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सम्राट अशोक के नौ अज्ञात पुरुषों के पीछे का रहस्य

भारतीय इतिहास में कुछ ही शासकों को उनकी महानता के लिए याद किया जाता है और सम्राट अशोक उनमें से एक हैं। वह मौर्य वंश के तीसरे शासक थे, जिन्होंने लगभग 36 वर्षों तक पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर शासन किया था। यहां हम भारतीय इतिहास से जुड़े उन तथ्यों का विवरण दे रहे हैं, जिससे आपको पता चलेगा कि अशोक के नौ अज्ञात पुरुषों के पीछे का रहस्य क्या था।
Sep 19, 2017 18:38 IST
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Mystery Behind The Nine Unknown Men Of Ashoka Samrat
Mystery Behind The Nine Unknown Men Of Ashoka Samrat

भारतीय इतिहास में कुछ ही शासकों को उनकी महानता के लिए याद किया जाता है और सम्राट अशोक उनमें से एक हैं। वह मौर्य वंश के तीसरे शासक थे, जिन्होंने लगभग 36 वर्षों तक पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर शासन किया था।

अपने शुरूआती दौर में, वह एक क्रूर और हिंसक सम्राट के रूप में जाने जाते थे, लेकिन कलिंग युद्ध के हुए नरसंहार ने सम्राट अशोक के अंतर आत्मा को हिला दिया था। हालांकि, कलिंग की लड़ाई बहुत ही क्रूर और घातक थी, लेकिन उसने सम्राट अशोक को एक क्रूर और तामसी शासक से एक अहिंसक और शांतिप्रिय सम्राट में बदल दिया। इस युद्ध के कारण नौ अज्ञात पुरूषों के समूह का गठन हुआ। अशोक ने बौद्ध धर्म के सिद्धांतों का पालन किया और अपने जीवन में बहुत ही अच्छे काम किए. उनकी मृत्यु के बाद मौर्य वंश केवल पचास वर्षों तक ही चल पाया. इसके अलावा भारत में बौद्ध धर्म का प्रभाव कम होना शुरू हो गया था, लेकिन अन्य दक्षिण एशियाई देशों में इसका उत्कर्ष शुरू हो गया था।

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सम्राट अशोक की प्रमुख उपलब्धियां निम्न है।

Ashoka Chakra and Lion Capital of Sarnath

1. बौद्ध के अवशेषों को संग्रहीत करने के लिए दक्षिण एशिया और मध्य एशिया में 84,000 स्तूपों का निर्माण

2. मौर्य सम्राट के सबसे प्रतिष्ठित अवशेषो में से एक "अशोक चक्र" और "सारनाथ का सिंहस्तंभ" है. भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में "अशोक चक्र" को "धार्मिकता का चक्र" के रूप में और "सारनाथ के सिंहस्तंभ" को भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया गया है।

3. अशोक ने धमेक स्तूप, भरहुत स्तूप, सन्नति स्तूप, बुखारा स्तूप, बराबर की गुफाएं, महाबोधि मंदिर और सांची जैसे स्थानों पर "विहार" तथा नालंदा विश्वविद्यालय और तक्षशिला विश्वविद्यालय जैसे बौद्धिक केंद्रों का निर्माण करवाया था।

सम्राट अशोक और नौ अज्ञात पुरूषों के समूह

 Unknown Men

ऐसे अज्ञात पुरुषो का समूह था जिन्होंने दुनियादारी से खुद को अलग कर लिया था ताकि राजनीति या मुख्यधारा विज्ञान के साथ किसी भी तरह के व्यवहार से बच सके। वे सांसारिक रहस्यमय तथ्यो के संरक्षक और अभिभावक के रूप में काम करते थे। वे पूरे सभ्यताओं के उदय और पतन के पर्यवेक्षक थे, फिर भी वे कभी भी हस्तक्षेप नहीं करते थे या किसी प्रकार की सक्रियता नहीं दिखाते थे, लेकिन मानव जाति उत्थान के लिए हमेशा कार्यरत थे।

विज्ञान के नौ समर्पित अनुयायियों को चुना गया और प्रत्येक को मानव जाति के किसी एक विशिष्ट क्षेत्र से संबंधित ज्ञान के संकलन वाली एक किताब दी गई। इस समूह में हर समय नौ लोग होते थे। इन नौ अज्ञात व्यक्तियों को अमरता के रहस्यों को उजागर करने और अनंत काल के लिए अपनी स्थिति को गोपनीय बनाए रखने के लिए कहा गया था। प्रत्येक व्यक्ति को जो पुस्तक दिया गया था, उन्हें उनमें नई बातों को जोड़ना था एवं पहले से संकलित ज्ञान को संशोधित कर सही करना था।  

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नौ पुस्तकों एवं नौ अज्ञात पुरूषों के समूह का रहस्य

इन रहस्यमय पुस्तकों में कई विषयों का ज्ञान शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश के बारे में आज भी हम नहीं जानते हैं।

Unknown Books

'नौ अज्ञात पुरुष' कौन हैं? क्या यह एक मिथक है? क्या कोई ऐसे ऐतिहासिक आकड़े हैं जो इनकी विश्वसनीयता को सत्यापित करते हैं? क्या कभी सबसे शक्तिशाली ज्ञान का संग्रह एकत्र किया गया था? यदि हां, तो वे कौन हैं और अब कहां हैं एवं उनकी अंतिम योजना क्या है? क्या उनका व्यवहार उदार हैं या शत्रुतापूर्ण हैं? क्या हमें इन सवालों का जवाब कभी मिल पाएगा?

वास्तव में नौ अज्ञात पुरुषों की कहानी 2000 वर्षों से भी ज्यादा पुरानी है। इन नौ में से प्रत्येक पुस्तक के मूल तत्वों की अवधारणा आम तौर पर बदलती रही है। एक अंग्रेजी लेखक टैलबॉट मुंडे ने 1923 में "द नाइन अननॉन मैन" नामक एक पुस्तक को वितरित किया, जिसमें 9 पुस्तकों का सारांश था। इस सारांश को बड़े पैमाने पर स्वीकार किया गया है।

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