कितना होता है ट्रेन के एक पहिए का वजन? यहां देखें जवाब
आमतौर पर ट्रेन का एक पहिया कई सौ किलोग्राम का होता है, हालांकि इसका वास्तविक वजन इस बात पर निर्भर करता है कि वह यात्री ट्रेन, मालगाड़ी या लोकोमोटिव में उपयोग किया जा रहा है।
ट्रेन से सफर करना भला किसे पसंद नहीं होता। खिड़की के पास बैठकर बाहर के सुंदर नज़ारों को निहारना यात्रा को और भी यादगार बना देता है। लेकिन ट्रेन से जुड़ी कई ऐसी तकनीकी बातें हैं, जिनके बारे में आम लोग कम ही जानते हैं। इन्हीं में से एक है ट्रेन के पहियों का वजन। आज हम आपको इसी विषय से जुड़ी अहम जानकारी देने जा रहे हैं। आमतौर पर ट्रेन का एक पहिया कई सौ किलोग्राम का होता है, हालांकि इसका वास्तविक वजन इस बात पर निर्भर करता है कि वह यात्री ट्रेन, मालगाड़ी या लोकोमोटिव में उपयोग किया जा रहा है।
कितना होता है ट्रेन के पहिए का वजन?
आमतौर पर ट्रेन का पहिया कुछ सैकड़ों किलोग्राम का होता है, लेकिन इसका सही वजन इस बात पर निर्भर करता है कि वह यात्री ट्रेन, मालगाड़ी या लोकोमोटिव में इस्तेमाल हो रहा है और उसका डिजाइन कैसा है। स्टील अथोरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) द्वारा बताये गए डेटा के अनुसार यहाँ वजन देख सकते है.
भारतीय रेलवे में अलग-अलग पहियों का वजन
भारतीय रेलवे में ब्रॉड गेज यात्री कोच का एक पहिया लगभग 380 से 400 किलोग्राम वजन का होता है। यहां आप हर एक कैटेगरी की डिटेल देख सकते है-
कोच (Coach) के पहिए:
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BG यात्री कोच: लगभग 394 किलोग्राम, पहिए का व्यास 920 मिमी
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EMU ट्रेन: लगभग 423 किलोग्राम
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कोलकाता मेट्रो: लगभग 342 किलोग्राम
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LHB कोच: लगभग 326 किलोग्राम
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नैरो गेज: लगभग 144 किलोग्राम
लोकोमोटिव (Engine) के पहिए
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ब्रॉड गेज लोको: लगभग 530 किलोग्राम
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डीजल लोको / ‘S’ शेप पहिया: लगभग 528 किलोग्राम
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WAG-9 लोको: लगभग 554 किलोग्राम
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WAP-5 लोको: लगभग 554 किलोग्राम
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मीटर गेज लोको: लगभग 421 किलोग्राम
एक्सल (Axle) और व्हीलसेट का कितना होता है वजन:
16.25 टन एक्सल (S/F) का भार लगभग 378 किलोग्राम तक होता है, वहीं व्हीलसेट में दो पहिए और एक ठोस एक्सल शामिल होता है. बता दें कि एक सिंगल व्हील सिर्फ गोल स्टील का पहिया होता है. ऐसे में एक्सल जुड़ा होने के कारण एक पूरा व्हीलसेट का वजन 900 से 1,000 किलोग्राम से ज्यादा हो सकता है.
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क्यों भारी होते हैं ट्रेन के पहिए?
ट्रेन के पहिए विशेष मिश्र धातु (एलॉय स्टील) से बनाए जाते हैं, ताकि वे अत्यधिक भारी भार को सहन कर सकें, तेज रफ्तार में भी संतुलन और सुरक्षा बनाए रखें और लंबे समय तक घिसाव व दबाव को झेल सकें। इन्हीं कारणों से रेलवे के पहिए सामान्य पहियों की तुलना में बेहद मजबूत और भारी होते हैं।
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