“वंदे भारत मिशन" क्या है और भारत द्वारा क्यों चलाया जा रहा है?
Vande Bharat Mission:'वंदे भारत मिशन' खाड़ी देशों और पड़ोसी देशों के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर से भारतीयों को वापस लाने पर केंद्रित है. 'वंदे भारत मिशन' के बारे में अधिक जानने के लिए यह लेख पढ़ें.
कोरोना वायरस के कहर के कारण पूरी दुनिया जैसे ठहर सी गयी है जो जिस जगह पर रह रहा है वो वहीँ पर फसा है. वर्तमान में लगभग 17.5 मिलियन भारतीय लोग विदेशों में रहते हैं.
भारत ने कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए मार्च में देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी साथ ही भारत आने वाली और विदेश जाने वाली सभी हवाई उड़ानों पर रोक लगा दी थी, इस कारण बहुत से लोग विदेश में ही फंस गए थे. अब इन्ही लोगों को विदेश से घर लाने की पहल चल रही है.
वंदे भारत मिशन" क्या है? (What is Mission Vande Bharat)
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि विदेशों में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए 7 मई से 13 मई तक 64 विशेष फ्लाइट्स संचालित की जाएंगी हालाँकि पहले हफ्ते में 15 उड़ानों का संचालन किया जाएगा.
कई एजेंसियों के सहयोग से चलाये जाने वाले ‘वंदे भारत मिशन के तहत विशेष उड़ानें ब्रिटेन, अमेरिका, और सिंगापुर, मलेशिया, कुवैत, सऊदी अरब, फिलीपींस, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बांग्लादेश को भेजी जाएंगी. इन विशेष फ्लाइट्स में 200 से 300 यात्रियों को ही बैठने की इजाजत दी जाएगी, अर्थात इन विशेष विमानों में भी सोशल डिस्टेंसिंग का भी कड़ाई से पालन किया जाएगा.
ज्ञातव्य है कि खाड़ी क्षेत्र में 3 लाख से अधिक लोगों ने वहां से निकलने के लिए पंजीकरण कराया है, लेकिन अभी फ़िलहाल उन्हीं लोगों को वापस लाया जायेगा जिनका वीजा ख़त्म होने वाला है, चिकित्सा संबंधी आपात स्थिति,या निर्वासन की संभावना जैसे अत्यावश्यक कारण हैं. अधिकारियों के अनुसार, खाड़ी देशों में दस हजार से अधिक भारतीयों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने का पता चला है जिनमें से 84 की मौत हो चुकी है.
फ्लाइट का खर्चा कौन उठाएगा? (Who will bear Flight Expenses)
सरकार ने पहले ही कह दिया है कि इन विशेष फ्लाइट्स का खर्चा यात्रियों को खुद ही उठाना होगा. इसके लिए सरकार ने पहले ही किराये की घोषणा कर दी है. अमेरिका से लौटने के लिए 1 लाख रुपये और यूरोप से आने के लिए 50,000 रुपये और की दर तय की गई है. शिकागो से हैदराबाद, शिकागो से दिल्ली के लिए लगभग 1 लाख रुपये और सैन फ्रांस्सिको और नेवार्क से भी लौटने के 1-1 लाख रुपये देने होंगे. वहीँ लंदन से दिल्ली, लंदन से मुंबई, लंदन से बेंगलुरु, लंदन से अहमदाबाद के लिए 50 हजार रुपये देने होंगे.
‘ऑपरेशन समुद्र सेतु’ (Operation Samudra Setu)
यह ऑपरेशन भारतीय नौसेना द्वारा दूसरे देशों से भारतीयों को वापस लाने के लिए चलाया जा रहा है. भारतीय नौसेना के पोत ‘मगर’ और ‘जलाश्व’ मालदीव से भारतीय नागरिकों को वापस ला रहा है और इन्हें कोच्चि लाया जायेगा. अभी और लोगों को इसी तरीके से वापस लाने के लिए मालदीव से भारत वापस आने वाले भारतीयों की सूची तैयार की जा रही है. पोत में बैठाने से पहले इनका मेडिकल चेकअप भी किया जायेगा और पोत में सोशल डिस्टेंसिंग और मेडिकल सुविधा का भी इंतजाम किया गया है.

प्रवासी भारतीयों का भारत में पैसा भेजने में योगदान (Remittances by NRIs to India)
विदेश से पैसा भेजने के मामले में भारतीयों ने अपना टॉप स्थान अभी भी कायम किया हुआ है. प्रवासी भारतीयों ने 2018 में 78.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर भारत में अपने परिवारजनों को भेजे हैं जो कि विश्व के कुल प्रेषण 689 बिलियन डॉलर का लगभग 14% है. चीन भी इस मामले में भारत से पीछे है. चीन को इसी अवधि में 67.41 अरब डॉलर मिले थे.

ज्ञातव्य है कि 2019 के मध्य तक 17.5 मिलियन भारतीय विदेशों में रहते हैं. भारत का प्रवासी समुदाय मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात (3.4 मिलियन), यूएस (2.7 मिलियन) और सऊदी अरब (2.4 मिलियन) में रहता है. ये लोग हर माह अपने परिवार/मित्रों के लोगों को खर्चा भेजते हैं. इसमें सबसे अधिक पैसा अमेरिका ($68bn) से भारत में भेजा जाता है इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात ($44.4bn)और सऊदी अरब ($36.1bn) का नंबर आता है.
इस प्रकार स्पष्ट है कि प्रवासी भारतीयों का भारत के विकास में बड़ा योगदान है. इसलिए यदि सरकार उनको इस संकट की घडी में बाहर निकाल रही है तो यह एक एक सराहनीय कदम है.