जानें नासा ने मंगल ग्रह पर सांस लेने योग्य ऑक्सीजन कैसे बनाई?

नासा के पर्सिवरेंस रोवर (Perseverance Rover) ने मंगल ग्रह पर वायुमंडल से कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2) को शुद्ध करके सांस लेने योग्य ऑक्सीजन बनाई. इस प्रकार की यह पहली सफलता है. आइये इसके बारे में विस्तार से अध्ययन करते हैं.
Created On: Apr 27, 2021 16:30 IST
Modified On: Apr 27, 2021 16:35 IST
NASA’s Perseverance Rover Extracts First Oxygen from Mars Planet
NASA’s Perseverance Rover Extracts First Oxygen from Mars Planet

नासा के पर्सिवरेंस रोवर (Perseverance Rover) ने मंगल ग्रह पर सांस लेने योग्य ऑक्सीजन का निर्माण किया. रोवर पर एक प्रायोगिक उपकरण कार्बन डाइऑक्साइड अणुओं को उनके घटक भागों में विभाजित करता है, जिससे लगभग 10 मिनट की सांस लेने योग्य ऑक्सीजन बनती है. रॉकेट ईंधन की एक छोटी मात्रा बनाने के लिए यह पर्याप्त ऑक्सीजन भी थी.

इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस प्रकार की सफलता पहली बार मिली है, हालांकि यह ऑक्सीजन बहुत थोड़ी मात्रा में तैयार हुई है लेकिन यह उपलब्धी माइने रखती है. इससे मंगल ग्रह पर मानव बस्ती को बसाने की राह खुल सकती है. साथ ही आपको बता दें कि धरती से परे किसी दूसरे ग्रह पर इस प्रकार की यह उड़ान पहली थी.

किस प्रकार से ऑक्सीजन बनाने के कार्य को पूरा किया गया? आइये जानते हैं.

एक टोस्टर-आकार, प्रायोगिक इंस्ट्रूमेंट जिसमें  पर्सिवरेंस  था, जिसे मार्स ऑक्सीजन इन-सीटू रिसोर्स यूटिलाइज़ेशन एक्सपेरिमेंट (Mars Oxygen In-Situ Resource Utilization Experiment, MOXIE) कहा जाता है, ने इस कार्य को पूरा किया.

MOXIE ने पर्सिवरेंस के साथ मंगल ग्रह पर उड़ान भरी, जो 18 फरवरी को लाल ग्रह या अमंगल ग्रह पर पहुंचा. इसका काम मंगल ग्रह के वायुमंडल के प्राथमिक घटक कार्बन डाइऑक्साइड से ऑक्सीजन परमाणुओं को तोड़ना था. यह "एक बिजली का पेड़" जैसा है, MIT के प्रमुख अन्वेषक माइकल हेचट (Michael Hecht) के अनुसार.

MOXIE एक अन्वेषण प्रौद्योगिकी जांच है जैसा कि मार्स एनवायरनमेंटल डायनामिक्स एनालाइज़र (Mars Environmental Dynamics Analyzer, MEDA) मौसम स्टेशन है और यह नासा के अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी मिशन निदेशालय (Space Technology Mission Directorate, STMD) और मानव अन्वेषण और संचालन मिशन निदेशालय (Human Exploration and Operations Mission Directorate) द्वारा प्रायोजित है.

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MOXIE कैसे काम करता है?

मंगल ग्रह पर लगभग 95% कार्बन डाइऑक्साइड है. MOXIE ने वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को निकाला और कार्बन डाइऑक्साइड अणुओं से ऑक्सीजन परमाणुओं को अलग कर दिया और कार्बन मोनोऑक्साइड को अपशिष्ट उत्पाद के रूप में मार्टियन वातावरण (Martian atmosphere) में वापस छोड़ दिया.

इस परिवर्तन प्रक्रिया को लगभग 1,470 डिग्री फ़ारेनहाइट (Fahrenheit) (800 सेल्सियस) के तापमान तक पहुंचने के लिए उच्च स्तर की गर्मी की आवश्यकता होती है.

इसे समायोजित करने के लिए, MOXIE यूनिट गर्मी-सहन करने योग्य सामग्री (Heat-tolerant materials) से बनाया गया है. इसमें 3D-  प्रिंटेड निकल मिश्र धातु भाग शामिल है, जो इसके माध्यम से बहने वाली गैसों को गर्म और ठंडा करते हैं, और साथ ही एक हल्का Aerogel जो गर्मी में पकड़ में मदद करता है.

MOXIE के बाहर एक पतली सोने की कोटिंग Infrared heat को दर्शाती है, जो बाहरी रूप से विकीर्ण करने और संभवतः पर्सिवरेंस के अन्य भागों को नुकसान पहुंचाती है.

इससे पहले ऑपरेशन में, MOXIE का ऑक्सीजन उत्पादन काफी मामूली था लगभग 5 ग्राम, जो एक अंतरिक्ष यात्री के लिए लगभग 10 मिनट की सांस लेने योग्य ऑक्सीजन के बराबर था. MOXIE को प्रति घंटे 10 ग्राम तक ऑक्सीजन उत्पन्न करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.

ऑक्सीजन-उत्पादन के तीन चरण 

ऑक्सीजन-उत्पादन के तीन चरण इस प्रकार हैं:

पहला चरण उपकरण के फंक्शन की जांच करेगा और उसे चिह्नित करेगा, 

जबकि दूसरा चरण विभिन्न वायुमंडलीय स्थितियों, जैसे दिन और मौसम के अलग-अलग समय में उपकरण को चलाएगा.

तीसरे चरण में, हेच (Hecht) के अनुसार, "हम एन्वेलोप (Envelope) को धक्का देंगे" - नए ऑपरेटिंग मोड की कोशिश कर रहे हैं, या "नए रिंकल्स (Wrinkles) को शुरू कर रहे हैं, जैसे कि एक रन जहां हम तीन या अधिक अलग-अलग तापमान पर संचालन की तुलना करते हैं."

पर्सिवरेंस के बारे में 

 मंगल ग्रह पर पर्सिवरेंस मिशन का एक अहम उद्देश्य खगोल विज्ञान है, जिसमें प्राचीन सूक्ष्मजीव जीवन के संकेतों की खोज करना शामिल है.

रोवर ग्रह की भूविज्ञान और पहले की जलवायु को चिह्नित करेगा, मंगल ग्रह के मानव अन्वेषण का मार्ग प्रशस्त करेगा, और मार्टियन रॉक को कैचे और रेगोलिथ (Regolith) (टूटी हुई चट्टान और धूल) को इकट्ठा करने वाला पहला मिशन होगा.

मार्स 2020 पर्सिवरेंस मिशन नासा के चंद्रमा से मंगल अन्वेषण दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसमें चंद्रमा के लिए आर्टेमिस मिशन (Artemis missions) शामिल है जो मंगल ग्रह पर मानव अन्वेषण के लिए तैयारी करने में मदद करेगा.

Source: nasa.gov

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