भारत में नागरिकता कैसे छीनी और प्राप्त की जा सकती है?

Mar 20, 2020, 10:12 IST

भारतीय संविधान के भाग 2 में आर्टिकल 5 से 11 तक भारतीय नागरिकता (Indina Citizenship) के बारे में प्रावधान किये गये हैं. इस लेख में हमने समझाया है कि कैसे एक व्यक्ति को भारतीय नागरिकता मिल सकती है और कैसे एक भारतीय की नागरिकता सरकार द्वारा छीनी जा सकती है?

Indian Passport and National Flag
Indian Passport and National Flag

विश्व के अन्य देशों की तरह ही भारत में भी 2 तरह के लोग रहते हैं. एक हैं भारतीय और दूसरे विदेशी. भारतीय नागरिकों को कुछ विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं जो कि विदेशियों को प्राप्त नहीं होते हैं.

देश में नागरिकता (संशोधन) कानून,2019 के पास होने के बाद बहुत से लोगों को इस बात का डर हो गया है कि उनकी नागरिकता खतरे में हैं. इसी भ्रान्ति को दूर करने के लिए इस लेख में हमने बताया है कि कैसे किसी व्यक्ति को भारत की नागरिकता मिलती है और कैसे किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता छीनीं जा सकती है?

भारतीय संविधान, भारतीय नागरिकों को निम्न अधिकार प्रदान करता है जो कि विदेशियों को नहीं मिलते हैं;

1.धर्म जाति, लिंग, मूल, क्षेत्र,वंश के आधार पर समानता (आर्टिकल 15)

2. नौकरियों में समानता का अधिकार (आर्टिकल 16)

3. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, निवास स्थान की स्वतंत्रता (आर्टिकल 19)

4. लोकसभा और विधान सभा में मतदान का करने का अधिकार होता है.

5. सार्वजानिक पदों (राष्ट्रपति,उपराष्ट्रपति,न्यायधीश इत्यादि)पर नियुक्त होने का अधिकार 

नागरिकता अधिनियम, 1955 क्या है? (What is Indian Citizenship Act,1955)

किसी को भारतीय नागरिकता देने और छीनने का फैसला नागरिकता अधिनियम, 1955 के आधार पर किया जाता है. आइये अब जानते हैं इसमें क्या क्या प्रावधान हैं?

भारत की नागरिकता किस प्रकार प्राप्त की जा सकती है? (How to get Indian Citizenship)

1. जन्म से: यदि कोई व्यक्ति भारत में 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद जन्मा है.लेकिन 1 जुलाई 1987 से पूर्व जन्मा व्यक्ति अपने माता पिता के जन्म की राष्ट्रीयता के बावजूद ही भारत का नागरिक माना जायेगा.

यदि किसी का जन्म 3 दिसम्बर 2004 के बाद हुआ हो तो वह भारत का निवासी तभी माना जायेगा जबकि उसके माता पिता दोनों भारत के नागरिक हों.

2. वंश के आधार पर नागरिकता: कोई व्यक्ति जिसका जन्म 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद परन्तु 10 दिसम्बर 1992 से पूर्व भारत के बाहर हुआ हो और उसके जन्म के समय उसका पिता भारत का नागरिक हो तो वह भारत का नागरिक बन सकता है.

3 दिसम्बर 2004 के बाद भारत से बाहर जन्मा कोई व्यक्ति वंश के आधार पर भारत का नागरिक नहीं हो सकता है यदि उसके जन्म के एक वर्ष के भीतर भारतीय कांसुलेट में उसका रजिस्ट्रेशन ना कराया गया हो.

3.पंजीकरण द्वारा:यदि कोई व्यक्ति भारत सरकार के पास रजिस्ट्रेशन करता है तो वह भारत का नागरिक तभी बन सकता है जब;

A. व्यक्ति, आवेदन करने से 7 वर्ष पूर्व भारत में रह चुका हो.

B. वह व्यक्ति जिसने किसी  भारतीय नागरिक से विवाह किया हो और आवेदन से पूर्व भारत में 7 वर्ष रह रहा हो.

C. कोई व्यक्ति जो पूरी आयु तथा क्षमता का हो तथा उसके माता पिता भारत के नागरिक के रूप में पंजीकृत हों.

D. भारत के नागरिक के नाबालिक बच्चे.

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(अदनान सामी को कई वर्ष भारत में रहने के कारण, भारत की नागरिकता मिली है )

4. प्राकृतिक रूप से नागरिकता: केंद्र सरकार आवेदन प्राप्त होने पर किसी व्यक्ति (अवैध प्रवासी नहीं) को नागरिकता दे सकती है यदि वह निम्न योग्यताएं रखता हो;

A. यदि वह भारत में रह रहा हो या भारत सरकार की सेवा में हो या नागरिकता आवेदन करने से पहले कम से कम 12 माह पूर्व से भारत में रह रहा हो.

B.वह किसी ऐसे देश से हो जहाँ के नागरिक प्राकृतिक रूप से भारत के नागरिक नहीं बन सकते हैं.

C. उसका चरित्र अच्छा होना चाहिए 

D. संविधान की 8वीं अनुसूची में उल्लिखित भाषाओँ का अच्छा ज्ञाता हो.

5.किसी भूभाग को भारत में मिलाने के द्वारा:किसी क्षेत्र के अपने देश में समावेश द्वारा भी नागरिकता प्राप्त की जा सकती है. यदि कोई विदेशी क्षेत्र भारत का हिस्सा बन जाता है तो सम्बंधित क्षेत्र के व्यक्तियों को भारत की नागरिकता मिल जाती है. 

नागरिकता की समाप्ति (Abolition of Indian Citizenship):

नागरिकता अधिनियम, 1955 में नागरिकता ख़त्म होने के तीन कारण बताये गये हैं;

1.स्वैच्छिक त्यागना  

2.बर्खास्तगी 

3.वंचित करना 

1.स्वैच्छिक त्यागना: यदि कोई भारतीय नागरिक जो कि पूर्ण आयु और क्षमता का हो, वह अपनी इच्छा से भारत की नागरिकता छोड़ सकता है. जब कोई व्यक्ति अपनी नागरिकता को छोड़ता है तो उस व्यक्ति का प्रत्येक नाबालिक बच्चा भारतीय नागरिक नहीं रहता है. लेकिन यदि उस बच्चे की उम्र 18 वर्ष हो जाती है तो वह भारतीय नागरिक बन सकता है.

2.बर्खास्तगी: भारत के संविधान में एकल नागरिकता का प्रावधान है. अर्थात एक भारतीय व्यक्ति, एक समय में केवल एक देश का नागरिक रह सकता है. यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण कर लेता है तो उसकी भारतीय नागरिकता खत्म हो जाती है. हालाँकि यह व्यवस्था तब लागू नहीं होती है जब भारत युद्ध में व्यस्त हो.

3. सरकार द्वारा वंचित करना: भारत सरकार किसी भारतीय नागरिक की नागरिकता ख़त्म कर सकती है यदि;

(i). नागरिक ने संविधान के प्रति अनादर जताया हो 

(ii). उसने फर्जी तरीके से नागरिकता प्राप्त की हो

(iii). युद्ध के समय शत्रु देश के साथ गैर-कानूनी रूप से सम्बन्ध स्थापित किये हों और शत्रु के साथ कोई राष्ट्र विरोधी सूचना साझा की हो.

(iv). पंजीकरण या प्राकृतिक नागरिकता के 5 वर्ष के दौरान नागरिक को किसी देश में 2 वर्ष की कैद की सजा हुई हो.

(v). नागरिक, भारत से बाहर 7 वर्षों से रह रहा हो.

उम्मीद है कि इस लेख में पढने के बाद आप समझ गये होंगे कि किसी नागरिक की नागरिकता किस प्रकार ख़त्म की जा सकती है या फिर किसी को भारतीय नागरिकता कैसे मिलती है.

Hemant Singh is an academic writer with 7+ years of experience in research, teaching and content creation for competitive exams. He is a postgraduate in International
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