भारत में गैस एजेंसी लेने की क्या प्रक्रिया है और इसमें कितना खर्च आता है?

इस लेख में यह बताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति किसी कंपनी की गैस एजेंसी लेना चाहता है तो उसे किन-किन योग्यताओं को पूरा करना होगा. किस केटेगरी के लोगों को कितनी एजेंसियां मिलेगीं और एक गैस एजेंसी खोलने के लिए कितनी जगह और रुपयों की जरुरत होगी.
Mar 15, 2019 18:49 IST
    Indane Gas Agency

    देश में 30 सितंबर 2017 से 1 जनवरी 2018 के बीच देश में सक्रिय घरेलू गैस उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर 26 करोड़ हो गई है, जबकि देश में एलपीजी वितरकों की संख्या सिर्फ 19,649 है. आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2019 तक 5,000 एलजीपी वितरक और जोड़े जायंगे. इसलिए बहुत से लोगों के पास इस सुनहरे अवसर का फायदा उठाने का मौका है.

    भारत में गैस की सप्लाई करने वाली प्रमुख कंपनियों में इंडियन आयल, भारत पेट्रोलियम, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम, गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया, ऑयल इंडिया लिमिटेड, केयर्न इंडिया लिमिटेड, तेल और प्राकृतिक गैस निगम और रिलायंस पेट्रोलियम लिमिटेड हैं.

    lpg distributor india 2018

    इस लेख में जून 2017 तक इंडियन आयल, भारत पेट्रोलियम और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम की गैस एजेंसी लेने के लिए क्या योग्यताएं हैं और इसके लिए कितनी जगह और खर्चे की जरुरत होगी, इस बारे में बताया गया है.

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    गैस कम्पनियाँ गैस एजेंसी देने के लिए क्षेत्रों को मुख्य रूप से 4 क्षेत्रों में बाँटती हैं. ये क्षेत्र हैं;
    1. शहरी वितरक  (Sheheri Vitrak)

    2. ग्रामीण वितरक (Gramin Vitrak)

    3. ररबन वितरक (Rurban Vitrak)

    4. दुर्गम क्षेत्र वितरक (Durgam Kshetriya Vitrak)

    आइये अब जानते हैं कि इन चारों क्षेत्रों में गैस एजेंसी लेने के लिए किस प्रकार की योग्यताएं पूरी करनी होतीं हैं;

    1. शहरी वितरक: 'शहरी क्षेत्र' को जनगणना 2011 के अनुसार परिभाषित किया गया है. 'शहरी क्षेत्र' में स्थित एलपीजी वितरक उन ग्राहकों को गैस की सप्लाई करेगा जो कि मेट्रो शहर / शहर और नगर निगम की सीमाओं के भीतर रहते हैं.  मेट्रो शहरों के अंतर्गत दिल्ली, ग्रेटर मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, अहमदाबाद, बेंगलुरु और पुणे के केवल शहरी क्षेत्रों को शामिल किया गया है.

    2. ग्रामीण वितरक: ग्रामीण क्षेत्र' को जनगणना 2011 के अनुसार परिभाषित किया गया है. इस क्षेत्र का गैस वितरक 15 किमी क्षेत्र के दायरे में रहने वाले ग्राहकों को गैस की सप्लाई कर सकता है.

    3. ररबन वितरक: इस प्रकार के वितरक का मतलब ग्रामीण + प्लस है. इस प्रकार की डीलरशिप में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में वितरण करने के लिए जिम्मेदार होते है. इस क्षेत्र के मामले में दूरी की सीमा होती है. डिलिवरी केवल उन गांव मे उपलब्ध कराया जाएगी जो कि शहरी क्षेत्र से 15 किमी की सीमा के भीतर हैं या फिर तेल कंपनी द्वारा तय की गयी सीमा तक सप्लाई की जा सकेगी.

    4. दुर्गम क्षेत्रीय वितरक: इस श्रेणी के अंतर्गत ऐसे एलपीजी वितरक आते हैं जो कठिन एवं किसी विशेष क्षेत्र जैसे आदिवासी क्षेत्र, पहाडी क्षेत्र, जंगली क्षेत्र, दुर्लभ आबादी क्षेत्र, द्वीप समूह, डिस्टर्ब एरिया, वामपंथी अतिवाद से प्रभावित क्षेत्र इत्यादि में अपनी सेवाएँ एलपीजी ग्राहकों को प्रदान करते हैं.

    गैस एजेंसी लेने के लिए क्या योग्यताएं होनी चाहिए;

    1. आवेदक की उम्र 21 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए

    2. आवेदक एक भारतीय नागरिक होना चाहिए

    3. आवेदक द्वारा कक्षा 10 की परीक्षा उत्तीर्ण होनी चाहिए

    4. इस व्यापार को चलाने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए. इसका मतलब है कि आवेदक शारीरिक रूप से पूरी तरह विकलांग नहीं होना चाहिए अर्थात दृष्टिहीन या पूरी तरह से अपाहिज नहीं होना चाहिए.
    5. आवेदक को किसी आर्थिक अपराध या किसी अन्य संगीन मामले में अदालत द्वारा ना तो दोषी करार दिया जाना चाहिए ना ही उस पर ऐसा कोई आरोप लगाया जाना चाहिए.

    नोट :– जो लोग स्वतंत्रता सेनानी श्रेणी के तहत आवेदन करना चाहते हैं उन्हें इस उम्र सीमा प्रतिबंध का पालन करने की जरूरत नहीं है. किसी भी तेल कंपनी कर्मचारी के परिवार के सदस्य डीलरशिप के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं.

    गैस एजेंसी लेने के लिए आवेदन कैसे करें

    गैस कंपनियां जिस जगह पर एजेंसी खोलना चाहतीं हैं उसकी लिस्ट समाचार पत्रों या अन्य माध्यमों से बतातीं हैं. इच्छुक व्यक्ति ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से एप्लीकेशन भेजता है इसके बाद एक निर्धारित तारीख पर आवेदक का इंटरव्यू किया जाता है इसमें विभिन्न आधार पर नंबर दिए जाते हैं इन नंबरों के विभिन्न पैरामीटर आधार पर कैंडिडेट का चयन किया जाता है इसका रिजल्ट नोटिस बोर्ड पर सभी पैरामिड्स पर प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाता है. कभी कभी ज्यादा संख्या में योग्य आवेदक पाए जाने पर लाटरी सिस्टम के माध्यम से भी योग्य लोगों के नाम निकाले जाते हैं.

    यह भी ध्यान रहे कि गैस एजेंसी खोलने के लिए एक आवेदनकर्ता एक राज्य में अलग अलग लोकेशन के लिए आवेदन कर सकता है लेकिन इसके लिए उसे हर एक लोकेशन के लिए अलग अलग आवेदन फॉर्म भरकर अप्लाई करना होगा.

    कंपनी द्वारा फील्ड वैरिफिकेशन

    मैरिट में अंकों के प्रदर्शित होने के बाद गैस कंपनी का एक पैनल सभी कैंडिडेट की दी गई डिटेल के संबंध में फील्ड  वैरिफिकेशन करता है. इसमें जमीन से लेकर सभी अन्यद बातों की गहन पड़ताल की जाती है. यदि सब कुछ सही पाया जाता है तो गैस एजेंसी अलॉट की जाती है. इसके लिए आवेदक को एक तय समय सीमा दी जाती है जिसके भीतर ही उसे गैस एजेंसी शुरू करनी होती है.

    गोदाम खोलने के लिए भूमि की जरुरत इस प्रकार है;

    गैस एजेंसी के लिए अप्लाई करने के समय आवेदक के पास विभिन्न इलाकों (शहरी या ग्रमीण) के हिसाब से गोदाम बनाने के लिए कम से मिनिमम जमीन होनी चाहिए. गोदाम के निर्माण के लिए जो भूमि चाहिए होती है वह चलते हुए ओवरहेड पावर ट्रांसमिशन या टेलीफोन लाइनों से दूर होनी चाहिए. प्लाट से कोई नहर, नाला इत्यादि नहीं गुजरना चाहिए. इसके साथ ही गोदाम ऐसी जगह पर होना चाहिए जहाँ पर सिलिंडरों को लेकर ट्रक जैसे वाहन आसानी से पहुँच सकें.

    1. शहरी और रुर्बन वितरक के लिए आवेदन करने वाले आवेदक के पास 25 मीटर x 30 मीटर (उसी राज्य में प्रस्तावित स्थान की नगरपालिका / शहर / गांव सीमा से 15 किमी के भीतर) यह प्लाट होना चाहिए.

    2. दुर्गम क्षेत्रीय वितरक के पास 15 मीटर x 16 मीटर (विज्ञापित स्थान के अनुसार गांव सीमा के गांव / समूह के भीतर) यह प्लाट होना चाहिए.

    3. ग्रामीण वितरक के पास 21 मीटर x 26 मीटर (विज्ञापित स्थान से 15 किमी के भीतर) यह प्लाट होना चाहिए.

    गोदामों की भण्डारण क्षमता कितनी होगी?

    1. शहरी और रुर्बन वितरक के पास जो गोदाम होगा उसकी भंडारण क्षमता 8000 किलो एलपीजी होनी चाहिए.

    2. ग्रामीण वितरक के पास गोदाम की भंडारण क्षमता 5000 किलो एलपीजी होनी चाहिए.

    3. दुर्गम क्षेत्रीय वितरकों के पास न्यूनतम भंडारण क्षमता 3000 किलोग्राम होना चाहिए

    गैस एजेंसी के लिए कितने रूपये का रजिस्ट्रेशन शुल्क लगेगा: यह शुल्क वापिस नहीं किया जायेगा.

    FEE gas agency licence

    एजेंसी आवंटन और रिजर्वेशन:
    गैस एजेंसी के लिए सरकार द्वारा तय मानकों के आधार पर रिजर्वेशन दिया जाता है. जो कम्पनी कितनी भी संख्या में गैस एजेंसी बाँटने का टेंडर निकालती है उसकी 50.5% संख्या सामान्यक श्रेणी के आवेदकों के लिए रिज़र्व होतीं हैं. अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए 27% और अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए 22.5% गैस एजेंसियां रिज़र्व होतीं हैं.

    reservation in gas agency allocation

    जातिवार आरक्षण के अलावा सामाजिक रूप से अक्षम लोगों, भूतपूर्व सैनिक, स्वंतंत्रता सेनानी, खिलाड़ी, सशस्त्रा बल, पुलिस या सरकारी कर्मचारियों को भी आरक्षण दिया जाता है. इसका डेटा इस प्रकार है.

    नोट 2:- स्पोर्ट्स केटेगरी के अन्दर निम्न खिलाड़ी गिने जायेंगे;

    1. अर्जुन / खेल रत्न पुरस्कार विजेता,

    2. ओलंपिक / एशियाई / राष्ट्रमंडल खेलों में पदकों के विजेता और

    3. मान्यता प्राप्त विश्व चैम्पियनशिप।

    4. राष्ट्रीय चैंपियंस - वरिष्ठ श्रेणी में प्रथम स्थान धारक (महिला और पुरुष दोनों)

    गैस एजेंसी डिस्ट्रीब्यूटर को कितना कमीशन मिलता है?

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रलाय ने गैस एजेंसी डिस्ट्रीब्यूटर के लिए 23 अक्टूबर, 2014 को नए नियम बनाये थे जिसके अनुसार डिस्ट्रीब्यूटर को 14.2 किलोग्राम के एक सिलिंडर पर 44 रुपये कमीशन के रूप में, 26 रुपये स्थापना शुल्क और डिलीवरी शुल्क के रूप में 18 रुपये मिलते हैं. इस प्रकार डीलर को एक सिलिंडर पर लगभग 88 रुपये की कमाई होती है जबकि 5 किलो के सिलिंडर पर 44 रुपये की कमाई होती है.

    गैस एजेंसी के लिए आवेदन अप्लाई करते समय ध्यान देने योग्य बातें:

    इच्छुक एवं पात्र व्यक्ति जो एलपीजी का वितरक बनना चाहता हो या गैस एजेंसी खोलना चाहता हो उसको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि गैस एजेंसी खोलने के लिए कम से कम 20 से 25 लाख रुपयों की जरूरत अवश्य होगी क्योंकि एजेंसी की जरूरत के लिए एक गोदाम, कार्यालय के लिए एक दुकान, ट्रांसपोर्ट के लिए ट्रकों, कई कमर्चारियों की सैलरी इत्यादि का खर्च भी वहन करना होता है.

    गैस एजेंसी को खोलने की लागत इस बात पर भी निर्भर करती है कि एजेंसी किस शहर या प्रदेश में खोली जा रही है. दुर्गम इलाकों में इसकी लागत अधिक भी हो सकती है.
    इस प्रकार यह कहना ठीक होगा कि गैस एजेंसी खोलने के लिए किसी धनवान आदमी को ही अप्लाई करना चाहिए.

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