बनें साइंटिस्ट और बनाएं अपनी एक अलग पहचान
इसरो द्वारा पिछले दिनों एक साथ 104 उपग्रह अंतरिक्ष में भेजने का विश्व रिकॉर्ड बनाने के बाद दुनिया भर में भारतीय वैज्ञानिकों की वाहवाही हो रही है। साइंस के स्टूडेंट्स अपनी खोजी प्रवृत्ति को बढ़ाकर वैज्ञानिक बनने की राह पर आगे बढ़ सकते हैं। नेशनल साइंस डे (28 फरवरी) पर विशेष आर्टिकल
इसरो के दो युवा वैज्ञानिक विकास अग्रवाल और अमन वहीद खान पर आज हर किसी को नाज है। इनमें एक किराने की दुकान चलाया करते थे, तो दूसरे अपने पिता की हत्या के सदमे से उबर रहे थे। फिर भी इन्होंने हिम्मत नहीं हारी और वैज्ञानिक बनने के अपने सपने को पूरा किया। अभी हाल में इसरो ने एक साथ जिन 104 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा है, उस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में ये दोनों युवा भी टीम का हिस्सा थे। विषम परिस्थितियों के बावजूद छत्तीसगढ़ के इन दोनों युवा वैज्ञानिकों ने साबित कर दिखाया कि अगर इरादे और हौसले बुलंद हों, तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, देश को विभिन्न क्षेत्रों में अभी करीब 90 लाख वैज्ञानिकों की जरूरत है। यदि आप भी ऐसी ही जिद रखते हैं और समाज, राष्ट्र हित में कुछ करना चाहते हैं, तो वैज्ञानिक बनकर इस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। आए दिन हो रहे अनुसंधानों, इसरो, डीआरडीओ आदि के अभियानों ने युवाओं के लिए इस क्षेत्र में आगे आने और पहचान बनाने की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।
बेहतरीन अवसर
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पिछले 8-10 सालों में विज्ञान की पढ़ाई को लेकर तस्वीर काफी बदली है। प्राइमरी और मिडल लेवल पर विज्ञान शिक्षण पर जोर दिया जा रहा है। बच्चे भी शोध की तरफ बढ़ रहे हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान में आगे आ रहे हैं। सरकार भी नए अनुसंधानों पर काफी खर्च कर रही है। वैज्ञानिक अनुसंधान में संभावनाएं बहुत हैं। दैनिक जीवन में भी इसका बहुत उपयोग है। हमारे आसपास बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं, जिनका समाधान हम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से ढूंढ़ सकते हैं। अपार संभावनाओं को देखते हुए अगर हम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में शोध कार्य करें, तो हमारा यह काम मानव कल्याण और समाज-राष्ट्र के हित में होगा। युवा पीसीएम और बॉयोलॉजी विषयों में मेहनत से पढ़ाई करके रक्षा क्षेत्र, अंतरिक्ष, परमाणु अनुसंधान, जैव प्रौद्योगिकी, बायो टेक्नोलॉजी, पृथ्वी विज्ञान, मौसम विज्ञान, पर्यावरण,कृषि और चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में वैज्ञानिक बन सकते हैं।
कैसे बनें साइंटिस्ट

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एक वैज्ञानिक की सोच आम लोगों की सोच से बिल्कुल अलग होती है। आम आदमी सिर्फ अपने बारे में सोचता है। अपनी जरूरतों को देखता है। लेकिन वैज्ञानिक सिर्फ अपने बारे में नहीं सोचता। उसमें अपना लक्ष्य प्राप्त करने की लगन होती है। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत करता है। नई खोज करता है। यदि आप भी वैज्ञानिक बनने के इच्छुक हैं, तो सबसे पहले अपना एक लक्ष्य बनाएं और उसे पूरा करने के लिए जी जान से जुट जाएं। यही वैज्ञानिक बनने की तरफ पहला कदम है। इसके अलावा, आप प्रारंभिक स्तर पर ही विज्ञान में रुचि लेना शुरू करें। विज्ञान विषयों की सैद्धांतिक के अलावा प्रयोग आधारित, क्रियाकलाप आधारित पढ़ाई करने पर अधिक जोर दें। कॉलेज-विश्वविद्यालय में अपनी रुचि के विषय में शोध करें। सीवी रमन, मेघनाथ साहा, हर गोविंद खुराना जैसी शख्सियतों के बारे में पढ़ें। उनका जीवन और शोधकार्य प्रेरक हो सकता है। कैसे विकट परिस्थितियों में जब देश में शोध की सुविधाएं नहीं थी, तब भी इन्होंने बड़े अनुसंधान किए। जब भारत गुलाम था, तब सीवी रमन को 1930 में नोबल पुरस्कार मिला। इनके जीवन और चुनौतियों से प्रेरणा लें। स्वास्थ्य जैसे जो भी चैलेंजिंग सेक्टर हैं, ज्वलंत समस्याएं हैं, उनके उपाय ढूंढ़ें।
चुनें पसंदीदा क्षेत्र
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अगर छात्र पीसीएम विषयों से पढ़ाई कर रहे हैं, तो वे आगे चलकर अंतरिक्ष, परमाणु अनुसंधान और भौतिकी विज्ञान की प्रयोगशालाओं में अनुसंधान कार्य कर सकते हैं। जो बॉयोलॉजी से हैं, वे जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा तथा सांख्यिकी के क्षेत्र में वैज्ञानिक बन सकते हैं। इसके लिए पहला काम यह करें कि जिस क्षेत्र में जाना चाहते हैं और यदि आरंभ से शोध में रुचि है, तो पहले अपने विज्ञान शिक्षक से इस बारे में बात करें और जो भी उपयुक्त क्षेत्र हैं, उसमें पढ़ाई के लिए संबंधित एकेडमिक संस्थानों में जाकर वह कोर्स करें।
शोध कार्यों में सरकारी मदद
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भारत सरकार की कई सरकारी योजनाएं हैं, जो शोध कार्य के लिए प्रोत्साहन देती हैं। ‘इंस्पायर’ ऐसी ही योजना है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विज्ञान विभाग पिछले 6 सालों से इस योजना के तहत शोधार्थियों को शोध के लिए स्कॉलरशिप दे रहा है। इसी तरह मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंस, परमाणु ऊर्जा
इसरो-डीआरडीओ में मौके

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भारत का राष्ट्रीय अंतरिक्ष संस्थान है, जिसका मुख्यालय बेंगलुरु में है। संस्थान का मुख्य कार्य भारत को अंतरिक्ष संबंधी तकनीक उपलब्ध करवाना है। अगर आप भी इसरो में जाना चाहते हैं, तो अंतरिक्ष विज्ञान, खगोल विज्ञान, एस्ट्रोफिजिक्स, एस्ट्रोनॉमी जैसे विषय पढ़कर वहां जा सकते हैं। इसरो प्रत्येक वर्ष इलेक्ट्रॉनिक, मैकेनिकल और कंप्यूटर साइंस में बीई/बीटेक डिग्रीधारक विद्यार्थियों, जिनकी आयु सीमा 35 वर्ष तक हो और जिन्होंने 65 प्रतिशत अंक हासिल किए हों, के लिए वैज्ञानिक/इंजीनियर की रिक्तियां निकालता है। प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से यहां वैज्ञानिक बन सकते हैं। इसी तरह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) रक्षा मंत्रालय के रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के अधीन काम करता है। डीआरडीओ रक्षा प्रणालियों के डिजाइन एवं विकास का कार्य करता है। यहां तीनों सेनाओं के लिए हथियार प्रणाली और उपकरणों का उत्पादन होता है। यहां भी वैज्ञानिक बनने के लिए इंजीनियरिंग की विभिन्न शाखाओं में बीई/बीटेक डिग्रीधारी युवाओं व विज्ञान स्नातक/परास्नातकों के लिए वैकेंसी निकलती है। अधिक जानकारी इन संस्थाओं की साइट से ले सकते हैं।
कृषि अनुसंधान
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भारत की एक बड़ी आबादी आज भी कृषि पर निर्भर है। भौगोलिक स्थितियां भी हर जगह की एक सी नहीं हैं। कहीं कृषि के लिए पानी नहीं है, तो कहीं की जमीनें दिनोंदिन अनुपजाऊ होती जा रही हैं। ऐसे में उत्पादकता बढ़ाने के लिए नए-नए बीज, कीट नाशक और नए कृषि यंत्रों के विकास के क्षेत्र में ढेरों संभावनाएं हैं। कृषि क्षेत्र के विषयों की पढ़ाई करके इस फील्ड में अच्छा करियर बना सकते हैं।
मौसम विज्ञान
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पर्यावरण प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याएं मौसम विज्ञान और पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण शोध कार्य हैं। भूकंप, चक्रवात, बाढ़, सूखा और हिमपात से हर साल हजारों लोग मर रहे हैं। इन समस्याओं से जुड़े अनुसंधान की तरफ बढ़ें और इनका समाधान ढूंढ़ें।विभाग, अंतरिक्ष विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, डीएसआइआर जैसे अन्य वैज्ञानिक विभाग भी अपने-अपने क्षेत्र में युवाओं को शोध कार्य के लिए आकर्षित कर रहे हैं। आप इनका लाभ उठाएं।
आयु सीमा
वैज्ञानिकों को लेकर हमारे मन में यह धारणा होती है कि जरूर ये लोग कोई खास पढ़ाई करते होंगे, तभी वैज्ञानिक बने हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। अगर विज्ञान के किसी विषय पर आपकी भी पकड़ है और अच्छे से पढ़ाई की है, तो आप भी वैज्ञानिक बन सकते हैं। बस, जरूरत है कि जिस भी विषय में बीएससी/एमएससी कर रहे हैं, उसी में शोध करें और किसी खास एरिया में अपना स्पेशलाइजेशन बनाएं। वैसे तो वैज्ञानिक बनने के लिए कोई आयु सीमा नहीं होती है। आप कभी भी किसी नई चीज का आविष्कार कर सकते हैं, लेकिन आमतौर पर वैज्ञानिक शोध कार्यों के लिए कम उम्र के लोगों को ही लिया जाता है। इसके लिए 20 से 35-40 साल तक उम्र होनी चाहिए।
सैलरी पैकेज
वैज्ञानिक ग्रुप ए श्रेणी के एंप्लॉई होते हैं। किसी भी नए वैज्ञानिक को शुरू में 40 से 60 हजार रुपये तक सैलरी आसानी से मिल जाती है। ऐसे लोग शुरुआत में किसी प्रोजेक्ट में सीनियर वैज्ञानिकों की टीम का हिस्सा होते हैं। लेकिन जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है, इनका प्रमोशन होता रहता है और सैलरी भी बढ़ती रहती है।
(भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत कार्यरत संगठन विज्ञान प्रसार में वैज्ञानिक मनीष मोहन गोरे से बातचीत पर आधारित)
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