विश्व आर्थिक मंच 2012 सम्मेलन स्विटजरलैंड के दावोस शहर में संपन्न हुआ. विश्व आर्थिक मंच 2012 सम्मेलन पांच दिवसीय था और यह 25 जनवरी से 29 जनवरी 2012 तक चला. 42वें विश्व आर्थिक मंच सम्मेलन का विषय था - द ग्रेट ट्रांस्फॉर्मेशन: शेपिंग न्यू मॉडल्स (The Great Transformation: Shaping New Models, बड़ा बदलाव: नए रूपों को आकार देना).
विश्व आर्थिक मंच (WEF: World Economic Forum, डब्ल्यूईएफ) की सालाना बैठक में पांच दिनों के दौरान वैश्विक आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मसलों पर सैकड़ों चर्चाएं हुईं. इस बैठक में 100 से अधिक देशों के लगभग 2,600 नीति नियंताओं और सैकड़ों कंपनियों के प्रतिनिधि ने हिस्सा लिया.
जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल ने उद्घाटन भाषण दिया. भारत की ओर से वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा, वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, योजना राज्यमंत्री अश्विनी कुमार तथा सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री सचिन पायलट ने हिस्सा लिया. भारतीय उद्योग जगत से योगी देवेश्वर, आदि गोदरेज, अजित गुलाबचंद, सुनील मित्तल और अजीम प्रेमजी शामिल थे. प्रतिभागियों में लगभग 40 देशों के शासनाध्यक्ष, संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) प्रमुख क्रिस्टीन लागार्दे, विश्व बैंक के प्रमुख रॉबर्ट जोएलिक, अमेरिकी वित्त मंत्री टिमोथी गीथनर और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख युकिया अमानो शामिल थे. चर्चा का समापन सिटी ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विक्रम पंडित, यूनीलिवर के पाल पोलमैन, शेल के प्रमुख पीटर वोजर तथा फेसबुक की मुख्य परिचालन अधिकारी शेरिल सैंडबर्ग ने किया.
विश्व आर्थिक मंच के सम्मेलन में उद्यमियों ने रोजगार, आर्थिक विषमता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को 2012 की सबसे बड़ी चुनौती बताया. यूरोपीय संघ की सरकारों के ऋण संकट और विश्व बाजार पर उसके असर को भी बड़ी चुनौती बताया गया और इस समस्या से जल्द निपटने को सुझाव दिए गए. पांच दिन चले चर्चा में एशिया की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं - भारत और चीन के प्रदर्शन को सराहा गया.
ज्ञातव्य हो कि विश्व आर्थिक मंच (WEF: World Economic Forum, डब्ल्यूईएफ) जिनेवा स्थित एक गैर सरकारी संगठन है.
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