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भारत में सही इंजीनियरिंग कॉलेज का चयन कैसे करें ?

Sep 1, 2016 14:51 IST
    How to select right Engineering Colleges
    How to select right Engineering Colleges

    देश में इंजीनियरिंग शिक्षा की बढ़ती मांग के कारण विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग शिक्षा के दावों के साथ बीते दशक में सैंकड़ों नए इंजीनियरिंग कॉलेज बने। इस बात को ध्यान में रखते हुए कि उम्मीदवार अक्सरहां कॉलेज के चयन के मामले में असमंजस की स्थिति में होते हैं.उच्च शिक्षा के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज का चयन करना उनके लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। एक इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लेने से पहले जिन बातों पर गौर करना चाहिए उसके बारे में बहुत कम छात्रों को ही पता होता है। निम्नलिखित चेक प्वाइंट्स के साथ छात्र बेहतर संस्थान में अपना दाखिला सुनिश्चित कर सकते हैं।

    1. संस्थान

    जीवन के कई बातों के लिए 'ओल्ड इज गोल्ड' अभी भी आदर्श बना हुआ है और यही बात इंजीनियरिंग कॉलेजों पर भी लागू होती है। सफलता के निश्चित राह के तौर पर इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों के प्रचार से प्रभावित होकर बीते दशक में सैंकड़ों नए इंजनीयिरंग कॉलेज बन गए हैं। इंजीनियरिंग कॉलेज की उम्र वहां दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता को बताए, यह जरूरी नहीं है लेकिन यह छात्रों को संस्थान के हर बीते वर्ष के संस्थान के आम प्रदर्शन को देखने का मौका जरूर देता है। इसलिए सही इंजीनियरिंग कॉलेज चुनने से पहले इंजीनियरिंग करने की इच्छा रखने वाले छात्रों को सबसे पहले इस बात पर गौर करना चाहिए कि कॉलेज किस वर्ष बना और समय के साथ कॉलेज के छात्रों का प्रदर्शन कैसा रहा है ?

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    2. प्रमाणन और संबद्धता

    जैसा कि उपर बताया गया है कि बीते दशक में देश में इंजीनियरिंग शिक्षा की बढ़ती मांग को देखते हुए कई नए इंजीनियरिंग कॉलेज कुकुरमुत्ते की तरह उग आए हैं। सभी इंजीनियरिंग संस्थानों के पास इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम कराने के लिए आवश्यक प्रमाणन और संबद्धता नहीं है। इसलिए भारत में किसी भी कॉलेज में दाखिला लेने से पहले छात्रों को यह जरूर सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उनके द्वारा चुने गए कॉलेज के पास उचित प्रमाणन और संबद्धता है या नहीं । इंजीनियरिंग संस्थानों को प्रमाणन एआईसीटीई (अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद) देता है जबकि विश्वविद्यालय से सबंधित इंजीनियरिंग प्रोग्राम्स यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) द्वारा अनुमोदित होते हैं। छात्रों की मुश्किल स्थितियों को देखते हुए एआईसीटीई और यूजीसी, दोनों ही ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर संबद्ध या प्रमाणन प्राप्त संस्थानों के बारे में जानकारी मुहैया कराई हुई है। इस बाबत गूगल पर एक क्लिक सही इंजीनियरिंग कॉलेज चुनने में आपकी काफी मदद कर सकता है।

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    3. प्रमाणपत्र

    एनएएसी ( राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद) और एनबीए (राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड) भारत की ऐसी एजेंसियां है जो संस्थानों को श्रेणीवार प्रमाणपत्र प्रदान करती है। उदाहरण के लिए आईआईटी और एनआईटी जैसे प्रमुख संस्थान ए/ए+ श्रेणी में आते हैं। यदि कोई संस्थान इस प्रकार के प्रमाणन की बात करता है तो इन एजेंसियों की आधिकारिक वेबसाइट से इसका जरूर पता लगाया जाना चाहिए। संबंधित कॉलेज द्वारा दी गई जानकारी की प्रमाणिकता की पुष्टि के साथ–साथ ये प्रमाणपत्र संस्थान द्वारा कराए जाने वाले इंजीनियरिंग प्रोग्राम की गुणवत्ता का प्रमाणपत्र भी होते हैं।

    4. प्रतिष्ठा

    किसी इंजीनियरिंग कॉलेग की प्रतिष्ठा लिंक्डइन, फेसबुक और ट्विटर आदि जैसे सोशल मीडिया चैनलों से जांचा जा सकता है। प्रतिष्ठा की जांच संस्थान के सोशल मीडिया पेज पर छात्रों और शिक्षकों द्वारा पोस्ट की गई टिप्पणियों द्वारा की जा सकती है। इसके अलावा माई जोश (My Josh) जैसे कई छात्र मंच भी हैं जो शिक्षा की गुणवत्ता, संस्थान में मिलने वाली सुविधाएं, शिक्षक और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर छात्रों और संस्थान के पूर्व छात्रों के बीच चर्चा करने का स्थान उपलब्ध कराते हैं। छात्रों को सलाह दी जाती है कि इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लेने से पहले उसकी प्रतिष्ठा के बारे में अच्छी तरह से पड़ताल कर लें।

    5. संकाय सदस्य

    वस्तुतः शिक्षक किसी भी शैक्षणिक संस्थान का दिल होते हैं और इंजीनियरिंग कॉलेजों के मामले में भी यह बहुत हद तक सही है। हालांकि अन्य सभी कारक भी बेहद महत्वपूर्ण हैं लेकिन इंजीनियरिंग संस्थानों के लिए संकाय सदस्यों से अधिक महत्वपूर्ण कुछ नहीं है । इसलिए संस्थान में पूर्ण कालिक संकाय सदस्यों की संख्या पता लगाना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि पूर्ण कालिक संकाय सदस्यों की संख्या कम हुई तो पाठ्यक्रम पूरा करने में बहुत परेशानी होगी। शिक्षण अनुभव, प्रोफेसर की डिग्री आदि के आधार पर शिक्षकों की गुणवत्ता की जांच भी जरूर की जानी चाहिए।

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    6. छात्र– शिक्षक अनुपात

    छात्र– शिक्षक अनुपात प्रति छात्र शिक्षकों की संख्या बताता है जैसे 15:1 बताता है कि प्रत्येक 15 छात्रों पर एक शिक्षक है। छात्र– शिक्षक अनुपात जितना कम होगा, संस्थान उतना ही बेहतर होगा।

    7. बैच स्ट्रेंथ

    यह कारक उपर उल्लिखित कारक से सीधे– सीधे जुड़ा हुआ है। वास्तव में यह खुद अपनी व्याख्या करता है। कक्षा में छात्रों की कम संख्या होगी तो शिक्षक या प्रोफेसर छात्र विशेष पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।

    8. बुनियादी ढांचा

    आजकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने की इच्छा रखने वाले छात्रों को आकर्षित करने के लिए निजी इंजीनियरिंग कॉलेज अपनी मार्केटिंग योजना में बुनियादी ढांचे का बढ़ा– चढ़ा कर प्रचार करते हैं। हालांकि, इस प्रकार के सभी प्रचार के बावजूद छात्रों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए की बुनियादी ढांचा खुबसूरत भवन से कहीं अधिक होता है। संकाय सदस्यों के जैसे बुनियादी ढांचा भी आपकी गुणवत्तापूर्ण इंजीनियरिंग शिक्षा को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इंजीनियरिंग कॉलेजों में बुनियादी ढांचागत सुविधाओं की जांच करते समय छात्रों को पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, स्थान, परिवहन, कक्षाओं आदि की उपलब्धता की जांच जरूर करनी चाहिए। उपलब्धता पर विचार करने के अलावा छात्रों को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि क्या ये सुविधाएं कुल संख्या या दाखिला दिए जाने वाले छात्रों की संख्या के लिए पर्याप्त है। बेहतर बुनियादी ढांचा सीखने का बेहतर अनुभव और सीखने के लिए उचित माहौल प्रदान करता है।

    9. पाठ्यक्रम


    संकाय सदस्य और बुनियादी ढांचा आपको अच्छी इंजीनियरिंग शिक्षा प्राप्त करने में मदद करने वाले उपकरण हैं लेकिन  क्या पढ़ाया जा रहा है और कैसे पढ़ाया जा रहा है, यह इंजीनियरिंग कॉलेज द्वारा अपनाए गए पाठ्यक्रम के आधार पर निर्धारित होता है। संबंधित विषय में छात्रों को प्रशिक्षत करने के लिए शैक्षणिक संस्थान विशेष द्वारा अपनाया जाने वाला शैक्षणिक पाठ्यक्रम और शिक्षण पद्धति का संयोजन होता है पाठ्यक्रम। यह बात सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक है। इसके अलावा कोर्स के पाठ्यक्रम की जांच करते समय छात्रों को इंजीनियरिंग कॉलेज में उपलब्ध प्रोग्राम्स, पाठ्यक्रमों और विशेषज्ञताओं की विविधता की भी जांच करनी चाहिए। अधिक संख्या में कोर्स की उपलब्धता का अर्थ है छात्रों को उनके पसंद के कोर्स करने की बेहतर सुविधा।

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    10. स्नातक की दर एवं अनुसंधान के अवसर

    स्नातक की दर का अर्थ है प्रत्येक वर्ष संस्थान विशेष से कितने छात्र हैं जो अपनी डिग्री पूरी करते हैं। अगर संख्या अधिक है तो इसका स्पष्ट अर्थ है कि संस्थान बेहतर शिक्षण सुविधाएं प्रदान कर रहा है। यदि संस्थान में अनुसंधान एवं विकास सुविधा उपलब्ध है तो इसे संस्थान द्वारा छात्र के नवाचार को समर्थन देना माना जा सकता है।

    11. टाई– अप्स/ विदेश में अध्ययन संबंधी कार्यक्रम/ इंटर्नशिप/ छात्रवृत्ति


    यह एक पैमाना है जो किसी इंजीनियरिंग कॉलेज की प्रतिष्ठा को स्वतः बढ़ा देता है। अच्छी खासी संख्या में विदेशी विश्वविद्यालयों से टाई–अप्स, कंपनी टाई–अप्स और स्टडी अब्रॉड प्रोग्राम छात्र के बेहतर प्रदर्शन को सुनिश्चित करता है जबकि इंटर्नशिप और छात्रवृत्तियां एक छात्र की बेहतर भागीदारी सुनिश्चित करता है। इस पैमाने की जांच भी दाखिले से पहले की जानी चाहिए।

    12. एल्युमनी नेटवर्क (पूर्व छात्रों का नेटवर्क)


    किसी भी इंजीनियरिंग कॉलेज की सफलता की सबसे बड़ी गवाही उसके पूर्व छात्रों का नेटवर्क– एल्युमनी नेटवर्क होता है। आपके द्वारा बनाई गई इंजनीयिरंग कॉलेजों की सूची में उन कॉलेजों के सफल पूर्व छात्रों को देख कर आपको संस्थान की खूबियों और खामियों का पता चल जाएगा। दूसरे शब्दों में, एल्युमनी नेटवर्क को संस्थान द्वारा प्राप्त उपलब्धियों के रूप में देखा जा सकता है। निजी, सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों में पूर्व छात्रों का महत्वपूर्ण पदों पर होना संस्थान की बेहतर शिक्षा एवं प्लेसमेंट सेवा का प्रतिनिधित्व करती हैं।

    13. प्लेसमेंट


    आखिर में छात्र इंजीनियिरंग को इसलिए चुनते हैं कि यह एक पेशेवर पाठ्यक्रम है जो निजी क्षेत्र के साथ– साथ सरकारी क्षेत्र में भी सम्मानजनक पदों पर रोजगार के उत्कृष्ट अवसर मुहैया कराता है और इंजीनियरिंग कॉलेज जॉब मार्केट में आपको पहला ब्रेक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए, दाखिला लेने से पहले किसी भी छात्र द्वारा प्लेसमेंट की जांच करना सबसे महत्वपूर्ण कारक बन जाता है। आमतौर पर प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज अपने आधिकारिक वेबसाइट्स पर बीते प्लेसमेंट सीजन के बारे में आंकड़े उपलब्ध कराते हैं। इसके अलावा jagranjosh.com जैसे लोकप्रिय शैक्षणिक पोर्टलों, समाचार और मीडिया चैनलों की वेबसाइटों से भी इंजीनियरिंग कॉलेजों की प्लेसमेंट संबंधी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। संस्थान द्वारा दिए गए प्लेसमेंट प्रोग्राम की प्रभावकारिता के बारे में पता लगाने के लिए छात्र संस्थान और उसके एल्युमनी के सोशल मीडिया पेज को भी चेक कर सकते हैं।

    अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।

    14. छात्रावास सुविधाएं


    अपने संभावित इंजीनियरिंग कॉलेज में अंतिम चीज जिसकी आपको जांच करनी है, वह है– छात्रावास की सुविधा। इस बात का ध्यान रखते हुए की इंजीनियरिंग कॉलेज में आपका दाखिला प्रवेश परीक्षा और उसके बाद होने वाले काउंसिलिंग सत्र में आपके प्रदर्शन के आधार पर होता है, जरूरी नहीं कि आपका दाखिला आपके घर के पास वाले कॉलेज में ही हो। इसलिए देश की इंजीनियरिंग शिक्षा में छात्रावास की सुविधा मुख्य भूमिका निभाती है। छात्रावास की सुविधा की जांच करने के अलावा छात्रों को छात्रावास में दी जाने वाली सुविधाओं की गुणवत्ता और वहां के आम माहौल की भी जांच करनी चाहिए। सही इंजीनियरिंग कॉलेज को चुनते समय आपको छात्रावास शुल्क पर भी ध्यान देना चाहिए।

    किसी भी संस्थान में दाखिला लेने से पहले छात्रों को उपर– उल्लिखित पैमानों की जरूर जांच करनी चाहिए।

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