हाई लाइट्स:
- तटरेखा की लंबाई में बढ़ोतरी तकनीकी कारणों से हुई है, न कि किसी नए भूभाग के जुड़ने से।
- नया डेटा हाई-रिज़ॉल्यूशन मैपिंग से निकला है।
- द्वीपों की गिनती अब मानकीकरण के बाद ज्यादा स्पष्ट की गई है।
हाल ही में हुई हाई-रिजॉल्यूशन मैपिंग के बाद भारत के समुद्री तट की लंबाई 7,516 किलोमीटर से बढ़कर 11,098 किलोमीटर हो गई है। यानी अब यह करीब 48% लंबा माना जा रहा है। यह बढ़ोतरी किसी नए भू-भाग के जुड़ने से नहीं, बल्कि ज्यादा सटीक नाप-जोख के कारण हुई है। इस अपडेट से भारत के समुद्री डेटा की सटीकता बढ़ गई है, जिससे रणनीतिक और प्रशासनिक फायदे मिलेंगे।
गुजरात का समुद्री तट 1970 में 1,214 किलोमीटर था, जो अब नए डेटा (2023-24) में बढ़कर 2,340 किलोमीटर हो गया है। इसी के साथ गुजरात अब भी भारत का सबसे लंबा समुद्री तट वाला राज्य बना हुआ है।
AC और स्लीपर क्लास का किराया बढ़ा, 1 जुलाई से लगेगा कितना किराया? यहां देखें
भारत की कुल तटरेखा लंबाई: हाई लाइट्स
डिटेल्स | पुराना आंकड़ा | नया आंकड़ा | कुल बदलाव |
भारत की तटरेखा लंबाई | 7,516 किमी | 11,098 किमी | +3,582 किमी |
तटरेखा में बढ़ोतरी (%) | — | — | लगभग 48% |
द्वीपों की संख्या | ~1,382 (2016) | 1,389 (2023-24) | +7 द्वीप |
ऑफशोर द्वीप | ~1,382 | 1,298 | — |
इनशोर द्वीप | — | 91 | — |
मानक बदलने से लंबाई कैसे बढ़ गई?
कम रिजॉल्यूशन से तट के मापन में जटिलतायें साफ नजर आती है. लेकिन नई तकनीक और जीआईएस सॉफ्टवेयर से हर किनारे को बारीकी से माप लिया गया, जिससे तट की लंबाई बढ़ गई। इसी को ‘कोस्टलाइन पैराजॉक्स’ कहा जाता है. यानी जितनी बारीकी से मापन होगा तट उतना लंबा दिखेगा!
RAC यात्रियों के लिए खुशखबरी, भारतीय रेलवे ने उठाया यह अहम कदम
पुरानी और नई मैपिंग में क्या अंतर है?
पहले भारत के समुद्री तट को 1:45,00,000 स्केल पर मापा गया था, जिसमें छोटे-छोटे मुड़े-तुड़े हिस्से नहीं दिख पाए। अब 1:2,50,000 के हाई-रिजॉल्यूशन डेटा से नापी गई नई लंबाई में हर छोटे-बड़े मोड़, खाड़ी और किनारे की अच्छे से स्केलिंग की गयी है।
गुजरात: सबसे ज्यादा लंबाई में इजाफा
गुजरात अब भी भारत का सबसे लंबा समुद्री तट वाला राज्य बना हुआ है। गुजरात का समुद्री तट 1970 में 1,214 किलोमीटर था, जो अब नए डेटा (2023-24) में बढ़कर 2,340 किलोमीटर हो गया है।
राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | पुरानी तटरेखा लंबाई (KM) | नई तटरेखा लंबाई (KM) | बदलाव (KM) |
गुजरात | 1,214 किमी | 2,340 किमी | +1,126 किमी |
पश्चिम बंगाल | 157 किमी | 721 किमी | +564 किमी |
तमिलनाडु | 906 किमी | 1,068 किमी | +162 किमी |
आंध्र प्रदेश | ~972 किमी | ~972 किमी (कोई बदलाव नहीं) | — |
नए नक्शे में द्वीपों की संख्या भी बढ़ी?
नई स्केलिंग में कई ऐसे ऑफशोर द्वीप भी शामिल किए गए हैं जो पहले पुराने डेटा या मैन्युअल तरीकों में रह गए थे। अब कुल 1,389 द्वीप माने जा रहे हैं. जिसमें 1,298 ऑफशोर और 91 इनशोर द्वीप हैं। बता दें कि असम या पश्चिम बंगाल के नदी द्वीप इसमें शामिल नहीं हैं।
पहले और अब के आंकड़ों में द्वीपों को लेकर क्या विवाद था?
साल 2016 में सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया ने 1,382 ऑफशोर द्वीप बताए थे, जबकि कोस्ट गार्ड और नेवी ने 1,334 गिने थे। जो मापन में अंतर का कारण था. अब डेटा मानकीकरण के बाद यह संख्या स्पष्ट कर दी गई है।
बढ़ी हुई लंबाई का क्या महत्व है?
भू-भाग में कोई बदलाव नहीं हुआ, लेकिन सटीक नाप-जोख से तटीय योजना, पर्यावरण प्रबंधन और सुरक्षा रणनीति मजबूत होगी। अब हर 10 साल में भारत अपनी समुद्री तटरेखा फिर से मापेगा, ताकि डेटा समय के साथ अपडेट रहे।
भारत की समुद्री सीमा भले ही नक्शों में बढ़ी दिखे, लेकिन असल में यह टेक्नोलॉजी और बारीकियों से जुड़ा बदलाव है. जो दिखाता है कि आधुनिक तकनीक से कितनी सटीक प्लानिंग और सुरक्षा संभव हो पाती है।
Comments
All Comments (0)
Join the conversation