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भारत पर तैमूर का आक्रमण

तैमूर के एक पैर में जख्म हो गया था जिसके कारण वह लंगड़ा कर चलने को मजबूर था। यही वजह थी कि तैमूर को तैमूर लंग का खिताब दिया गया और दुनिया में वह इसी नाम से जाना गया। तैमूर मध्य एशिया का एक आक्रामक योद्धा था जिसने विश्व प्रसिद्ध विजेता बनने का ख्वाब देखा था। विदेशी भूमि को हड़पना और फिर उसे अपने शासन के अधीन कर लेना अब तैमूर का जुनून होता जा रहा था। यही जुनून अफगानिस्तान, फारस, सीरिया, कुर्दिस्तान, तुर्किस्तान और एशिया माइनर के क्षेत्रों पर उसके जीत की वजह बना।
Nov 3, 2015 17:09 IST
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मध्य एशियाई देशों पर जीत हासिल करने के बाद उसने सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारत पर नजरें गड़ाईं। भारत में वह दिल से लूट– पाट करना चाहता था।

उसकी ज्वलंत इच्छा इसलिए भी उसे भारत ले आई क्योंकि इस अवधि में भारत कमजोर शासकों के अधीन था और यहां पूर्ण राजनीतिक अराजकता एवं लोगों के बीच असंतोष फैला था।

ऐसा, फिरोज शाह तुगलक की मौत की वजह से हो रहा था। इसलिए यह समय भारत में तैमूर के आने के लिये सबसे अच्छा समय था।

ऐतिहासिक कालक्रम में यह बहुत स्पष्ट लिखा है कि तैमूर भी भारत में काफिर हिन्दुओं को उनके पापों के शुद्धिकरण के नाम पर इस्लाम धर्म अपनाने और गाजी का खिताब हासिल करने के इरादे से भारत आया था। इसके अलावा, उसके भारत आने का मकसद चंगेज खान के सपनों को भी पूरा करना था।

तैमूर अपनी सेना के साथ भारत में दाखिल हुआ और साल 1398 में दिल्ली पहुंचा।

उसने देश में खूब लूट– पाट की। क्रूर नरसंहार, लूटपाट और महिलाओं का अपमान इस हद तक पहुंच गया कि लोगों ने अपनी बेटियों एवं बहनों का विवाह बहुत कम उम्र में ही करने का फैसला कर लिया था।

इतिहास यह भी बताता है कि पूरे एक वर्ष तक भारत आतंक और गरीबी की चपेट में था क्योंकि यहां के लोगों का धन सेना ने छीन लिया था। यहां अराजकता और रक्तपात अपने चरम पर था। पूरा देश पूरी तरह से बर्बाद कर दिया गया था। तथ्यों के अनुसार इस युद्ध में एक लाख से अधिक भारतीयों को मार डाला गया था।

तैमूर का आक्रमण एक शैतानी दिमाग, जो कभी चैन से नहीं रहता था, की करतूत के सिवा कुछ नहीं था। उसकी नासमझी भरे जुनून और गलत मनोविज्ञान का नतीजा दीर्धकालिक असफलता रही। परिस्थितियों को सामान्य होने में काफी वक्त लग गया।

तैमूर ने सिर्फ संपत्ति लूटने के लिए सैंकड़ों खूबसूरत इमारतों और मंदिरों को नष्ट कर दिया। तैमूर के आक्रमण के बाद, भारत लगभग अपनी पूरी संपत्ति गंवा चुका था और आर्थिक आपदा के चरम पर था। उसकी सेना ने खड़ी फसलों को रौंद डाला और तैयार फसलों को जला दिया। खुले आसमान के नीचे पड़े शव और विनाश ने बीमारियों को बढाया और भोजन की कमी पैदा कर दी। इस आक्रमण का प्रभाव इतना अधिक था कि कोई भी अन्य तुगलक शासक अपनी शक्ति न तो फिर से हासिल कर सका और न ही गद्दी पर दुबारा बैठ सका। देश पूरी तरह से टूटने की कगार पर था।

इस घटना ने बाबर को भारत पर आक्रमण करने का निमंत्रण दे दिया जिसके बाद मुगल वंश की स्थापना हुई।