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Bhai Dooj 2022: जानें आखिर क्यों करते हैं भाई दूज को यमराज और यमुना की पूजा?

Bhai Dooj 2022: भाईदूज यानी भाई और बहन को समर्पित एक ऐसा त्यौहार जिसमें यमराज और यमुना की पूजा का प्रावधान भी है. क्या आप जानते हैं आखिर इस दिन क्यों की जाती है यमुना और यमराज की पूजा? तो आइये जानें इसका क्या कारण है.

Bhaidooj story 2022
Bhaidooj story 2022

Bhai Dooj 2022: दिवाली और गोवर्धन पूजा का त्यौहार होते ही अब घरों में भाईदूज के त्यौहार की हलचल भी शुरू हो चुकी है. दिवाली के बाद मनाया जाने वाला भाईदूज का त्यौहार भाई और बहन के प्रेम को समर्पित है. इस दिन बहने अपने भाइयों की लम्बी उम्र के लिए व्रत करती हैं. तिलक और बहनें आरती कर उन्हें मिठाई खिलाने के बाद ही अपना व्रत तोडती हैं.
और भाई भी अपनी बहनों को इस पर्व पर उपहार भेंट करते हैं. 

प्रति वर्ष भाई दूज का पर्व हिन्दू माह कार्तिक की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. हमारे देश में हर त्यौहार किसी न किसी कारण से मनाया जाता है जहाँ दीपावली के त्यौहार को मनाने के पीछे मान्यता है कि इस दिन प्रभु श्रीराम 14 वर्षों के लम्बे वनवास के बाद वापस आये थे उसी प्रकार भाईदूज के पर्व के पीछे भी 2 मान्यताएं है जिसमें एक यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी है जबकि दूसरी भगवान श्री कृष्णा और उनकी बहन सुभद्रा से सम्बन्धित है. आइये जानें इन दोनों मान्यताओं के बारे में -

यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी मान्यता
भाईदूज के दिन यमराज और उनकी बहन यमुना की पूजा करने का भी विशेष महत्व है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन जो भाई अपनी बहनों से तिलक करवाते हैं उन्हें यमराज परेशान नहीं करते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन यमराज कई वर्षों बाद अपनी बहन यमुना से मिलने आये थे और यमुना ने उन्हें तिलक किया था. साथ ही यमुना ने यमराज अपने यहाँ भोजन भी करवाया और उन्हें हर वर्ष इस दिन अपने यहाँ आने का निमंत्रण दिया. इसी कारण से भाई दूज के दिन यमराज और यमुना की पूजा की जाती है और इस दिन भाई-बहन यमुना में साथ में डुबकी लगाते हैं.  

भगवान श्रीकृष्ण और उनकी बहन सुभद्रा से जुड़ी मान्यता 
ये मान्यता भगवान श्री कृष्ण और उनकी बहन सुभद्रा से जुड़ी है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण नराकासुर राक्षस का वध करने के बाद वह अपनी बहन सुभद्रा से मिलने गए थे जिसके पश्चात् सुभद्रा ने भगवान के तिलक किया और भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें हमेशा रक्षा का वचन दिया जिसके पश्चात् भाईदूज मनाया जाने लगा.