केंद्रीय मंत्रियों को बंगले कैसे अलॉट किए जाते हैं?

आपने केंद्रीय मंत्रियों के बड़े-बड़े बंगले देखे होंगे। साथ ही बंगलों के बाहर भारी सुरक्षा भी देखी होगी। लेकिन, क्या आपको पता है कि केंद्रीय मंत्रियों को आखिर कैसे घर आवंटित होता है। साथ ही यदि एक बार आवंटित हो जाए, तो खाली करने की प्रक्रिया क्या होती है। आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं.
How are Union Ministers allotted Bungalows?
How are Union Ministers allotted Bungalows?

आपने नई दिल्ली इलाके में केंद्रीय मंत्रियों के बड़े बंगले देखे होंगे, जिसमें केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे मंत्री रहते हैं। लेकिन, क्या आपको पता है कि इन बंगलों को कौन आवंटित करता है। साथ ही इनकी देखरेख किसके हाथ में होती है। यदि नहीं मालूम है, तो आपक बता देते हैं कि भारत सरकार की पूरे देश में स्थित सभी आवासीय संपत्तियों को संभालने और आवंटित करने की जिम्मेदारी संपदा निदेशालय के पास होती है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत संपदा निदेशालय (DoE) को पूर्व मंत्रियों के कार्यकाल के दौरान आवंटित किए गए बंगले खाली कराने की भी जिम्मेदारी होती है। 

 

साल की शुरुआत में पूर्व शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का 27 सफदरजंग रोड बंगला नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को आवंटित किया गया था। सांसद चिराग पासवान को उनके दिवंगत पिता रामविलास पासवान को अलॉट किया गया बंगला 12 जनपथ और पूर्व केन्द्रीय मंत्री पीसी सारंगी से 10 पंडित पंत मार्ग पर स्थित बंगला भी खाली करवाया गया था. 

हाउसिंग पूल, जनरल पूल रेजिडेंशियल एकोमोडेशन (GPRA) एक्ट के बारे में

DoE को भारत सरकार की संपादाओं का प्रशासन और प्रबंधन करना अनिवार्य है, जिसमें देश भर में सरकारी आवासीय आवास और अन्य संपत्तियां शामिल हैं. केंद्र सरकार के बंगलों का आवंटन जनरल पूल रेजिडेंशियल एकोमोडेशन (GPRA) एक्ट के तहत किया जाता है. गौरतलब है कि केंद्र सरकार के सभी कर्मचारी GPRA पूल के तहत आवास के लिए आवेदन करने के पात्र हैं. आवंटन आवेदक पे स्केल, कार्यालय या उसकी पोजीशन के अनुसार किया जाता है.

दिल्ली में DoE के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत और दिल्ली के बाहर 39 स्थानों पर केंद्र सरकार के सभी आवासीय आवास  GPRA के अंतर्गत आते हैं.

केंद्रीय मंत्रियों की सेवा के लिए, आवास DoE द्वारा आवंटित किया जाता है, जबकि लोकसभा और राज्यसभा सचिवालयों की गृह समितियां भी सांसदों को आवंटन की प्रक्रिया से गुजरती हैं. DoE के नियमों के अनुसार, टाइप VIII बंगले, सेवारत मंत्रियों और कभी-कभी राज्यसभा के सांसदों को आवंटित किए जाते हैं, जब हाउस पैनल उन्हें मंजूरी देता है.

 

 अब, निष्कासन प्रक्रिया की बारे में अध्ययन करते हैं. इस प्रकार के बंगले में सात कमरे और घरेलू सहायकों के लिए अलग से क्वार्टर बने होते हैं. 

 

आइये अब जानते हैं खाली करने के प्रोसेस के बारे में.

खाली करने की प्रक्रिया  

यह सिविल प्रक्रिया है, जिसके द्वारा एक मकान मालिक कानूनी रूप से एक किरायेदार को उनकी किराये की संपत्ति से हटा सकता है. वहीं सरकारी बंगलों को सरकारी स्थान (अप्राधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम, के तहत खाली कराया जाता है. 

निर्धारित अवधि के भीतर आवास खाली करने में विफलता के परिणामस्वरूप आवंटन को रद्द कर दिया जाता है और दंडात्मक परिणाम जैसे कि नुकसान का शुल्क और बेदखली की कार्यवाही होती है. आमतौर पर, रहने वालों को कारण बताओ नोटिस मिलने के 30 दिनों के भीतर अपना परिसर खाली करने के लिए कहा जाता है.

सुनवाई तय होने के बाद मामले की सुनवाई डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एस्टेट्स (इंक्वायरी) करते हैं. अपील रद्द करने के आदेश की तिथि से 30 दिनों के भीतर आवंटी द्वारा अपील की जा सकती है. यदि अपील प्राधिकारी द्वारा अपील को खारिज कर दिया जाता है, तो मामले को बेदखली प्रक्रिया शुरू करने के लिए मुकदमेबाजी अनुभाग को भेज दिया जाता है.

 

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