UP Board कक्षा 10 विज्ञान चेप्टर नोट्स :पौधों और जन्तुओं में नियंत्रण और समन्वयन, पार्ट-III

Nov 28, 2017, 10:52 IST

यहाँ हम आपको UP Board कक्षा 10 वीं विज्ञान अध्याय 19; पौधों और जन्तुओं में नियंत्रण और समन्वयन (control and coordination in plants and animal) के 3rd पार्ट का स्टडी नोट्स यहाँ उपलब्ध है| यहाँ शोर्ट नोट्स उपलब्ध करने का एक मात्र उद्देश्य छात्रों को पूर्ण रूप से चैप्टर के सभी बिन्दुओं को आसान तरीके से समझाना है| इसलिए इस नोट्स में सभी टॉपिक को बड़े ही सरल तरीके से समझाया गया है और साथ ही साथ सभी टॉपिक के मुख्य बिन्दुओं पर समान रूप से प्रकाश डाला गया है|

UP Board class 10th Science notes
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UP Board कक्षा 10 विज्ञान के 19th चैप्टर : पौधों और जन्तुओं में नियंत्रण और समन्वयन (control and coordination in plants and animal) के 3rd पार्ट का स्टडी नोट्स यहाँ उपलब्ध है| हम इस चैप्टर नोट्स में जिन टॉपिक्स को कवर कर रहें हैं उसे काफी सरल तरीके से समझाने की कोशिश की गई है और जहाँ भी उदाहरण की आवश्यकता है वहाँ उदहारण के साथ टॉपिक को परिभाषित किया गया है| इस लेख में हम जिन टॉपिक को कवर कर रहे हैं वह यहाँ अंकित हैं:

पीयूष ग्रन्थि (Pituitary glands) :

यह ग्रन्थि अग्रमस्तिष्क के पश्च अधर तल से लगी होती हैं। इससे स्त्रावित अधिकांश हार्मोन्स अन्य अन्त: स्त्रावी ग्रन्थियों के स्त्रावण को नियन्त्रित करते है इसी कारण इसे मास्टर ग्रन्थि (master gland) कहते हैं। इस ग्रन्थि के तीन भाग होते हैं-

(1) अग्रपिण्ड,

(2) मध्यपिण्ड,

(3) पश्च पिण्ड|

1. अग्रपिण्ड से स्त्रावित हॉर्मोन्स तथा उनके कार्य (Adenohypophysis and their Function) :

(i) वृद्धिहार्मोन (Growth Hormone = GH) : यह शरीर की उचित वृद्धि के लिए आवश्यक

हाँर्मोन हैं। यह प्रोटीन संश्लेषण को बढावा देता है और ऊतकों के क्षय को रोकता है । हड्डियों तथा पेशियों की वृद्धि के लिए आवश्यक है। 18 वर्ष की आयु से पूर्व इसकी अधिकता से शरीर आनुपातिक भीमकाय (gaint) हो जाता है तथा अल्प-स्त्रावण से व्यक्ति बौना (dwarf or midget) रह जाता हैं। सक्रिय वृद्धिकाल के बाद (18 वर्ष के बाद) इसकी उचित मात्रा शरीर के उचित तथा नियमित चलते रहने (कमजोरी न होने देने) में सहायक हैं। वृद्धि पूर्ण होने के पश्चात् वृद्धि हार्मोन्स के अतिस्त्रावण से शरीर बेडौल, भीमकाय तथा कुरूप हो जाता हैं (इस उम्र में हड्डीयों की लम्बाई में वृद्धि सम्भव नहीं है हड्डियों की मोटाई बढ़ जाने से शरीर कुरूप हो जाता हैं) । इस रोग को अग्रातिकायता (acromegaly) कहते हैं। कभी - कभी कशेरुक दण्ड के झुक जाने से कृबड़ापन (hunchback) भी हो जाता हैं और वयस्क अवस्था में हाँर्मोन की कमी से मिक्सीडीमा (myxoedema) के लक्षण प्रदर्शित होते हैं!

(ii) थाइरोट्रापिन या थाइराइड प्रेरक हार्मोन (Thyrotropin or Thyroid Stimulating Hormone = TSH) : थाइराइड ग्रन्थि (thyroid gland) को उचित मात्रा में थायरॉक्सिन (thyroxin) हार्मोन स्त्रावित करने के लिए प्रेरित करता हैं।

(iii) ऐड्रोनोकॉर्टिकोट्रॉपिन (Adrenocorticotropin = ACTH) : यह अधिवृक्क ग्रन्थियों (adrenal glands) के वल्कुट भाग (cortical part) को हाँर्मोन स्त्रावण के लिए प्रेरित करता है।

(iv) पुटिका प्रेरक हार्मोन (Follicle Stimulating Hormone = FSH) : पुरुषों में शुक्रज़नन (spermatogenesis) तथा स्त्रियों में अण्डजनन (oogenesis) को प्रेरित करता है।

(v) ल्यूटीनाइजिंग हार्मोन (Luteinizing Hormone=LH) - यह अण्डाशय में पुटिका के फटने के बाद बने कापर्स ल्यूटियम (corpus luteum) की क्रिया पर नियन्त्रण रखता है। पुरुषों मे, यह हार्मोन वृश्नो से अन्तराली कोशिकाओं (interstitial cells) को हॉर्मोन स्त्रावण के लिए प्रेरित करता है|

(vi) प्रोलैकटिन 'या मैंमोट्रॉपिकं हॉर्मोंन (Prolactin or Mammotropic Hormone = PLH or MTH) - यह गर्भकाल में स्तनों की वृद्धि तथा दुग्ध स्त्रावण को प्रेरित करता हैं।

2. मध्यपिण्ड तथा उससे उत्पन्न होने वाले हॉर्मोन (Intermediate lobe and its Hormones = PLH or MTH)

इस भाग से इंटररमेडीन (intermedine) हार्मोन निकलता हैं। मनुष्य में मध्य पिण्ड अविकसित होता है।

3. पश्च पिण्ड तथा इससे उत्पन्न होने वाले हॉर्मोंन्स (Neurohpophysis and its Hormones)

(i) वैसोप्रेसिन या प्रतिमूत्रक्र 'हाँर्मोन (Vasopressin or Antidiuretic Hormone = ADH ) - यह हार्मोन, वृक्क नलिकाओं (uriniferous tubules) में जल - अवशोषण क्षमता को बढाता है। ADH की कमी से मूत्र की मात्रा बहुत अधिक बढ़ जाती है इस रोग को उद्कमेह (diabetes insipedus) कहते हैं।

(ii) आक्सीटोसिन या पिटोसिन (Oxytocin or Pitocin) - बच्चे के जन्म से पूर्व गर्भाशय पेशियों में संकुचन उत्पन्न कर प्रसव पीड़ा उत्पन्न करता है। यह दुग्ध स्त्रावित होने को भी प्रभावित करता।

उत्तर: हार्मोन तथा एन्जाइम में अन्तर -  विस्तृत उत्तरीय प्रश्न 6 के अन्तर्गत देखिए|

मनुष्य में पाई जाने वाली वाहिकाविहीन ग्रन्थियाँ तथा इनके कार्य(Ductless glands of Human ad its Functions) :

क्र. सं.

अन्त: स्त्रावी ग्रन्थि का नाम तथा स्थिति

हार्मोन्स तथा उनके प्रभाव

1.

 

 

 

 

2.

 

 

 

 

 

3.

 

4.

 

 

 

थाइराइड (thyroid) गर्दन में वायुनाल के अग्र भाग में, द्विपालित सबसे बड़ी अन्त: स्त्रावी ग्रन्थि है|

 

 

 

पैराथाइराइड (Parathyroid) थाइराइड के पश्च तल में धँसी हुई दो जोड़ा गुलाबी रंग की ग्रन्थियाँ है|

 

 

 

 

अधिवृक्क (adrenal) वृक्को के अग्र सिरों पर टोपी के समान, संयुक्त ग्रन्थि है| दो भाग – कार्टेक्स (cortex) तथा मेद्युला (medulla) होते हैं|

 

 

अग्नाशय (pancreas) एक मिश्रित ग्रन्थि है| इसका अन्त: स्त्रावी भाग लैंगरहैंस की द्विपिकाएँ (islets of Langerhans) होती हैं|

थायराक्सिन (thyroxin) तथा अन्य; वृद्धि प्रेरक, उपापचय की दर, आक्सीजन खपत, हृदय स्पन्दन दर का नियमन|

 

पैराथामोर्न (parathormone); पेशियों की क्रियाशीलता, हड्डियों तथा दाँतो के बनने का नियमन, रुधिर स्कन्दन का नियमन|

कार्टेक्स के प्रमुख हार्मोन्स है- कार्टिसोन (cortisone) कार्तिकोस्तेरान (corticosterone), एंड्रोजेन्स, एस्ट्रोजेंस आदि लिंग हार्मोन्स (sex hormones), भोजन के उपापचय, जल, खनिज आदि का संतुलन, रुधिर दाब का नियमन, पेशियों तथा जननांगो का उचित विकास तथा नर लक्षणों को प्रेरित करना| अधिवृक्क मेडयुला से ऐड्रीनलिन (एपिनेफ्रीन) (adrenaline) तथा नार- ऐड्रीनलिन (नारएपिनेफ्रिन) स्त्रावित होता है| ये वसा के विघटन, रुधिर दाब आदि का नियमन करते है और संकट के समय शरीर को सुरक्षा हेतु तैयार करते है|

इन्सुलिन तथा ग्लुकैगान (insulin and glucagon); कार्बोहाइड्रेट्स का उपापचय; जैसे – रुधिर में शर्करा का नियमन करते हैं|

 

 बहि:स्त्रावी (बाह्यस्त्रावी) एवं अन्त:स्त्रावी ग्रन्थियों में अन्तर(Differences between Exocrine and Endocrine glands) :

क्र.सं.

बहि:स्त्रावी ग्रन्थि

(Exocrine gland)

अन्त:स्त्रावी ग्रन्थि

(Endocrine gland)

1.

 

2.

 

3.

 

4.

ये सम्बन्धित एपिथीलियमी स्तरों से सँकरी नलिकाओं द्वारा जुडी रहती है|

स्त्रावित पदार्थों को नलिकाओं द्वारा अंग विशेष में पहुँचाती हैं|

इन्हें न्लिकायुक्त (ducted glands) ग्रन्थियाँ भी कहते हैं|

ग्रन्थियों से विभिन्न पदार्थ स्त्रावित होते हैं|

ये सम्बन्धित एपिथिलियम से जुडी नहीं रहतीं|

 

स्त्रावित पदार्थों को रक्त के मध्यम से वितरित करती है|

 

 

इन्हें न्लिकाविहीन (ductless) ग्रन्थियाँ कहते हैं|

ग्रन्थियों से हार्मोन्स स्त्रावित होते हैं|

 मुख्य अन्त: स्त्रावी ग्रन्थियाँ (Main Endocrine glands) :

1. थाइराइड ग्रन्थि (Thyroid gland)

2. पैराथाइराइड ग्रन्थि (Parathyroid gland)

3. पियूष ग्रन्थि (Pituitary gland)

4. अधिवृक्क ग्रन्थि (Adrenal gland)

5. अग्न्याशय ग्रन्थि (Pancreas)

6. जनन अंग (Gonads) आदि|

UP Board कक्षा 10 विज्ञान चेप्टर नोट्स : जीवन की प्रक्रियाएँ, पार्ट-VII

UP Board कक्षा 10 विज्ञान चेप्टर नोट्स : जीवन की प्रक्रियाएँ, पार्ट-VIII

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