भारत में मुगल काल का सबसे बड़ा किला कौन-सा है, यहां जानें
भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो यहां अलग-अलग समय पर अलग-अलग सल्तनत का राज रहा। इस कड़ी में भारत में मुगलों का भी शासन रहा, जिन्होंने करीब 300 सालों तक भारत पर राज किया। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि मुगल काल का सबसे बड़ा किला कौन-सा है, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
भारतीय इतिहास में महत्त्वपूर्ण शासनकाल में मुगलों के शासनकाल का भी जिक्र मिलता है। मुगलों ने भारत में करीब 300 सालों तक राज किया और इस दौरान कई महत्त्वपूर्ण इमारतों का निर्माण करवाया।
ये इमारतें न सिर्फ मुगलों की सैन्य रणनीति की प्रतीक मानी जाती हैं, बल्कि अद्भुत वास्तुकला के मिश्रण की झलक भी दर्शाती हैं। आपने मुगलों की अलग-अलग इमारतों के बारे में पढ़ा और सुना होगा।
साथ ही, कुछ स्थलों पर विजिट भी किया होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि मुगल काल का सबसे बड़ा किला कौन-सा है, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
भारत में कब हुई मुगल काल की शुरुआत
भारत में मुगल काल की शुरुआत 1526 ईस्वी में हुई थी। यह तब हुआ था, जब पानीपत की पहली लड़ाई में दिल्ली सल्तनत के अंतिम शासक इब्राहिम लोधी और चंगेज खान के वंशज जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर के बीच युद्ध लड़ा गया था। इस युद्ध में बाबर ने अपनी सैन्य रणनीति का परिचय देते हुए लोधी की सेना को पराजित कर दिया था। युद्ध में लोधी की मृत्यु हुई, जिसके बाद दिल्ली और आगरा पर बाबर ने कब्जा कर मुगल साम्राज्य की नींव रखी थी
मुगल काल के दो सबसे बड़े किले कौन-से हैं
मुगल काल में अलग-अलग भव्य इमारतों का निर्माण कराया गया था। हालांकि, इनमें से दो किले प्रमुख हैं, जिनमें से एक आगरा का किला है, जिसे किले-ए-अकबरी के नाम से भी जाना जाता है। इस किले का पुनर्निर्माण मुगल सम्राट अकबर द्वारा 1565 में शुरू कराया गया था, जो कि 1573 में पूरा हुआ था। वहीं, दूसरा किला दिल्ली का लाल किला है, जिसे किला-ए-मुबारक के नाम से भी जाना जाता है। आमतौर पर इसे लाल किला कहा जाता है।
मुगल काल का सबसे बड़ा किला
अब सवाल है कि मुगल काल का सबसे बड़ा किला कौन-सा है, तो आपको बता दें कि यह दिल्ली का लाल किला है। इस किले का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा 13 मई, 1639 को शुरू करवाया गया था, जिसके बाद 1648 में किला बनकर तैयार हुआ।
कितना बड़ा है दिल्ली का लाल किला
दिल्ली का लाल किला कुल 228.8 एकड़ में फैला हुआ है, जिसकी दीवार की परिधि 2 किलोमीटर से अधिक है। किले के मुख्य वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी थे, जिन्होंने सुरक्षा और सैन्य रणनीति को ध्यान में रखते हुए लाल किले का डिजाइन तैयार किया था। किला मुख्य रूप से यमुना के किनारे बनाया गया था।
किले में मुख्य रूप से खास महल, रंग महल, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, मोती मस्जिद, हमाम और बाग के रूप में हयात-ए-बख्स का निर्माण किया गया था। 1857 की क्रांति के बाद ब्रिटिश सेना ने यहां कब्जा कर कई इमारतों को ध्वस्त किया और अपनी बैरक बनवाई थी, जिन्हें आज भी देखा जा सकता है।
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