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उदारीकरण से पहले भारत की पंचवर्षीय योजनाएं

भारत में नियोजित आर्थिक विकास, पहली पंचवर्षीय योजना की स्थापना के साथ 1951 में शुरू हुआ था | पहली पंचवर्षीय योजना का मुख्य उद्देश्य देश में कृषि की हालत को सुधारना था क्योंकि कृषि पूरी अर्थव्यस्था का आधार है | दूसरी पंचवर्षीय योजना (महालनोबिस मॉडल पर आधारित) औद्योगिक विकास के लिए समर्पित थी | सन 1980 की अवधि तक भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 3.5% के आसपास थी (जिसे प्रोफेसर राज्कृष्णा द्वारा हिंदू विकास दर का नाम दिया गया था गया था) |
Mar 18, 2016 18:14 IST
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भारत में नियोजित आर्थिक विकास, पहली पंचवर्षीय योजना की स्थापना के साथ 1951 में शुरू हुआ था | पहली पंचवर्षीय योजना का मुख्य उद्देश्य देश में कृषि की हालत को सुधारना था क्योंकि कृषि पूरी अर्थव्यस्था का आधार है | दूसरी पंचवर्षीय योजना (महालनोबिस मॉडल पर आधारित) औद्योगिक विकास के लिए समर्पित थी | सन 1980 की अवधि तक भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 3.5% के आसपास थी (जिसे प्रोफेसर राज्कृष्णा द्वारा हिंदू विकास दर का नाम दिया गया था गया था) |

प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-1956)-

प्रथम भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 8 दिसंबर,1951 को भारत की संसद में पहली पंचवर्षीय योजना प्रस्तुत की थी | यह योजना हैरड़ -डोमर मॉडल पर आधारित थी। योजना में, मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र को ध्यान में रखा  गया था I इसमें बांधों और सिंचाई के क्षेत्र में निवेश पर ज्यादा ध्यान दिया गया था । कृषि क्षेत्र पर सबसे ज्यादा बिपरीत प्रभाव भारत के विभाजन सेपड़ा ।  पहली योजना में INR 2,069 करोड़ रुपये का कुल योजना बजट सात व्यापक क्षेत्रों को आवंटित किया गया था: सिंचाई और ऊर्जा (27.2 प्रतिशत), कृषि और सामुदायिक विकास (17.4 प्रतिशत), परिवहन और संचार (24 प्रतिशत), उद्योग (8.4 प्रतिशत), सामाजिक सेवाएँ (16.64 प्रतिशत), भूमि पुनर्वास (4.1 प्रतिशत), और अन्य क्षेत्रों और सेवाओं  के लिए ( 2.5 प्रतिशत )।

सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के विकास का लक्ष्य 2.1% वार्षिक था,  जबकि हासिल की गई विकास दर 3.6% थी। इस योजना में कुल घरेलू उत्पाद 15% बढ़ गया।  अच्छे मानसून के कारण  अपेक्षाकृत उच्च फसल की पैदावार हुई, मुद्रा भंडार तथा प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हुई, (जो 8% बढ़ी थी) | जनसँख्या वृद्धि की दर, प्रति व्यक्ति आय से अधिक की थी, जिसके कारण देश में नकारात्मक माहौल पैदा हुआ |  साथ ही कई सिंचाई परियोजनाएं  जिसमें भाखड़ा बांध और हीराकुंड बांध भी शामिल हैं इस अवधि के दौरान शुरू किए गए थे।

दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956-1961)

दूसरी पंचवर्षीय योजना, उद्योग पर केंद्रित थी, विशेष रूप से भारी उद्योगों पर। पहली योजना के विपरीत जोकि मुख्यतः कृषि पर केन्द्रित थी, दूसरी योजना में औद्योगिक उत्पादों के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित किया गया, (विशेष रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के विकास में) | दूसरी पंचवर्षीय योजना ने  महालनोबिस मॉडल का अनुसरण किया I इस आर्थिक विकास के मॉडल को भारतीय सांख्यिकीविद् प्रशांत चंद्र महालनोबिस ने 1953 में विकसित किया था | इस योजना में उत्पादक के साधनों को अनुकूलतम तरीके से आवंटित करने पर बल दिया गया था ताकि विकास को लम्बी अवधी तक बनाये रखा जा सके | इस  योजना ने भारत को एक बंद अर्थव्यवस्था के रूप में बढ़ावा दिया था जिसका मुख्य लक्ष्य आयातों की सहायता से देश के विकास को बढ़ाना था | इस अवधी में पनबिजली परियोजनाओं और भिलाई, दुर्गापुर तथा राउरकेला में पांच स्टील मिलों की स्थापना की गई। कोयला उत्पादन की वृद्धि हुई । अधिक रेलवे लाइनों को उत्तर पूर्व से जोड़ा गया।

सन 1958 में परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना की गई और इसके पहले अध्यक्ष होमी जहांगीर भाभा चुने गए |  टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (TIFR) को एक शोध संस्थान के रूप में स्थापित किया गया था। सन् 1957 में एक प्रतिभा खोज छात्रवृत्ति कार्यक्रम की शुरुआत की गई जिससे बच्चों को परमाणु उर्जा के कार्यक्रम में प्रशिक्षित किया जाए | इस योजना में लक्ष्य विकास-4.5% और वास्तव में हासिल विकास दर हासिल :। 4.0%

Jagranjosh

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उदारीकरण के बाद की पंचवर्षीय योजनायें

तीसरी पंचवर्षीय योजना (1961-1966)

तीसरी योजना में कृषि और गेहूं के उत्पादन में सुधार पर जोर दिया गया, लेकिन 1962 के भारत-चीन युद्ध ने अर्थव्यवस्था में कमजोरी को उजागर किया और सरकार का ध्यान रक्षा उद्योग या भारतीय सेना की ओर स्थानांतरित कर दिया। 1965-1966 में भारत का एक युद्ध [भारत-पाक] पाकिस्तान के साथ हुआ । इस के कारण 1965 में गंभीर सूखा पड़ गया | इस युद्ध के कारण देश में मुद्रा स्फीति की स्थिती पैदा हो गई और सरकार का ध्यान अब मूल्य स्थिरीकरण की ओरहो गया | बांधों का निर्माण जारी रहा । कई सीमेंट और उर्वरक संयंत्रों को भी बनाया गया था। ।  पंजाब में गेहूं का प्रचुर मात्रा में उत्पादन होना शुरू हो गया|  विकास लक्ष्य : 5.6%, वास्तविक विकास : 2.4%

चौथी पंचवर्षीय योजना (1969-1974)

इस समय इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं । इंदिरा गांधी सरकार ने 14 प्रमुख भारतीय बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया तथा भारत में पहली हरित क्रांति से कृषि उत्पादन में काफी बृद्धि हुई । इसके अलावा, पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में स्थिति भयानक हो रही थी क्योंकि 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम ने औद्योगिक विकास के लिए निर्धारित की गई धन राशि को युद्ध के खर्चों की तरफ मोड़ दिया | अमेरिका द्वारा बंगाल की खाड़ी में सातवें बेड़े की तैनाती पर भारत ने 1974 में समाइलिंग बुद्धा के नाम से भूमिगत परमाणु परिक्षण कर प्रतिक्रिया दी | इन बेड़ों से भारत को पश्चिमी पाकिस्तान पर हमला करने और युद्ध को विस्तार देने के खिलाफ सचेत करने के लिए तैनात किया गया था । विकास दर लक्ष्य 5.7% वास्तविक विकास दर 3.3%

पांचवीं पंचवर्षीय योजना (1974-1979)-

इस योजना में रोजगार, गरीबी उन्मूलन, और न्याय पर जोर दिया गया ।  इस योजना में कृषि उत्पादन और रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया। 1978 में नव निर्वाचित मोरारजी देसाई की सरकार ने इस योजना को खारिज कर दिया। विद्युत आपूर्ति अधिनियम को 1975 में अधिनियमित किया गया, जिसने  केन्द्र सरकार को बिजली उत्पादन और पारेषण में प्रवेश करने का अधिकार दिया ।

विकास दर लक्ष्य: 4.4% वास्तविक विकास दर: 5.0

छठी पंचवर्षीय योजना (1980-1985)

छठी योजना ने भी आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत को चिन्हित किया । मूल्य नियंत्रण को  समाप्त कर दिया गया था और राशन की दुकानों को बंद कर दिया गया था। इसके कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों तथा जीवन यापन की लागत में वृद्धि हो गई |  यह नेहरूवादी समाजवाद का अंत था और इस अवधि के दौरान इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं ।

जनसंख्या को बढ़ने से रोकने के लिए परिवार नियोजन का विस्तार भी किया गया था।

विकास दर लक्ष्य 5.2% वास्तविक विकास दर 5.4%

सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985-1990)

सातवीं योजना ने कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने की वापसी को चिह्नित किया । इस योजना ने  प्रौद्योगिकी की उन्नत्ति करके उद्योगों की उत्पादकता के स्तर में सुधार लाने पर जोर दिया।

7 वीं पंचवर्षीय योजनाओं का मुख्य उद्देश्य आर्थिक उत्पादकता, खाद्यान्न के उत्पादन और रोजगार सृजन के क्षेत्र में विकास को स्थापित करने के लिए था ।

छठी पंचवर्षीय योजना के परिणामस्वरुप, कृषि के क्षेत्र में लगातार वृद्धि, मुद्रास्फीति की दर पर नियंत्रण, और अनुकूल भुगतान संतुलन प्राप्त हुआ है जिसने सातवें पंचवर्षीय योजना के आगे के आर्थिक विकास के लिए एक मज़बूत आधार प्रदान किया | विकास दर लक्ष्य 5.0% वास्तविक विकास दर  5.7%