भारत में संसदीय व्यवस्था पर आधारित 13 विस्तृत प्रश्न

भारत का संविधान, केंद्र और राज्य दोनों में सरकार के संसदीय स्वरुप की व्यवस्था करता है l अनुच्छेद 74 और 75 में केंद्र में संसदीय व्यवस्था और अनुच्छेद 163 और 164 राज्यों में संसदीय व्यवस्था की बात करता हैl सरकार की संसदीय व्यवस्था वह व्यवस्था है,जिसमें कार्यपालिका अपनी नीतियों एवं कार्यों के लिए विधायिका के प्रति उत्तरदायी होती है l
May 11, 2017 17:14 IST

    भारत का संविधान, केंद्र और राज्य दोनों में सरकार के संसदीय स्वरुप की व्यवस्था करता है l अनुच्छेद 74 और 75 में केंद्र में संसदीय व्यवस्था और अनुच्छेद 163 और 164 राज्यों में संसदीय व्यवस्था की बात करता हैl सरकार की संसदीय व्यवस्था वह व्यवस्था है,जिसमें कार्यपालिका अपनी नीतियों एवं कार्यों के लिए विधायिका के प्रति उत्तरदायी होती है l इस सेट में हमने विस्तृत प्रश्न इसलिए दिए हैं ताकि IAS,PCS जैसी परीक्षाओं में मैन्स एग्जाम देने वाले प्रतियोगी इस बात को समझ सकें कि विस्तृत प्रश्नों का उत्तर किस प्रकार देना है l

    प्रश्न 1. संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता कौन करता है?

    उत्तर. अनुच्छेद 118(4) के अनुसार संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता हैl

    प्रश्न 2. क्या लोकसभा अध्यक्ष को मतदान करने का अधिकार है?

    उत्तर.  लोकसभा अध्यक्ष पहली बार मत नहीं देता है, लेकिन मत बराबर होने की स्थिति में उसका मत निर्णायक होता हैl अतः पीठासीन अधिकारी को अपने मत का प्रयोग निष्पक्ष होकर करना चाहिएl

    प्रश्न 3.  एक वर्ष में लोकसभा के कितने सत्र आयोजित किए जाते हैं?

    उत्तर. आमतौर पर  एक वर्ष में लोकसभा के तीन सत्र आयोजित किए जाते हैं:

    1. बजट सत्र  ------------------फरवरी-मई (नोट: 2017 में इसका आयोजन जनवरी-अप्रैल के बीच किया गया थाl)

    2. शरद या मानसून सत्र ---  जुलाई-अगस्त 

    3. शीतकालीन सत्र ----- ----- नवम्बर-दिसम्बर

    प्रश्न 4.  क्या लोकसभा और राज्य सभा के दोनों सदनों के बीच कोई गतिरोध संभव है?

    उत्तर. हाँ।, धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयकों के अलावा अन्य बिलों के मामले में, दोनों सदनों के बीच उस समय असहमति उत्पन्न हो सकती है, जब एक सदन से पारित बिल को दूसरे सदन द्वारा खारिज कर दिया जाता है या कोई सदन बिल में किए गए संशोधनों से असहमत होता हैं या दूसरे सदन द्वारा विधेयक प्राप्ति की तारीख से छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उसे पारित नहीं किया जाता हैl

    प्रश्न 5.  दोनों सदनों के बीच इस तरह की गतिरोध को हल करने का तरीका क्या है?

    उत्तर. उपरोक्त वर्णित गतिरोध को दूर करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 108 के तहत दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाई जाती हैl

    प्रश्न 6. किसी विधेयक को पारित करने के लिए अब तक कितनी बार संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठकें बुलाई गई हैं?

    उत्तर. किसी विधेयक को पारित करने के लिए अब तक तीन बार संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठकें बुलाई गई हैंl दहेज निषेध अधिनियम, 1959 में कुछ संशोधनों पर दोनों सदनों के बीच असहमति के बाद पहली बार 6 मई 1961 को दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाई गई थी। इसके बाद 9 मई, 1961 को एक और बैठक हुई, जिसमें अधिनियम में संशोधन किया गया और अंततः उसे पारित किया गया था। बैंकिंग सेवा आयोग (निरसन) विधेयक, 1977 को राज्यसभा द्वारा अस्वीकार किए जाने के बाद, 16 मई 1978 को दूसरी बार दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाई गई थी और विधेयक को पारित कर दिया गया थाl 26 मार्च 2002 को तीसरी बार दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का आयोजन उस समय किया गया था, जब लोकसभा द्वारा आतंकवाद निरोधी अध्यादेश (POTO) की जगह लेने के लिए पारित किए गए आतंकवाद निरोधी विधेयक, 2002 को राज्यसभा ने अस्वीकार कर दिया थाl इस बैठक का आयोजन आतंकवाद निरोधी विधेयक, 2002 पर विचार-विमर्श और मतदान करने के उद्देश्य से किया गया था और अंततः इस विधेयक को पारित कर दिया गया थाl

    प्रश्न 7. लोकसभा के स्थगन, सत्रावसान और विघटन का क्या अर्थ है?

    उत्तर. “स्थगन” का अर्थ है कुछ अत्यावश्यक और विशेष कारणों से लोकसभा की बैठक को रद्द करनाl यह स्थगन कुछ घंटे, दिन या सप्ताह की अवधि के लिए होता हैl आवश्यकता पड़ने पर सदन को बैठक के बीच में ही स्थगित किया जा सकता हैl इसके अलावा किसी मृत व्यक्ति के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए, गणपूर्ति (कोरम) न होने पर, सदन के भीतर कार्य-संचालन में अव्यवस्था आदि के कारण लोकसभा को स्थगित किया जा सकता हैl लोकसभा को अनिश्चित काल के लिए भी स्थगित किया जा सकता है, जिसका अर्थ यह है कि सदन की अगली तिथि का निर्धारण किए बिना ही सदन की बैठक को समाप्त करनाl

    “सत्रावसान” का अर्थ है संविधान के अनुच्छेद 85 (2) (ए) के तहत राष्ट्रपति के आदेश द्वारा सदन के एक सत्र की समाप्तिl सदन का सत्रावसान किसी भी समय हो सकता है, भले ही सदन की बैठक ही क्यों ना चल रही होl लेकिन आमतौर पर, सत्रावसान की अधिसूचना सदन की बैठक को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने के बाद ही जारी किया जाता हैl

    “विघटन” का अर्थ है संविधान के अनुच्छेद 85 (2) (बी) के तहत राष्ट्रपति के आदेश द्वारा या लोकसभा के गठन के बाद आयोजित पहली बैठक के बाद से पांच वर्ष की समाप्ति के कारण लोकसभा की समाप्तिl सत्रावसान के विपरीत विघटन होने पर लोकसभा का कार्यकाल समाप्त हो जाता है और इसका पुनर्गठन नए चुनाव के बाद ही होता हैl

    लोकसभा के स्थगन या उसके अनिश्चितकालीन स्थगन के बाद सभी लंबित कार्य समाप्त नहीं होते हैंl दोनों सदन या प्रवर / संयुक्त समिति के पास लंबित विधेयक, प्रस्ताव, संकल्प और संशोधन या संसदीय समिति के समक्ष लंबित कार्य सत्रावसान के बाद समाप्त नहीं होते हैं, लेकिन लोकसभा का विघटन होने पर सभी लंबित कार्य समाप्त हो जाते हैंl सत्रावसान के द्वारा लोकसभा के एक सत्र का समापन होता है और यह लोकसभा के कार्यकाल में कोई रूकावट नहीं डालता है, जबकि लोकसभा के कार्यकाल की समाप्ति विघटन के द्वारा होती हैl   

    प्रश्न 8.  प्रश्नकाल(zero hour) का क्या अर्थ है?

    उत्तर. लोकसभा की कार्यप्रणाली और कामकाज से संबंधित नियम 32 के तहत सदन की बैठकों का पहला घंटा प्रश्न पूछने और उसका उत्तर देने के लिए निर्धारित किया गया है, लेकिन अध्यक्ष के निर्देश पर इसमें बदलाव भी किया जा सकता हैl अतः सदन की प्रत्येक बैठक में सुबह 11 बजे से लेकर 12 बजे तक का समय प्रश्नकाल के लिए निर्धारित किया गया हैl आम तौर पर, नए लोकसभा के पहले सत्र के दौरान या जिस दिन राष्ट्रपति द्वारा दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित किया जाता है या लोकसभा में आम बजट पेश किया जाता है या सत्र की विस्तारित अवधि के दौरान बैठक का आयोजन किया जाता है, उस दिन प्रश्नकाल का आयोजन नहीं होता हैl इसके अलावा शनिवार/रविवार और छुट्टियों वाले दिन प्रश्नकाल का आयोजन नहीं होता हैl

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    प्रश्न 9.  संसदीय प्रश्न (parliamentary questions) क्या है?

    उत्तर. “संसदीय प्रश्न” लोकसभा की कार्यप्रणाली और कामकाज से संबंधित नियम और अध्यक्ष द्वारा दिए गए निर्देशों के तहत सदस्यों को तत्काल सार्वजनिक महत्व से जुड़े विषय के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए उपलब्ध महत्वपूर्ण संसदीय उपकरणों में से एक हैl कोई भी सदस्य, उस मंत्री के विशेष संज्ञान के तहत सार्वजनिक महत्व के विषय पर जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से प्रश्न पूछ सकता है, जिसके मंत्रालय से वह प्रश्न संबंधित हैl

    प्रश्न 10.  लोकसभा में कितने तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं? 

    उत्तर. लोकसभा में मुख्यतः चार प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं:-

    तारांकित प्रश्न (Starred Question): जिन प्रश्नों का उत्तर सदस्य तुरन्त सदन में चाहता है, उसे तारांकित प्रश्न कहा जाता हैl तारांकित प्रश्नों का उत्तर मौखिक रूप से दिया जाता हैl तारांकित प्रश्नों के साथ-साथ अनुपूरक प्रश्न भी पूछे जा सकते हैंl एक निश्चित दिन में पूछे जाने वाले प्रश्नों की सूची में अधिकतम 20 तारांकित प्रश्नों को शामिल किया जाता हैl तारांकित प्रश्नों की छपाई हरे रंग के कागज पर किया जाता हैl सदन में तारांकित प्रश्न पूछने के लिए कम-से-कम 15 दिन पहले नोटिस देना आवश्यक हैl

    अतारांकित प्रश्न (Unstarred Question): जिन प्रश्नों का उत्तर सदस्य लिखित में चाहता है, उन्हें अतारांकित प्रश्न कहा जाता हैl अतारांकित प्रश्नों का उत्तर संबंधित मंत्री प्रश्नकाल की समाप्ति के बाद सदन के पटल पर रखता हैl एक निश्चित बैठक में पूछे जाने वाले प्रश्नों की सूची में अधिकतम 230 अतारांकित प्रश्नों को शामिल किया जाता हैl अतारांकित प्रश्नों की छपाई सफेद रंग के कागज पर किया जाता हैl सदन में अतारांकित प्रश्न पूछने के लिए कम-से-कम 15 दिन पहले नोटिस देना आवश्यक हैl

    अल्प सूचना प्रश्न: जो प्रश्न अविलम्बनीय लोक महत्व का हो तथा जिन्हें साधारण प्रश्न के लिए निर्धारित 10 दिन की अवधि से कम समय में सूचना देकर पूछा जा सकता है, उन्हें अल्प सूचना प्रश्न कहा जाता हैl अल्प सूचना प्रश्न की छपाई गुलाबी रंग के कागज पर किया जाता हैl इसे नियम 54 के तहत विनियमित किया जाता हैl

    गैर सरकारी सदस्यों द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्न: लोकसभा की कार्यप्रणाली और कामकाज से संबंधित नियम 40 के तहत लोकसभा में मंत्रिपरिषद के सदस्यों के अतिरिक्त अन्य सदस्यों, जिन्हें गैर सरकारी सदस्य कहा जाता है, से भी प्रश्न पूछे जा सकते हैं, लेकिन इन प्रश्नों का विषय किसी ऐसे विधेयक या संकल्प अथवा सदन के कार्य के किसी ऐसे विषय से संबंधित हो, जिसके लिए वह सदस्य उत्तरदायी रहा होl उदाहरण के लिए, संसदीय समितियों के दायरे में आने वाले मामलों से संबंधित प्रश्नों को उस समिति के अध्यक्ष से पूछा जाता हैl इसी प्रकार, सदस्यों द्वारा निजी सदस्यों द्वारा प्रस्तुत विधेयकों और संकल्पों से संबंधित प्रश्नों को पूछा जा सकता है, जो इन प्रावधानों के तहत उनके संज्ञान में होता हैl ऐसे प्रश्नों को पूछने की प्रक्रिया उसी तरह होती है, जैसे कि किसी मंत्री से प्रश्न पूछे जाते हैं और इनमें अध्यक्ष के निर्देश पर बदलाव किए जा सकते हैंl

    प्रश्न 11. किसी विशेष दिन लोकसभा में पूछे जाने वाले प्रश्नों की अधिकतम संख्या कितनी है?

    उत्तर. किसी विशेष दिन लोकसभा में पूछे जाने वाले प्रश्नों की सूची में तारांकित प्रश्नों अधिकतम संख्या 20 और  अतारांकित प्रश्नों की अधिकतम संख्या 230 होती हैl हालांकि, अतारांकित प्रश्नों की सूची में राष्ट्रपति शासन के तहत आने वाले राज्य / राज्य से संबंधित अतिरिक्त 25 प्रश्नों को शामिल किया जा सकता है।

    प्रश्न 12.  क्या प्रत्येक सदस्य द्वारा प्रश्न पूछे जाने के संबंध में दिए जाने वाले नोटिस की संख्या के बारे में कोई प्रतिबंध है?

    उत्तर. किसी सदस्य को किसी भी दिन के लिए तारांकित और अतारांकित दोनों तरह के प्रश्नों के लिए 10 से अधिक नोटिस देने की अनुमति नहीं हैl लेकिन किसी एक दिन की बैठक में पूछे जाने वाले प्रश्नों की सूची में एक सदस्य के तारांकित और अतारांकित दोनों तरह के प्रश्नों को मिलाकर पांच से अधिक प्रश्न शामिल नहीं किए जा सकते हैl लेकिन इन पांच प्रश्नों में एक से अधिक तारांकित प्रश्न को प्रश्नों की सूची में शामिल नहीं किया जा सकता है, जिनका उत्तर मौखिक रूप से दिया जाता हैl मौखिक उत्तर के लिए एक प्रश्न की यह सीमा उस सदस्य के किसी भी अल्प कालिक नोटिस वाले प्रश्न पर लागू नहीं होता है, जिसे उस दिन उत्तर के लिए प्रश्नों की सूची में शामिल किया जा चुका हैl हालांकि, यदि किसी सदस्य के तारांकित प्रश्न को अगले दिन पूछे जाने वाले प्रश्नों की सूची में हस्तांतरित किया जाता है तो उस दिन पूछे जाने वाले प्रश्नों की सूची में एक से अधिक तारांकित प्रश्न हो सकते हैंl

    प्रश्न 13. प्रश्नों की स्वीकार्यता का फैसला कौन करता है?

    उत्तर. लोकसभा में प्रश्नों की स्वीकार्यता लोकसभा अध्यक्ष और उसके पूर्ववर्तियों द्वारा दिए गए निर्देश एवं लोकसभा की कार्यप्रणाली और कामकाज से संबंधित नियम के तहत संचालित की जाती हैl लोकसभा अध्यक्ष यह निर्णय लेता हैं कि क्या किसी प्रश्न या उसका कोई भाग नियमों के तहत स्वीकार्य नहीं है और इस आधार वह किसी भी प्रश्न या उसके किसी भाग को अस्वीकार कर सकता है। इसके अलावा यदि लोकसभा अध्यक्ष को लगता है कि सदस्य द्वारा पूछा गया प्रश्न पूछताछ के अधिकार का दुरूपयोग है या वह सदन की प्रक्रिया को प्रभावित करता है या सदन के नियमों के विरूद्ध है, तो वह ऐसे प्रश्नों को अस्वीकार कर सकता हैl किसी प्रश्न को पूछने का अधिकार कुछ शर्तों द्वारा नियंत्रित होता है, जैसे कि यह केवल एक विशेष मुद्दे को इंगित करे या उस मुद्दे तक ही सीमित होl इसमें तर्क, निष्कर्ष, व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति, आरोपण, उपधारा या मानहानिकारक वक्तव्य नहीं होना चाहिएl

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