बौद्धिक संपदा अधिकार के व्यापार संबंधी पहलू (ट्रिप्स– TRIPS)

May 12, 2016, 11:25 IST

बौद्धिक संपदा अधिकारों पर बौद्धिक संपदा अधिकार के व्यापार संबंधी पहलू (ट्रिप्स–TRIPS) पर बना समझौता एक महत्वपूर्ण और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समझौता है। विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सदस्य देश स्वतः ही इस समझौते शामिल समझे जाते हैं। यह समझौता बौद्धिक संपदा के अधिकांश प्रावधानों को कवर करता है। इसमें पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, भौगोलिक संकेत, औद्योगिक डिजाइन, व्यापार गोपनीयता और पौधों की नई प्रजातियों पर अपवर्जन अधिकार (exclusionary rights) भी शामिल हैं। यह 1 जनवरी 1995 से यह लागू हुआ और विश्व व्यापार संगठन ((WTO) के सभी सदस्य देशों का इसे मानना अनिवार्य है।

बौद्धिक संपदा अधिकार वे अधिकार होते हैं जो किसी व्यक्ति/ एजेंसी को उनकी रचनात्मकता/ नवाचार के लिए दिए जाते हैं। ये अधिकार रचनाकार को उसके/ उसकी रचना के लिए निर्धारित समयावधि तक के लिए विशेष अधिकार प्रदान करते हैं। भारत में बौद्धिक संपदा का महत्व वैधानिक, प्रशासनिक और न्यायिक, सभी स्तरों पर है। अन्य बातों के साथ इस समझौते में, बौद्धिक संपदा अधिकार के व्यापार संबंधी पहलू (ट्रिप्स– TRIPS) पर भी एक समझौता है जो 1 जनवरी 1995 से लागू हुआ था। उन सदस्य देशों में जहां अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए विकृतियों एवं बाधायें हैं, के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों के कुशल एवं पर्याप्त संरक्षण को बढ़ावा देने की जरूरत है, में, बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण एवं उन्हें लागू करने के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित करता है। ट्रिप्स समझौते के तहत दायित्व सदस्य देशों के कानून प्रणाली एवं प्रथाओं के अधीन संरक्षण के न्यूनतम मानक के प्रावधानों से  संबंधित है।

यह समझौता बौद्धिक संपदा के निम्नलिखित क्षेत्रों में मानक और मानदंड प्रदान करता है–

• पेटेंट

• ट्रेड मार्क

• कॉपीराइट

• भौगोलिक संकेत

• औद्योगिक डिजाइन

कॉपीराइट और कॉपीराइट से संबंधित अधिकार :- साहित्यिक और कलात्‍मक कार्यों (जैसे पुस्‍तक और अन्‍य लेखन संगीत संकलन, चित्रकारी, मूर्तिकला, कम्‍प्‍यूटर प्रोग्राम और फिल्‍म) के लेखकों के अधिकारों को कॉपीराइट द्वारा संरक्षण दिया जाता है। संबंधित और इसके सन्निकट अधिकारों के लिए भी संरक्षण की गारंटी दी जाती है जैसे अभिनय (निष्‍पादन) का अधिकार (उदाहरण के लिए अभिनेता, गायक और संगीतकार), फोनोग्राम के निर्माता (ध्‍वनि रिकार्डिंग) और प्रसारण संगठन।

ट्रिप्स समझौता दायर करने की तारीख से न्यूनतम 20 वर्षों तक की संरक्षण अवधि प्रदान करता है।

भारत ने ट्रिप्स समझौते के अनुच्छेद 70.8 और 70.9 के तहत अपने दायित्वों को स्वीकार किया हुआ है।

पेटेंट से संबंधित अधिनियम

• पेटेंट अधिनियम, 1970

• पेटेंट (संशोधन) अधिनियम, 1999

• पेटेंट (संशोधन) अधिनियम, 2002

• पेटेंट (संशोधन) अधिनियम, 2005

पेटेंट से संबंधित नियम

• पेटेंट नियम 2003

• पेटेंट (संशोधन) नियम 2005

• पेटेंट (संशोधन) नियम 2006

ट्रेड मार्क

ट्रेड मार्क को इस प्रकार परिभाषित किया गया है– कोई भी निशान या निशानों का संयोजन जो एक उपक्रम की वस्तुओं या सेवाओं को दूसरे उपक्रमों की वस्तुओं या सेवाओं से अलग करने में सक्षम हो, ट्रेड मार्क कहलाता है। ऐसे विशेष निशान ट्रिप्स समझौते के प्रावधानों के तहत संरक्षणीय विषयवस्तु का गठन करते हैं। समझौते के अनुसार आरंभिक पंजीकरण और प्रत्येक पंजीकरण का नवीकरण 7 वर्ष से कम अवधि का नहीं हो सकता और पंजीकरण अनिश्चित काल के लिए परिवर्तनीय हो सकेगा। ट्रेड मार्क के लिए अनिवार्य लाइसेंस की अनुमति नहीं है।

ट्रेड मार्क से संबंधित अधिनियम

• ट्रेड मार्क अधिनियम

• ट्रेड मार्क अधिनियम, 1999

• ट्रेड मार्क अधिनियम के नए तत्व, 1999

कॉपीराइट

भारत का कॉपीराइट कानून भारतीय कॉपीराइट अधिनियम, 1957 में दिया गया है। इसमें कॉपीराइट (संशोधन) अधिनियम, 1999 द्वारा संशोधन किया गया और संशोधित अधिनियम में कॉपीराइट पर हुए बर्न कन्वेंशन, जिसका भारत भी एक सदस्य था, का प्रभाव दिखता है। इसके अलावा भारत फोनोग्राम्स उत्पादकों के अधिकारों के संरक्षण पर हुए जेनेवा कन्वेंशन और यूनिवर्सल कॉपीराइट कन्वेंशन का भी सदस्य है। भारत वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गेनाइजेशन (WIPO), जेनेवा और यूनेस्को का सक्रिए सदस्य भी है।

कॉपीराइट कानून में बदलती जरूरतों साथ तालमेल बनाए रखने के लिए समय के साथ बदलाव किया गया है। कॉपीराइट कानून में हाल में किया गया संशोधन जो मई 1995, से प्रभावी हुआ था, व्यापक बदलाव की शुरुआत थी और इसने कॉपीराइट कानून को सेटेलाइट प्रसारण, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और डिजिटल टेक्नोलॉजी में विकास के साथ शामिल कर दिया। संशोधित कानून में पहली बार रोम कन्वेंशन में की कई कल्पना के अनुसार प्रदर्शकों के अधिकारों की रक्षा का प्रावधान किया गया है।

कॉपीराइट को लागू करने को कारगर बनाने के लिए कई उपाय किए गए हैं। इनमें कॉपीराइट इन्फोर्समेंट एडवाइजरी काउंसिल की स्थापना, प्रवर्तन अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम और कॉपीराइट के उल्लंघन संबंधी मामलों के निपटान के लिए स्पेशल पॉलिसी सेल की स्थापना शामिल है।

कॉपीराइट से संबंधित अधिनियम

• कॉपीराइट (संशोधन) अधिनियम, 2012

• कॉपीराइट, अधिनियम, 1957

• कॉपीराइट नियम, 1958

• इंटरनेशनल कॉपीराइट ऑर्डर, 1999

• कॉपीराइट पाइरेसी इन इंडिया

• अधिनियम में संशोधन

भौगोलिक संकेत  

वस्‍तुओं के भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और सुरक्षा) अधिनियम,1999 में प्रदान कि‍या गया है कि भौगोलिक संकेत का अर्थ है एक ऐसा संकेत, जो वस्‍तुओं की पहचान, जैसे कृषि उत्‍पाद, प्राकृतिक वस्‍तुएं या विनिर्मित वस्‍तुएं, एक देश के राज्‍य क्षेत्र में उत्‍पन्‍न होने के आधार पर करता है, जहां उक्‍त वस्‍तुओं की दी गई गुणवत्ता, प्रतिष्‍ठा या अन्‍य कोई विशेषताएं इसके भौगोलिक उद्भव में अनिवार्यत:: योगदान देती हैं। दो प्रकार के भौगोलिक संकेत होते हैं (i) पहले प्रकार में वे भौगोलिक नाम हैं जो उत्‍पाद के उद्भव के स्‍थान का नाम बताते हैं जैसे शैम्‍पेन, दार्जीलिंग आदि। (ii) दूसरे हैं गैर-भौगोलिक पारम्‍परिक नाम, जो यह बताते हैं कि एक उत्‍पाद किसी एक क्षेत्र विशेष से संबद्ध है जैसे अल्‍फांसो, बासमती आदि।

वस्‍तुओं के भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और सुरक्षा) अधिनियम,1999 भारत में भौगोलिक संकेतों को अधिशासित करता है। इस अधिनियम के अंतर्गत वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय, औद्योगिक नीति एवं प्रवर्तन विभाग के अंतर्गत महानियंत्रक, पेटेंट, डिज़ाइन तथा ट्रेड मार्ग, ''भौगोलिक संकेतों के पंजीयक'' हैं। महानियंत्रक, पेटेंट, डिज़ाइन और ट्रेड मार्ग भौगोलिक संकेत रजिस्‍ट्री (जीआईआर) की कार्यशैली का निर्देशन और पर्यवेक्षण करता है।

औद्योगिक डिजाइन

औद्योगिक डिजाइन रचनात्मक गतिविधि है जो वस्तु की बनावट या औपचारिक उपस्थिति बताता है।  औद्योगिक डिजाइन बौद्धिक संपदा का एक तत्व है। ट्रिप्स समझौते के तहत, औद्योगिक डिजाइन के संरक्षण के न्यूनतम मानक प्रदान किए गए हैं। विकासशील देश के रूप में भारत ने इन न्यूनतम मानकों को देने के लिए अपने राष्ट्रीय कानून में संशोधन किया है।

डिजाइन कानून का अनिवार्य उद्देश्य इसे बढ़ावा देना और औद्योगिक उत्पादन के डिजाइन तत्व की रक्षा करना है। इसका प्रयोजन उद्योग के क्षेत्र में नवीन गतिविधियों को बढ़ावा देना है। न्यू डिजाइन एक्ट, 2000 भारत में औद्योगिक डिजाइन पर मौजूदा कानून मौजूद है और यह अधिनियम तकनीक और अंतरराष्ट्रीय विकासों में होने वाले तेजी बदलावों में अपने उद्देश्य को अच्छी तरह से पूरा करेगा। औद्योगिक डिजाइन के क्षेत्र में भी भारत को परिपक्व दर्जा प्राप्त है और अर्थव्यवस्था के वैश्वीकरण के दृष्टिकोण में वर्तमान कानून बदले तकनीकी और वाणिज्यिक परिदृश्य के अनुसार है एवं डिजाइन प्रशासन में अंतरराष्ट्रीय रुझानों के अनुरुप बनाया है।

निष्कर्षः

विश्व व्यापार संगठन के नई व्यवस्था से क्या भारत को लाभ होगा, यह चर्चा का विषय है, हम जानते हैं कि अलग– अलग वस्तुओं और सेवाओं का करीब 80% पेटेंट और कॉपीराइट का स्वामित्व विश्व के विकासशील देशों के पास है।

Hemant Singh is an academic writer with 7+ years of experience in research, teaching and content creation for competitive exams. He is a postgraduate in International
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