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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानः शिक्षण, शोध और मरीजों की देखभाल का संस्थान

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) उच्च शिक्षा के स्वायत्त सार्वजनिक चिकित्सा महाविद्यालयों का समूह है। इन संस्थानों को संसद के अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया है। एम्स, नई दिल्ली प्रमुख उत्कृष्ट संस्थान है। इसकी स्थापना 1956 में हुई थी। देश में फिलहाल 7 एम्स काम कर रहे हैं और आगामी वर्षों में 7 और एम्स बनाया जाना प्रस्तावित है।
Jul 8, 2016 15:06 IST
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) उच्च शिक्षा के स्वायत्त सार्वजनिक चिकित्सा महाविद्यालयों का समूह है। इन संस्थानों को संसद के अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया है। एम्स, नई दिल्ली प्रमुख उत्कृष्ट संस्थान है। इसकी स्थापना 1956 में हुई थी। देश में फिलहाल 7 एम्स काम कर रहे हैं और आगामी वर्षों में 7 और एम्स बनाया जाना प्रस्तावित है।

एम्स के उद्देश्य (Objectives of AIIMS)

• अपनी सभी शाखाओं में स्नातक एवं स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा में शिक्षण पैटर्न विकसित करना ताकि भारत में सभी चिकित्सा महाविद्यालयों और अन्य संबद्ध संस्थानों में चिकित्सा शिक्षा के उच्च मानक प्रदर्शित कर सकें।

• स्वास्थ्य गतिविधि की सभी महत्वपूर्ण शाखाओं में कर्मियों के प्रशिक्षण के लिए एक ही स्थान पर सर्वोच्च क्रम के शैक्षणिक सुविधाएं जुटाना।

• चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में स्नातकोत्तर करने में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना।

एम्स के कार्य (Functions of AIIMS):

• चिकित्सा एवं जैविक विज्ञान में स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षण।

• नर्सिंग और दंत चिकित्सा शिक्षा।

• शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार।

• देश के लिए चिकित्सा शिक्षक तैयार करना।

• चिकित्सा और संबद्ध विज्ञान में अनुसंधान।

• स्वास्थ्य देखभालः निवारक, प्रोत्साहक और उपचारात्मक; प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक।

• समुदाय आधारित शिक्षण और अनुसंधान।

एम्स की संगठनात्मक संरचना (Organizational Structure of AIIMS):

Jagranjosh

एम्स के स्पेशियलिटी केंद्र:

I. कार्डियो– थोरैकिक साइंसेस सेंटर

II. सेंटर फॉर डेंटल एजुकेशन एंड रिसर्च

III. न्यूरोसाइंसेस सेंटर

IV. डॉ. आर. पी. सेंटर फॉर ऑप्थैल्मिक साइंसेस

V. डॉ. बी.आर.ए. इंस्टीट्यूट– रोटरी कैंसर हॉस्पिटल

VI. नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर

VII. जय प्रकाश नरायण अपेक्स ट्रॉमा सेंटर

मुख्य सुविधाएं: (Main Facilities)

I. बी.बी. दीक्षित पुस्तकालय

II. शव प्रशिक्षण एवं अनुसंधान सुविधा

III. केंद्रीय पशु सुविधा

IV. कंप्यूटर सुविधा

V. केंद्रीय कार्यशाला

VI. ईएचएस ( परिवार चिकित्सा विभाग)

VII. इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप सुविधा

VIII. के.एल. विग सीमेट (सीएमईटी)

IX. चिकित्सा सामाजिक एवं कल्याण सेवा

X. राष्ट्रीय विष सूचना केंद्र

XI. ऑर्गन रिट्रीवल बैंकिंग ऑर्गेनाइजेशन

XII. पेटेंट प्रकोष्ठ

XIII. स्टेम सेल सुविधा

XIV. टेलीमेडिसिन सुविधा

XV. परिवहन सुविधा

XVI. चिकित्सा समाज कल्याण इकाई (मुख्य अस्पताल)

XVII. इंजीनियरिंग सेवाएं

केंद्रीय सुविधाओं का स्पष्टीकरणः

इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप सुविधाः इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप (ईएम) प्रयोगशाला की स्थापना 1971 में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के शरीर–रचना विज्ञान (Anatomy) विभाग में हुई थी। प्रयोगशाला के महत्वपूर्ण योगदान और शरीर– रचना विज्ञान के आस–पास के क्षेत्रों में वैज्ञानिक शोधकर्ताओँ द्वारा अत्यधिक संरचनात्मक खोज की जरूरत को स्वीकारते हुए भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने एम्स में 1983 में क्षेत्रीय इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप सुविधा की स्थापना अपने आरएसआईसी/ एसआईएफ कार्यक्रम के तहत की थी। यह केंद्र फिलहाल परिष्कृत विश्लेषणात्मक उपकरण सुविधा (Sophisticated Analytical Instrument Facility (SAIF)) के रूप में जाना जाता है।

पेटेंट प्रकोष्ठ (Patent Cell)

पेटेंट प्रकोष्ट की स्थापना एम्स में काम करने वाले अन्वेषकों द्वारा प्रसंस्कऱण एवं पेटेंट दाखिल करने की सुविधा प्रदान करने के लिए किया गया है।

वैसे अन्वेषक जो अपनी खोज को पेटेंट कराना चाहते हैं, उन्हें इन्वेंशन डिस्क्लोजर फॉर्मेट में विवरण भरना होगा। इस फॉर्मेट को वे एम्स की वेबसाइट (www.aiims.ac.in) से डाउनलोड कर सकते हैं।

पेटेंट भरने के लिए अन्वेषकों के पेटेंट अटॉर्नी से मिलने से पहले आवेदनों की व्यवहार्यता की जांच पेटेंट प्रकोष्ठ के सदस्यों और विशेषज्ञों वाली एक समिति करेगी ।

निर्धारित प्रारूप में आवेदन की दस प्रतियां श्री ई. लाकरा, सदस्य– सचिव, पेटेंट प्रकोष्ठ को जमा किया जाना चाहिए।

नोटः पेटेंट का अनुरोध भेजने से पहले, अन्वेषकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी खोज पेटेंट के लिए योग्य होने हेतु निम्नलिखित तीन शर्तों को पूरा करता हैः

• नवीनता

• अविष्कारक कदम

• उपयोग

स्टेम सेल सुविधा (Stem Cell Facility)

एम्स में मूल, पूर्व– नैदानिक और नैदानिक स्तरों पर स्टेम सेल जीवविज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान आरंभ करने के उद्देश्य से स्टेम सेल सुविधा की शुरुआत 2005 में की गई थी। इसे डीबीटी बतौर सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर स्टेम सेल रिसर्च समर्थन देता है औऱ हाल ही में इसे वर्तमान अच्छा विनिर्माण प्रथाओं (current Good Manufacturing Practices (cGMP)) की एक इकाई के साथ नवीनीकृत किया गया है। इस cGMP इकाई का उद्घाटन माननीय भूतपूर्व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने 21 अगस्त 2014 को किया था।

टेलीमेडिसिन सुविधा (Telemedicine Facility)

स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में टेलीमेडिसिन एक उभरा हुआ क्षेत्र है। यह चिकित्सा विज्ञान के साथ सूचना तकनीक के सहक्रियाशील मेल से बनता है और इसमें ग्रामीण एवं सूदूर इलाकों में स्वास्थ्य सेवा सम्बन्धी चुनौतियों का सामना करने की जबरदस्त क्षमता है। यह बहुत सरल हो सकता है। ठीक वैसे ही जैसे कि दो स्वास्थ्य पेशेवर एक मरीज की चिकित्सा संबंधी समस्या के बारे में चर्चा करें और साधारण से फोन पर नैदानिक जानकारी का इलेक्ट्रॉनिक चिकित्सा रिकॉर्ड, नैदानिक जांच जैसे ई.सी.जी., रेडियोलॉजिकल तस्वीरें आदि जैसी जटिल स्थिति पर परामर्थ लें और आईटी आधारित हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर, ब्रॉडबैंड दूरसंचार का प्रयोग करने वाले वीडिय– कॉन्फ्रेंस की मदद से वास्तविक समय वाले आकर्षक चिकित्सा वीडियो कॉन्फ्रेस करें।

पढ़ाये जाने वाले पाठ्यक्रम (Courses Offered)-

I. न्यूरोसर्जरी

II. रीढ़ की हड्डी (Neurosurgery)

III. अस्थि विज्ञान

IV. सामान्य शल्य चिकित्सा (Orthopedics)

V. ईएमटी

VI. प्रसूति विज्ञान  (Gynecology)

VII. इंटरवेंशनल जीआई इंडोस्कोपिक

VIII. डाइजेस्टिव एंड कोलोरेक्टल

IX. आपातकालीन चिकित्सा

X. अनेस्थिसियोलॉजी

XI. प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव माइक्रोसर्जरी

XII. ब्रेकीअल–प्लेक्सस (Brachial-Plexus)