भारत का गौरवशाली और समृद्ध इतिहास रहा है। इस इतिहास में यहां के ऐतिहासिक किले भी रहे हैं, जिन्होंने राजा-महाराजाओं के दौर से लेकर बदलते भारत की तस्वीर देखी है। इस कड़ी में भारत में एक ऐसा किला भी है, जिसे कुंवारा किला भी कहा जाता है। कौन-सा है यह किला और किले को क्यों दिया गया है यह नाम, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
क्या है कुंवारा किला से मतलब
कुंवारा किला (Kunwara Qila) वह किला है, जिसे कभी कोई जीत नहीं पाया या फिर जिसमें कोई शासक लंबे समय तक टिक नहीं पाया, इसलिए इसे "कुंवारा" (अविवाहित) यानी अकेला और अधूरा कहा जाता है।
कौन-सा है कुंवारा किला
अब सवाल है कि आखिर किस किले को कुंवारा किला कहा जाता है, तो आपको बता दें कि असीरगढ़ किले को कुंवारा किला कहा जाता है।
किस राज्य में है कुंवारा किला
भारत का यह ऐतिहासिक कुंवारा किला मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में स्थित है। इसे ही अक्सर "कुंवारा किला" कहा जाता है।
किले को 'कुंवारा किला' क्यों कहा जाता है
इतिहास उठाकर देखें, तो कोई भी बादशाह इस किले को पूरी तरह जीत नहीं पाया। जिन राजाओं ने इस किले को जीतने का प्रयास किया, वह किले के सामने अधिक समय तक नहीं टिक सका। ऐसे में यह किला अपने आप में बहुत शक्तिशाली, सुरक्षित और रहस्यमयी माना जाता था। इसे जीतने की कोशिशें कई बार की गईं, लेकिन यह कभी भी स्थायी रूप से किसी एक के अधीन नहीं रहा।
असीरगढ़ किले से जुड़ी खास बातें
-असीरगढ़ किले का निर्माण 15वीं शताब्दी में असद खान ने कराया था।
-यह सतपुड़ा की पहाड़ियों पर स्थित है, इसलिए इसका स्थान रणनीतिक रूप से बहुत महत्त्वपूर्ण है।
-किले को मुगल सम्राट अकबर ने भी जीतने की कोशिश की थी और 8 महीने की घेराबंदी के बाद ही इसे हासिल कर पाया।
दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार
असीरगढ़ किले को दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस किले के बाद से दक्षिण भारत पर शासन करने के रास्ते खुल जाते थे।
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