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चेर शासकों की सूची और उनके योगदान

चेर राजवंश, तमिलकम के तीन प्रमुख राजवंशों में से एक थे, जिसके शासकों ने दक्षिण भारत में वर्तमान केरल राज्य तथा तमिलनाडु के कुछ हिस्सों पर शासन किया था. चेर शब्द शायद चेरल शब्द से उत्पन्न हुआ था, जिसका अर्थ प्राचीन तमिल में एक पहाड़ की ढ़लान है। यहां हम सामान्य जागरूकता के लिए चेर शासकों की सूची और  उनके योगदान का विवरण दे रहे हैं।
Nov 14, 2017 15:12 IST
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चेर राजवंश, तमिलकम के तीन प्रमुख राजवंशों में से एक थे, जिसके शासकों ने दक्षिण भारत में वर्तमान केरल राज्य तथा तमिलनाडु के कुछ हिस्सों पर शासन किया था. "चेर" शब्द शायद चेरल शब्द से उत्पन्न हुआ था, जिसका अर्थ प्राचीन तमिल में "एक पहाड़ की ढ़लान" है। उन्हें "केरलपुत्र" के नाम से भी जाना जाता था और उनका राज्य पांड्य साम्राज्य के पश्चिमोत्तर में स्थित था। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, चेरा राजवंश मोटे तौर पर दो चरणों में विभाजित था। प्रारंभिक चेर शासकों ने 4थी शताब्दी ईसा पूर्व से 5वीं शताब्दी ईस्वी तक शासन किया था जबकि बाद के चेर शासक, जिन्हें "कुलशेखर" भी कहा जाता है, 8वीं से 12वीं शताब्दी ईसवी के बीच सत्तासीन थे। यहां हम सामान्य जागरूकता के लिए चेर शासकों की सूची और  उनके योगदान का विवरण दे रहे हैं।

Chera Dynasty HN

Source: i.ytimg.com

चेर शासकों की सूची और उनके योगदान

चेरा शासकों के नाम

शासन (AD)

योगदान

उथियान चेरलाथान

NA

1. प्राचीन दक्षिण भारत में संगम काल का पहला शासक था।

2. "वनवरम्बन" (जिसका अर्थ है "जिसका राज्य आकाश तक पहुंच जाता है" या "जो देवताओं से प्यार करता है") के नाम से भी जाना जाता है।

नेदुम चेरलथन

NA

1. कन्ननार उनके राज-दरबारी कवि थे।

2. अधिरराज का खिताब मिला।

सेल्वा कदुमको वलिअथान

NA

NA

सेंगुत्तुवन चेरा

NA

1. कडलीपीराकुट्तिया वेल केलू कुत्तुवन, सेन्गुत्तवान और चेन्तुत्तुवन के नाम से भी जाना जाता है।

इल्लम चेरल इरमुपोराई

जानकारी उपलब्ध नहीं है

जानकारी उपलब्ध नहीं है

मंतरन चेरल

जानकारी उपलब्ध नहीं है

1. संगम काल के दौरान, वह तमिलनाकम में चेरा साम्राज्य के पराक्रमी राजाओं में से एक था।

कुलशेखर वर्मा

800–820

1. 'पेरुमल' के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है 'द ग्रेट' - भगवान राम के लिए एक उपनाम।

2. उन्होंने संस्कृत के गीत मुकुंदमाला और पेरुमल तिरुमोजी के लेखक के रूप में विचार किया, जो नालेरे दिव्य प्रभाद्म के एक भाग के रूप में संकलित हैं।

राजशेखर वर्मा

820–844

1. उनका दूसरा नाम सिरामम पेरुमल नयनार था।

2. वह क्रैंगानोर के चेरा राजवंश का पहला ज्ञात शासक है।

3. हिंदू संत आदि संकर इनके समकालीन थे।

स्टनू रवि वर्मा

844–885

1. उनका शासनकाल विज्ञान, आर्थिक समृद्धि और राजनीतिक स्थिरता में विकास के लिए उल्लेखनीय था।

2. प्रसिद्ध खगोल विज्ञानी शंकर नारायण (शंकर नारायण्यम के लेखक, जो भास्कर के लघु भास्करीय पर एक टिप्पणी है) महोदयपुरम में स्थानु रवि के शाही महल के सदस्य थे।

राम वर्मा कुलशेखरा

885–917

जानकारी उपलब्ध नहीं है

गोदा रवि वर्मा

917–944

जानकारी उपलब्ध नहीं है

इंदु कोठ वर्मा

944–962

जानकारी उपलब्ध नहीं है

भास्कर रवि वर्मा I

962–1019

जानकारी उपलब्ध नहीं है

भास्कर रवि वर्मा II

1019–1021

जानकारी उपलब्ध नहीं है

वीरा केरल

1021–1028

जानकारी उपलब्ध नहीं है

राजसिम्हा

1028–1043

जानकारी उपलब्ध नहीं है

भास्कर रवि वर्मा III

1043–1082

जानकारी उपलब्ध नहीं है

रवि राम वर्मा

1082–1090

जानकारी उपलब्ध नहीं है

राम वर्मा कुलशेखरा

1090–1102

1. उसका पूरा नाम राजा श्री राम वर्मा, कुलसेखारा पेरुमल, वैकल्पिक रूप से रामार तिरुवती या कुलसेखरा कोइलाढिकारीकल) था।

2. उनका शासन गंभीर राजनीतिक संकट और अस्थिरता के लिए जाना जाता है।

3. उत्तरवर्ती चेर राजवंश के अंतिम शासक (महादेयपुरम के कुलसेखर)

चेर शासकों का कोई विशेष धर्म नहीं था - यहां तक कि जाति व्यवस्था भी उनके समाज से अनुपस्थित थी - लेकिन पितृ पूजा लोकप्रिय थी। चेर शासकों और उनके योगदान की उपरोक्त सूची पाठकों के सामान्य ज्ञान को बढ़ाएगा।

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