भारत का पहला 3D शहर, जहां जमीन के नीचे टनल और ऊपर गगनचुंबी इमारतें!

Last Updated: Oct 5, 2026, 10:55 IST

भारत में आपने अलग-अलग शहरों के बारे में पढ़ा और सुना ही होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में एक शहर ऐसा भी है, जिसे 3डी शहर भी कहा जाता है। कौन-सा है यह शहर, जानने के लिए यह पूरा लेख पढ़ें। 

3डी सिटी
3डी सिटी

भारत को विविधताओं का देश कहा जाता है। यहां हमें अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग शहर देखने को मिलते हैं। इन सभी शहरों की अपनी विशेषता है, जिस वजह से इन शहरों को इनके मूल नाम के अलावा उपनाम से भी जाना जाता है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि इनमें एक शहर ऐसा भी है, जिसे 3डी शहर भी कहा जाता है? कौन-सा है यह शहर और क्या है इसके पीछे का कारण, जानने के लिए यह पूरा लेख पढ़ें। 

क्या होता है 3डी शहर 

भारत में 3D City का विचार अर्बन प्लानिंग, आर्किटेक्चर और डिजिटल मैपिंग तकनीक के मिश्रण से जुड़ा हुआ है। जब किसी शहर को '3डी सिटी' कहा जाता है, तो इसका मतलब दो मुख्य पहलुओं में निकाला जाता है। पहला, उसकी अनूठी भौतिक वास्तुकला यानि Physical Infrastructure और दूसरा, उसकी डिजिटल 3D मैपिंग यानि Digital Twin Technology।

वास्तुकला और डिजाइन के आधार पर GIFT City

गुजरात में गांधीनगर और अहमदाबाद के बीच बसा जीआईएफटी सिटी (Gujarat International Finance Tec-City) भारत का पहला और सबसे प्रमुख स्मार्ट एवं 3डी-नियोजित शहर माना जाता है।

शहर की वर्टिकल ग्रोथ

GIFT सिटी को '3D अर्बन प्लानिंग' के तहत डिजाइन किया गया है। इसमें जमीन की बचत करने के लिए गगनचुंबी इमारतों का ऐसा नेटवर्क बनाया गया है, जो जमीन के ऊपर और नीचे 3-Dimensional फैला है।

अंडरग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर 

इस शहर की सबसे बड़ी खासियत इसकी जमीन के नीचे बनी बड़ी टनल है। शहर के सभी बिजली के तार, पानी की पाइपलाइन, सीवेज और ऑप्टिकल फाइबर इसी टनल के अंदर 3D लेआउट के तहत हैं। इस वजह से शहर में मरम्मत के लिए कभी सड़कों को खोदना नहीं पड़ता।

ऑटोमेटेड गारबेज सिस्टम 

यहां कचरे के निस्तारण के लिए जमीन के नीचे वैक्यूम पाइपलाइन बिछाई गई है, जिससे कचरा अपने आप प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंच जाता है।

डिजिटल ट्विन और 3D मैपिंग 

भारत सरकार के 'डिजिटल इंडिया' और 'स्मार्ट सिटीज मिशन' के तहत देश के प्रमुख शहरों को डिजिटल दुनिया में '3D सिटी' के रूप में ढाला जा रहा है। इसमें किसी पूरे शहर का एक वर्चुअल 3D मॉडल बनाया जाता है। वाराणसी, जयपुर, बंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में ड्रोन सर्वेक्षण और LiDAR (लाइट डिटेक्टिंग एंड रेंजिंग) तकनीक के जरिए 3D मैपिंग की गई है।

क्या हैं 3D मैपिंग के फायदे

3D मॉडल से यह आसानी से आंका जा सकता है कि भारी बारिश या बाढ़ आने पर पानी किस इमारत या गली में किस स्तर तक भरेगा।

-जमीन के ऊपर बनने वाले ओवरब्रिज, मेट्रो रूट और फ्लाईओवरों का 3D सिमुलेशन करके सबसे बेहतर रूट तय किया जाता है।

-3D मैपिंग की मदद से सैटेलाइट और ड्रोन इमेज के जरिए यह तुरंत पता चल जाता है कि किस इमारत में अनुमति से अधिक मंजिलें बनाई गई हैं।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Oct 5, 2026, 10:55 IST

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