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पेशेवर जोड़ों के लिए क्यों अधिक मायने रखती है बच्चों की परवरिश ?

Dec 21, 2017 11:56 IST
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Why Parenting Goals matter for Working Couples?
Why Parenting Goals matter for Working Couples?

खासकर जब आप काम कर रहे हैं, बच्चों की परवरिश आपके लिए घर पर दूसरी पूर्णकालिक नौकरी ही है. जब बच्चे बढ़ते हैं, तो उनका जीवन चक्र भी बढ़ता है और वे धीरे-धीरे नई चीजें सीखना शुरू करते हैं. इस प्रक्रिया में वे अच्छे और बुरे दोनों तरह की चीजें सीखते हैं. इसीलिए  माता-पिता के रूप में उनके साथ घनिष्ठ संबंध बनाना महत्वपूर्ण है. उनके व्यवहार से अवगुणों को  दूर रखने के लिए बच्चों से दैनिक रूप से बात करें. उन्हें सही दिशा प्रदान करना, उनके साथ मिलना, उन्हें स्कूल की परियोजनाओं में मदद करना, सप्ताह के लिए भोजन योजना तैयार करना ताकि वे हर दिन एक ही प्रकार के खाने को भोजन में लेने से ऊबे नहीं और उन्हें जीवन के नए तरीकों से मुखातिब करवाना आदि इन सभी कार्यो को करने के लिए समय और धैर्य की आवश्यक्ता होती है.

इतने कम समय में ऐसा करने के लिए, माता-पिता के लिए  लक्ष्यों को एक समय-सीमा में बांधने की आवश्यक्ता बन गई है. सभी माता-पिता अपने बच्चों को दूसरों के बीच बेहद अच्छी तरह से प्रदर्शन करते देखना चाहते हैं .2018 को अपने बच्चों के लिए एक विशेष वर्ष बनाने के लिए अपने परवरिश के लक्ष्यों को कुछ इस तरह निर्धारित करें.

1. अपने बच्चे के साथ दैनिक संवाद करें

हमेशा अपने बच्चों को एक मंच प्रदान करें, जिसमें वे कभी भी आपके साथ किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने से हिचक महसूस ना करें. भले ही यह बलात्कार की खबर हो या उसके मित्र द्वारा सेक्स के बारे में साझा एक तथ्य हो, आप अपने बच्चो को खुल कर सच्चे तथ्य बताएं और कभी भी गुमराह न करें या उन्हें अनदेखा न करें. बच्चों का दिमाग  जिज्ञासा से भरा हुआ है, यदि आप सही जानकारी नहीं साझा करेंगे, तो उन्हें तथ्यों को जानने के लिए कुछ अन्य स्रोत मिलेगा और वो स्रोत गलत जानकारी भी प्रदान कर सकता है.

पूरे दिन  उनके साथ जुड़े रहें और यह चीज मोबाइल ने संभव बना दिया है. उनके साथ कहानियां साझा करें और उन्हें उनकी समस्याओं को ले कर सहज महसूस करवाएं.

2.  कुछ शौक से सम्बंधित कक्षाओं में उनका नामांकन करवाएं

अपने बच्चे के लिए एक आकर्षक भविष्य की योजना बनाने का सबसे अच्छा तरीका उन्हें शौक की कक्षाओं में भर्ती करना है. यहाँ पर वे दोस्त बनाने और एक स्वस्थ ग्रुप बनाने का हुनर सीखेंगे. बच्चे अपने उम्र के अन्य बच्चो के प्रदर्शन से भी बहुत कुछ सीखते हैं. वह नाच, गायन, पेंटिंग, या मार्शल आर्ट आदि चीजो से बहुत सारे चीजे सीख सकते हैं और यह उन्हें स्मार्टफोन या  टेलीविजन देखने में अपनी ऊर्जा बर्बाद करने से भी बचाएगा.

अपने व्यस्त कार्य शेड्यूल से कुछ समय निकालें और अपने आस-पास के शौक कक्षाओं का पता करें.आप इन  दिनों शौक से सम्बंधित शिक्षक भी घर पर ट्यूशन प्रदान करते हैं लेकिन यह थोड़ा महंगा विकल्प है.  

3. शिक्षकों के साथ रिश्ते बना कर रखें

आपको अपने बच्चे के शिक्षक के साथ अच्छे सम्बन्ध रखने चाहिए. शिक्षक केवल एकमात्र स्रोत हैं जो आपको आपके बच्चे के सामाजिक व्यवहार और प्रदर्शन के बारे में सही जानकारी देंगे. अकादमिक प्रदर्शन और अतिरिक्त पाठयक्रम की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी, आज के समय का मुख्य आधार है. शिक्षक के साथ न सिर्फ 'माता-पिता-शिक्षक बैठक' में वक़्त दे  बल्कि 'शून्य घंटे' के दौरान अगर विद्यालय इसके लिए अनुमति देता है तो सीधे शिक्षक के साथ वार्तालाप भी करें.

4. बच्चों को स्वतंत्र बनने के लिए प्रोत्साहित करें.

बच्चों के जीवन को स्वतंत्र बनाने के लिए अपने दायरे से बाहर निकलना बहुत जरूरी है. आप बच्चे को प्रोत्साहित करें कि वह अपने सीमित दायरे से बाहर सोचने की कोशिश करे. लेकिन यह आप संभल कर करें,इसलिए अपने बच्चे पर नज़र रखें और यदि आवश्यक हो तो उनकी मदद करें. कुछ कुछ कार्यो में आप उन्हें पूरी तरह से अपने दम पर छोड़ सकते हैं जैसे  अगर आपका बच्चा घर पर जन्मदिन की पार्टी का आयोजन करना चाहता है, तो उन्हें भोजन योजना तैयार करने, मेहमानों की सूची का आयोजन करने और सजावट और चीजों के लिए आवश्यक वस्तुओं की एक सूची बनाने के लिए कहें. वे जिम्मेदारी लेना सीखेंगे और आत्मविश्वास महसूस करेंगे. इस बीच उन्हें नए कौशल सिखाना जरूरी है जो उन्हें बेहतर तरीके से पार्टी का आयोजन करने में मदद करें.बच्चों को कार्य सौंपने और उन्हें जिम्मेदारियों को सौंपने से उन्हें स्वतंत्रता और उत्तरदायित्व का बोध होगा.शिक्षाविदों की देखभाल करते समय वे घर का प्रबंधन करने में आपकी सहायता करने वाले हाथ होंगे.

5. अपने सामाजिक ग्रुप में रुचि लें

जब आपके बच्चे बताते हैं कि उनका मित्र 10 साल की उम्र में बाइक चलाना सीख रहा है, तो इस बात को नज़रअंदाज़ न करें या न ही उसे डांटें. उनकी सभी कहानियों और नयी बातो में वास्तव में दिलचस्पी लें. अपने घर पर अपने बच्चों के दोस्तों को आमंत्रित करें और उनके साथ संबंध विकसित करें. यदि संभव हो तो सुनिश्चित करें कि आप अपने बच्चे के प्रत्येक दोस्त को नाम से जानते हैं.

उन्हें कभी भी कुछ दोस्तों से अलग होने के लिए मजबूर न करें.ऐसा करने से आपका बच्चा उन लोगों के साथ मिलना जारी रखने के लिए नकारात्मक रूप से प्रेरित होगा.

अगर आपकी जानकारी में कुछ ऐसे लोग हैं जो नौकरी के साथ बच्चों की परवरिश में संघर्ष कर रहे हैं,तो इस लेख को उनके साथ साझा करें. वे अवश्य ही इसके लिए आपको धन्यवाद देंगे.

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