सिंगापुर के पूर्व विदेश मंत्री जॉर्ज इयो 30 मई 2015 को नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में चुने गए. उनकी यह नियुक्ति नोबेल प्राप्तकर्ता अमर्त्य सेन द्वारा उम्मीदवारी वापिस लिए जाने के बाद की गयी.
बिहार के राजगीर नामक स्थान पर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में जॉर्ज इयो अंतरराष्ट्रीय सलाहकार समिति के अध्यक्ष भी हैं. अमृत्य सेन 18 जुलाई तक इस पद पर बने रहेंगे.
जॉर्ज इयो सिंगापुर में 23 वर्ष तक मंत्री पद पर रहे हैं. पांच मई को नालंदा विश्वविदायलय की गवर्निंग बोर्ड की बैठक में जॉर्ज इयो का नाम कुलपति के लिए रूप में भारत सरकार के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया जिसे तुरंत मंजूरी दे दी गयी.
वर्ष 2012 में इयो को पद्म भूषण से नवाजा गया था.
सितंबर 2014 से राजगीर के अस्थाई कैंपस में नालंदा विश्वविद्यालय में पढ़ाई चल रही है. इसका अपना भवन अभी नहीं बना है लेकिन राज्य सरकार द्वारा इसे 445 एकड़ भूमि दी गयी है.
नालंदा विश्वविद्यालय
नालंदा विश्वविद्यालय को पुन: अस्तित्व में लाने करने का विचार वर्ष 2005 में तत्कालीन राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम द्वारा रखा गया था. यह विश्वविद्यालय बिहार में स्थित प्राचीन स्थल के अवशेषों पर उसी नाम से बनाया जा रहा है तथा पूर्व-एशिया सम्मेलन के कई सदस्य देश इस परियोजना में शामिल हैं.
सरकार ने फिलीपीन्स में जनवरी, 2007 में दूसरे पूर्व एशिया सम्मेलन और बाद में थाइलैंड में चौथे पूर्व एशिया सम्मेलन में नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए किए गए निर्णयों को लागू करने के लिए नालंदा विश्वविद्यालय अधिनियम, 2010 बनाया गया.
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