कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर: मुख्य बिंदु

Apr 17, 2020, 12:19 IST

सुप्रीम कोर्ट ने 13 अप्रैल को निर्णय दिया है कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले, आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थी इत्यादि बिना कोई शुल्क दिए निजी और सरकारी अस्पतालों में कोरोना वायरस की जाँच करा सकेंगे. इसके अलावा आर्थिक रूप से समृद्ध लोगों को निजी अस्पतालों में कोरोना जाँच कराने के लिए अधिकतम 4500 देने होंगे. 

COVID-19 Test
COVID-19 Test

भारत में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या तेजी से बढती हुई 13 हजार के पार पहुँच गयी है. इस वृद्धि के पीछे बड़ी वजह बड़ी संख्या में जांच होना भी है, इससे पहले देश में जांच का काम इतना तेज नहीं था. चूंकि कोरोना का टेस्ट थोडा महंगा होता है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले निर्णय में कहा था कि निजी अस्पतालों को इसकी जांच सभी के लिए फ्री करनी चाहिए.

इसके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी ख़बरें आ रहीं हैं कि कुछ अराजक लोग गावों में चेक-उप के लिए जा रहे या संक्रमित लोगों का पता लगा रहे मेडिकल स्टाफ पर हमले कर रहे हैं, इससे भी सुप्रीम कोर्ट काफी चिंतित दिखा और उसने इन सभी मुद्दों के ऊपर दाखिल की गयी कई जनहित याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया है.

इस लेख में हमने सुप्रीम कोर्ट के इसी निर्णय के कुछ बिन्दुओं को बताया है.

लेकिन 13 अप्रैल को अपने पुराने निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार किया और दो जजों एस. रविन्द्र भट और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने आदेश दिया कि जो लोग कोरोना टेस्ट के लिए 4,500 रुपये नहीं चुका सकते हैं उन्हीं की जांच प्राइवेट लैब में मुफ्त में जांच होनी चाहिए बाकि सभी लोगों को पैसा देकर जाँच करानी चाहिए. अर्थात निजी लैब में सिर्फ गरीबों के लिए टेस्ट फ्री होगा, और जो निजी लैब आर्थिक रूप से कमजोर होंगी उनके शुल्क की प्रतिपूर्ति केन्द्र सरकार करेगी.

 

फ्री जाँच के लिए कौन योग्य है? (Who is eligible for free Covid-19 Test)

1. गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोग 

2. आयुष्मान भारत के लाभार्थी 

3. प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थी 

4. डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर का लाभ लेने वाले लाभार्थी 

5. अनौपचारिक सेक्टर्स में कम आय वर्ग वाले लोग 

सुप्रीम कोर्ट के आर्डर अन्य मुख्य बिंदु (Key points for Supreme Court order)

1. कोरोना से लड़ाई में जितने भी मेडिकल स्टाफ (डॉक्टर्स, नर्स, सफाई कर्मचारी और अन्य हेल्पिंग स्टाफ) काम कर रहे हैं, उन्हें जरूरत के हिसाब से सुरक्षा उपकरण जैसे PPE किट इत्यादि उपलब्ध कराये जाने चाहिए.

2. सुप्रीम कोर्ट ने कोविड 19 को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया है.

3.  कोरोना से लड़ाई में जितने भी मेडिकल स्टाफ लगे हुए हैं उन्हें 'कोरोना वारियर्स' कहा है.

4. सुप्रीम कोर्ट ने सभी देशवासियों से अपील की है कि वे इस लड़ाई में 'कोरोना वारियर्स' के साथ सपोर्ट करें और उनसे बदतमीजी ना करें.

5. यदि मेडिकल स्टाफ उस जगह पर जाते हैं जहाँ पर कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं या जहाँ पर कोरोना के मरीजों को रखा गया है, तो उन्हें पूरी सुरक्षा उपलब्ध करायी जानी चाहिए.

6. जो भी व्यक्ति, डॉक्टर्स और अन्य मेडिकल स्टाफ को उनका काम करने से रोकता है या उनके काम में बाधा डालता है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.

7. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को सुझाव दिया है कि सरकार मेडिकल इक्विपमेंट के निर्यात को रोक सकती है ताकि देश में इनकी उपलब्धता बनी रहे.

8. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आर्डर दिया कि कोरोना वायरस की जांच सिर्फ वहीं प्रयोगशालाएं करें जो इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), और National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories से मान्यता प्राप्त हों.

कुछ लोगों ने मांग की थी कि कोरोना से निपटने के लिए देश के सभी प्राइवेट अस्पतालों का राष्ट्रीयकरण कर देना चाहिए ताकि अमीर और गरीब सभी को मुफ्त इलाज मिल सके. हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने यह याचिका ख़ारिज कर दी है.

इस प्रकार स्पष्ट है कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी हर संभव प्रयास कर रहा है. उम्मीद है कि जल्दी ही देश इस महामारी से निजात पा लेगा और लोगों की जिंदगी एक बार फिर से पटरी पर दौड़ेगी. 

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Hemant Singh is an academic writer with 7+ years of experience in research, teaching and content creation for competitive exams. He is a postgraduate in International
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