भारतीय पाषाण युग का संक्षिप्त विवरण

पाषाण युग के रूप में उस युग को परिभाषित किया गया है जब प्रागैतिहासिक मनुष्य अपने प्रयोजनों के लिए पत्थरों का उपयोग करते थे| इस युग को तीन भाग पुरापाषाण युग, मध्य पाषाण युग और नवपाषाण युग में बांटा गया है| यहाँ हम भारतीय पाषाण युग का संक्षिप्त विवरण दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

डेनिश विद्वान क्रिस्टियन जे. थॉमसन ने 19 वीं सदी में मानव अतीत के अध्ययन के क्रम में तकनीकी ढांचे के आधार पर सर्वप्रथम 'पाषाण युग' शब्द का प्रयोग किया| पाषाण युग के रूप में उस युग को परिभाषित किया गया है जब प्रागैतिहासिक मनुष्य अपने प्रयोजनों के लिए पत्थरों का उपयोग करते थे| इस युग को तीन भाग पुरापाषाण युग, मध्य पाषाण युग और नवपाषाण युग में बांटा गया है|

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यहाँ हम भारतीय पाषाण युग का संक्षिप्त विवरण दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

पुरापाषाण काल (10000 ई.पू. तक)

1. इसकी शुरूआत प्रतिनूतन युग (2000000 ई.पू. से 11000 ई.पू.) में हुई|  
2. भारत में सर्वप्रथम पुरापाषाण कालीन चट्टान की खोज रॉबर्ट ब्रूस फूटी ने 1863 में की थी|
3. भारत में पुरापाषाण अनुसंधान को 1935 में “डेटेरा और पैटरसन” के नेतृत्व में “येले कैम्ब्रिज अभियान” के आने के बाद बढ़ावा मिला है|
4. इस काल में अधिकांश उपकरण कठोर “क्वार्टजाइट” से बनाए जाते थे और इसलिए इस काल के लोगों को “क्वार्टजाइट मैन” भी कहा जाता है|
5. इस काल के लोग मुख्यतः “शिकारी” एवं “खाद्य संग्राहक” थे|
6. प्रारंभिक या निम्न पुरापाषाण काल का संबंध मुख्यतः हिम युग से है और इस काल के प्रमुख औजार हस्त-कुठार (hand-axe), विदारनी (cleaner) और कुल्हाड़ी (chopper) थे|
7. मध्य पुरापाषाण काल की प्रमुख विशेषता शल्क (flakes) से बने औजार हैं| इस काल के प्रमुख उपकरण ब्लेड, पॉइंट और स्क्रैपर थे|
8. उच्च पुरापाषाण काल में होमो सेपियन्स और नए चकमक पत्थर की उपस्थिति के निशान मिलते हैं| इसके अलावा छोटी मूर्तियों और कला एवं रीति-रिवाजों को दर्शाती अनेक कलाकृतियों की व्यापक उपस्थिति के निशान मिलते हैं| इस काल के प्रमुख औजार हड्डियों से निर्मित औजार, सुई, मछली पकड़ने के उपकरण, हारपून, ब्लेड और खुदाई वाले उपकरण थे|

मध्यपाषाण काल (10000- 4000 ई.पू.)

1. यह पुरापाषाण काल और नवपाषाण काल के बीच का काल है|
2. इस काल की मुख्य विशेषता “माइक्रोलिथ” (लघु पाषाण उपकरण) है|
3. “माइक्रोलिथ” (लघु पाषाण उपकरण) की खोज सर्वप्रथम कार्लाइल द्वारा 1867 में विंध्य क्षेत्र में की गई थी|
4. इस युग को “माइक्रोलिथक युग” के नाम से भी जाना जाता है|
5. इस काल के मनुष्यों का मुख्य पेशा शिकार करना, मछली पकड़ना और खाद्य-संग्रह करना था|
6. इस काल में पशुपालन की शुरूआत हुई थी जिसके प्रारंभिक निशान मध्य प्रदेश और राजस्थान से मिले हैं|

नवपाषाण काल (4000 ई.पू. से 1800 ई.पू. )

1. नवपाषाण कालीन उपकरण और औजारों की खोज 1860 में उत्तर प्रदेश में “ली मेसुरियर” द्वारा की गई थी|
2. “नवपाषाण” शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम “सर जॉन ल्यूबक” ने अपनी पुस्तक "प्रागैतिहासिक थीम्स" में की थी जो पहली बार 1865 में प्रकाशित हुआ था|
3. वी गार्डन चाइल्ड पहले व्यक्ति थे जिन्होंने “नवपाषाणकालीन ताम्रपाषाण युग” को आत्मनिर्भर खाद्य अर्थव्यवस्था के रूप में परिभाषित किया था|
4. नवपाषाण संस्कृति की प्रमुख विशेषता कृषि-कार्यों की शुरूआत, पशुपालन, पत्थरों के चिकने औजार और मिट्टी के बर्तनों का निर्माण है|

ऐसा माना जाता है कि पृथ्वी पर सर्वप्रथम “प्लेस्टोसिन” युग में मानव का उद्भव “ऑस्ट्रेलोपिथिक्स” या “साउदर्न पीपल” (सर्वप्रथम अफ्रीका में) के रूप में हुआ था| महाराष्ट्र के “बोरी” नामक स्थान से प्राप्त साक्ष्य से पता चलता है कि भारत में मनुष्य का उद्भव “प्लेस्टोसिन” युग के दौरान हुआ था|

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