करने का एक मुख्य कारण है। जीव जंतुओं को भोजन के लिए मारने के अलावा जैवविविधता एक पर्यटकों के लिए एक मुख्य आकर्षण है।

    7. विकल्प मूल्य: भविष्य की संभावनाओं को खुला रखना ताकि उनका उपयोग हो सके, विकल्प मूल्य कहलाता है। हालांकि यह पता लगाना कि कौन से पशु या पौधों की प्रजातियां भविष्य में अधिकाधिक उपयोग में आएंगी लगभग असंभव प्रतीत होता है।

    Latest Videos

    Register to get FREE updates

      All Fields Mandatory
    • (Ex:9123456789)
    • Please Select Your Interest
    • Please specify

    • ajax-loader
    • A verifcation code has been sent to
      your mobile number

      Please enter the verification code below

    Newsletter Signup
    Follow us on
    This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK