जानें शराब की बिक्री से राज्यों को कितना राजस्व प्राप्त होता है?

भारतीय राज्यों ने 2018-19 में शराब पर उत्पाद शुल्क से प्रति माह औसतन 12,500 करोड़ रुपये एकत्र किए,जो 2019-20 में प्रति माह लगभग 15,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.“उत्तर प्रदेश ने पिछले वित्तीय वर्ष में शराब से 2,500 करोड़ रुपये प्रतिमाह एकत्र किए थे.आइये इस लेख में पड़ताल करते हैं कि कोरोना वायरस फैलने की आशंका के बीच क्यों राज्यों के लिए शराब बेचना जरूरी है?
Created On: May 6, 2020 17:33 IST
Modified On: May 6, 2020 17:33 IST
Liquor on Sale
Liquor on Sale

भारत में संघीय संरचना होने के कारण केंद्र और राज्यों के बीच विभिन्न करों और उनके उत्तरदायित्वों को अलग अलग बांटा गया है ताकि किसी तरह का कोई गतिरोध उत्पन्न ना हो.

लेकिन फिर भी केंद्र सरकार के पास कर लगाने और उसे वसूलने के अधिक साधन हैं जबकि राज्यों की आय के साधन सीमित हैं और उत्तरदायित्वों की विशाल श्रंखला है. इसी कारण राज्यों को अपने यहाँ का प्रशासन चलाने के लिए या तो केंद्र पर निर्भर रहना पड़ता है या फिर स्वयं कर इकठ्ठा करने के उपाय सर्च करने होते हैं.

इन्हीं उपायों में एक सबसे बड़ा उपाय है शराब और अन्य मादक पदार्थों पर लगाया जाने वाला कर. चूंकि पूरे देश में आर्थिक गतिविधियाँ ठप्प हैं और राज्यों को अपना खर्च चलाने के लिए वित्तीय साधन जुटाने पड़ रहे हैं, इसलिए शराब की बिक्री शुरू करना राज्यों की मजबूरी है.

राज्य सरकार द्वारा लगाए जाने वाले मुख्य कर कौन से हैं? (Taxes imposed by states in India)

1. मनोरंजन कर 

2. कृषि कर 

3. वैट 

4. बिक्री कर 

5. उत्पाद कर 

6. मालगुजारी कर 

7. वस्तु एवं सेवा कर 

8. स्टाम्प ड्यूटी 

9. प्रोफेशन टैक्स 

10. मोटर व्हीकल टैक्स 

भारत में शराब पीने वालों की स्थिति (Liquor Addict in India)

लांसेट स्टडी के अनुसार भारत में 2010 से 2017 के बीच शराब की खपत में 38% की वृद्धि हुई थी. अर्थात 2010 में शराब की खपत प्रति व्यक्ति 4.3 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष थी वो 2017 में बढ़कर लगभग 6 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष हो गयी थी.

AIIMS की 2019 की एक स्टडी के मुताबिक, भारत में लगभग 5.7 करोड़ शराब पीने के आदी लोग (Liquor Addict) हैं.जिसके परिणाम भयंकर होते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार,वर्ष 2018 में भारत में लगभग 2.60 लाख लोगों की मौत इसी शराब के कारण हो गयी थी.

शराब पर उत्पाद शुल्क से राज्य सरकारें कितना कमाती हैं (State governments revenue from excise on Liquor)

राज्य, शराब के निर्माण पर उत्पाद कर और बिक्री पर सेल्स टैक्स लगाते हैं. कुछ राज्य उदाहरण के लिए, तमिलनाडु वैट (मूल्य वर्धित कर) लगाते हैं. राज्य आयातित विदेशी शराब पर विशेष शुल्क भी लेते हैं जैसे; परिवहन शुल्क, लेबल और ब्रांड पंजीकरण शुल्क. जबकि कुछ राज्य जैसे उत्तर प्रदेश ने आवारा पशुओं के रखरखाव जैसे विशेष उद्देश्यों के लिए धन एकत्र करने के लिए "शराब पर विशेष शुल्क" लगाया है जिसे 'काऊ सेस' कहा जाता है.

(RBI रिपोर्ट):शराब पर लगने वाले उत्पाद शुल्क से प्राप्त आय (Excise duty on Liquor in India)

रिज़र्व बैंक की रिपोर्ट पर नजर डालने पर पता चलता है कि वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान,29 राज्यों और दिल्ली और पुदुचेरी ने शराब पर राज्य के उत्पाद शुल्क से संयुक्त रूप से 1,75,501.42 करोड़ रुपये कमाए हैं जो कि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 16% अधिक है.

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राज्यों ने 2018-19 में शराब पर उत्पाद शुल्क से औसतन प्रति माह लगभग 12,500 करोड़ रुपये एकत्र किए, जो कि 2019-20 में प्रति माह लगभग 15,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था.यह आंकड़ा कोविड 19 के फैलने से पहले का है.

“उत्तर प्रदेश ने पिछले वित्तीय वर्ष में शराब से 2,500 करोड़ रुपये की मासिक औसत राशि एकत्र की और उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में लगभग 3,000 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे.
RBI के अध्ययन से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश को 2019-20 में शराब की बिक्री पर उत्पाद शुल्क के रूप में सभी राज्यों में सबसे अधिक 31,517.41 करोड़ रुपये एकत्र होने की उम्मीद है.

कौन से राज्य सबसे अधिक राजस्व एकत्र करते हैं (States with highest revenue from Excise duty on Liquor)

राज्यों से राजस्व आंकड़ों के संकलन में एक समय अंतराल है, इसलिए पूरे वर्ष के आंकड़े सिर्फ 2018-19 तक ही उपलब्ध हैं. इस वित्तीय वर्ष के दौरान,शराब पर उत्पाद शुल्क से सबसे अधिक राजस्व वसूलने वाले पांच हैं;

1. राज्य उत्तर प्रदेश (25,100 करोड़ रुपये) 

2. कर्नाटक (19,750 करोड़ रुपये) 

3. महाराष्ट्र (15,343.08 करोड़ रुपये) 

4. पश्चिम बंगाल (10,554.36 करोड़ रुपये) 

5. तेलंगाना (10,313.68 करोड़ रुपये)

इस प्रकार ऊपर दिए गए आंकड़े यह सिद्ध करते हैं कि राज्यों की तिजोरी में शराब की बिक्री से सबसे अधिक कर इकठ्ठा होता है. यदि ये राज्य शराब बेचना बहुत लम्बे समय तक बंद रखंगे तो इनकी अर्थव्यवस्था रुक सी जाएगी. लेकिन इसके उलट इस बात की भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि यदि शराब की बिक्री से कोरोना जैसी महामारी फैलती है तो फिर राज्यों को इस कमाई पर दुबारा से विचार करने की जरूरत है.

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