भारत के किन राज्यों में सीनियर सिटीजन को सबसे अधिक वृद्धावस्था पेंशन मिलती है?

जनगणना 2011 के अनुसार भारत में करीब 104 मिलियन सीनियर सिटीजन्स (60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के) हैं. इन सभी को वृद्धावस्था पेंशन मिलती नहीं मिलती है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस समय देश में 3.5 करोड़ लोगों को वृद्धावस्था पेंशन योजना का लाभ मिल रहा है. देश में केरल, दिल्ली, पुदुचेरी और अंदमान के सीनियर सिटीजन्स को हर माह 2000 रुपये मिलते हैं.
Jan 2, 2019 18:32 IST
    Senior Citizens

    जनगणना 2011 के अनुसार भारत में करीब 104 मिलियन सीनियर सिटीजन्स (60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के) हैं; 53 मिलियन महिलाएं और 51 मिलियन पुरुष हैं. भारत में सीनियर सिटीजन्स को सरकार के द्वारा कई तरह की सुविधायें दी जातीं हैं जिनमें प्रमुख हैं; वृद्धावस्था पेंशन, आयकर से छूट, रेल, बस और हवाई यात्रा किराये में छूट इत्यादि.

    संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या निधि की रिपोर्ट में बताया गया है कि 2000 से 2050 के बीच भारत की कुल जनसंख्या में 60 वर्ष से अधिक के लोगों की आबादी 326% बढ़ेगी और 80 वर्ष से अधिक के वृद्धों की आबादी में 700% वृद्धि होगी. इस प्रकार 2050 तक भारत की कुल जनसंख्या में वृद्धों की आबादी 19% होगी.

    भारत की जनसंख्या का एक बहुत बड़ा हिस्सा (लगभग 90% कर्मचारी) असंगठित क्षेत्र में काम करता  हैं इन लोगों के अलावा किसान और मजदूरों का वर्ग भी है जिसे बुढ़ापे में किसी तरह की पेंशन नहीं मिलती है. इस लेख में हम आपको यही बता रहे हैं कि भारत के विभिन्न राज्यों में सीनियर सिटीजन्स को कितनी पेंशन मिलती है.

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    क्या है वृद्धावस्था पेंशन योजना?

    सरकार सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत सीनियर सिटीजन को पेंशन देती है. राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (एनओएपीएस) की शुरुआत साल 1995 में हुई थी. वृद्धावस्था पेंशन योजना का क्रियान्वयन केंद्र और राज्य, दोनों सरकारों द्वारा मिलकर किया जाता है.

    पहले वृद्धावस्था पेंशन योजना में भाग लेने के लिए सीनियर सिटीजन की उम्र 65 साल थी जिसे साल 2011 से घटाकर 60 साल कर दिया गया है. अब सीनियर सिटीजन की दो श्रेणियां है एक 60 से 79 वर्ष के बीच और दूसरी 80 वर्ष से ऊपर.

    कितने लोगों को मिल रहा है वृद्धावस्था पेंशन?

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस समय देश में 3.5 करोड़ लोगों को वृद्धावस्था पेंशन योजना का लाभ मिल रहा है. यह संख्या, कुल वृद्धों की संख्या का बहुत छोटा भाग है.

    कितनी है पेंशन की राशि?

    वृद्धावस्था पेंशन योजना में केंद्र और राज्य, दोनों सरकारें मिलकर योगदान करती है. हर राज्यों की हिस्सेदारी अलग अलग होने के कारण देश के हर राज्य में वृद्धावस्था पेंशन योजना की रकम अलग-अलग होती है. भारत के विभिन्न राज्यों द्वारा 60 से 79 साल तक आयु के सीनियर सिटीजन को हर महीने 200 से 2000 रुपये प्रति माह की दर से पेंशन का लाभ दिया जाता है.

    ध्यान रहे कि 60 वर्ष से ऊपर और 79 वर्ष के बीच के वृद्धों को दी जाने वाली पेंशन में राज्य सरकारों द्वारा दी जाने वाली रकम में फिक्स 200 रुपये भारत सरकार का हिस्सा भी होता है.

    केंद्र सरकार की ओर से 80 साल या इससे अधिक उम्र के वृद्धों को प्रतिमाह 500 रुपये की दर से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन के रूप में राशि प्रदान की जाती है. यह राशि राज्य सरकार की ओर से दी जाने वाली राशि से अलग होती है.

    OLD AGE PENSION

    कौन ले सकता है वृद्धावस्था पेंशन योजना का लाभ?

    1. राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना का लाभ केवल उन्हीं वरिष्ठ नागरिकों को दिया जाता है, जिनकी उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक है. ध्यान रहे कि 80 वर्ष से अधिक के वृद्धों को सुपर सीनियर सिटीजन कहा जाता है और उनको ज्यादा पेंशन मिलती है.

    2. वृद्धावस्था पेंशन योजना के आवेदक को गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले परिवार से संबंधित होना चाहिए.

    3. अगर आवेदक के परिवार में पुत्र/पौत्र 20 साल से अधिक उम्र का हो, लेकिन वह भी गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर कर रहा हो, तब ही इस योजना का लाभ आवेदक को मिलेगा.

    4. कुछ राज्यों में यह नियम है कि 60 साल से अधिक उम्र के सीनियर सिटीजन भले ही BPL परिवार के नहीं हों, वृद्धावस्था पेंशन की पूरी राशि राज्य सरकार से पा सकते हैं.

    उत्तर प्रदेश में सीनियर सिटीजन पेंशन:

    वित्त वर्ष वित्तीय वर्ष 2018-19 के तीसरे क्वार्टर में उत्तर प्रदेश में कुल 37.37 लाख लोगों को वृद्धावस्था पेंशन के रूप में 4.59 अरब रुपये बांटे गये हैं. ज्ञातव्य है कि वर्ष 2016-17 में OBC श्रेणी के लगभग 19 लाख, SC श्रेणी के लगभग 12 लाख और सामान्य श्रेणी के लगभग 5 लाख लोगों को वृद्धावस्था पेंशन दी गयी थी.

    वर्तमान में इस प्रदेश में योगी सरकार ने अगस्त 2018 से नयी पेंशन योजना शुरू की है जिसके तहत लगभग 50 लाख लोगों को हर माह 800 रुपये प्रति माह दिये जायेंगे. योगी की योजना की अच्छी बात यह है कि इसमें अब उन वृद्ध लोगों को भी पेंशन मिलेगी जिनके पास पक्का मकान और दो पहिया वाहन है.

    उत्तर प्रदेश की पेंशन लेने के लिए लाभार्थी को निम्न शर्तें पूरी करनी चाहिए.

    1. आवेदक उत्तर प्रदेश का निवासी होना चाहिए।

    2. 60 वर्ष या अधिक आयु वाले सभी वरिष्ठ नागरिक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं

    3. लाभार्थी का नाम बीपीएल सूची में प्रदर्शित होना चाहिए

    दिल्ली में सीनियर सिटीजन पेंशन:

    वर्तमान में दिल्ली की केजरीवाल सरकार; 60-69 वर्ष तक के वृद्ध लोगों को हर माह 2000 रुपये और 70 साल से अधिक के वृद्धों के लिए 2500 रुपये हर महीने देती है.

    दिल्ली में पेंशन लेने के लिए लाभार्थी को निम्न शर्तें पूरी करनी चाहिए.

    1. महिला या पुरुष लाभार्थी की उम्र 60 वर्ष से अधिक होनी

    2. लाभार्थी को पेंशन के लिए आवेदन करने से पहले कम से कम 5 वर्ष से दिल्ली का निवासी होना चाहिए.

    3. लाभार्थी की वार्षिक फैमिली आय 1 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए.

    अन्य राज्यों में सीनियर सिटीजन को मिलने वाली पेंशन इस प्रकार है;

    देश के विभिन्न राज्यों में पेंशन

    200 से 1000 रुपये के बीच पेंशन देने वाले राज्य इस प्रकार हैं;

    1. मणिपुर में 200 रुपये प्रति माह

    2. मिजोरम में 250 रुपये प्रति माह

    3. नागालैंड, ओडिशा और मध्य प्रदेश में 300 रुपये प्रति माह

    4. बिहार झारखण्ड और असम में 400 रुपये प्रति माह

    5. गुजरात में 60 से 79 आयु वर्ग के लिए पेंशन 500/ माह और 80 वर्ष से अधिक के लिए 1000 रूपये प्रति माह

    6. तेलंगाना में 1000 रुपये दिए जाते हैं.

    1000 से 2000 के बीच पेंशन देने वाले राज्य इस प्रकार हैं;

    भारत के ये राज्य 2000 रुपये प्रति माह वृद्धावस्था पेंशन देते हैं.

    1. गोवा

    2. दिल्ली

    3. पुदुचेरी

    4. अंदमान और निकोबार द्वीप समूह

    इसके अलावा हरियाणा में 1800 रुपये और अरुणाचल प्रदेश में 1700 रुपये प्रति माह मिलते हैं.

    ऊपर दिए गए आंकड़ों से यह तस्वीर निकलकर सामने आती है कि भारत के विभिन्न राज्यों में वृद्धवस्था पेंशन की राशि अलग अलग है इसका मुख्य कारण राज्यों द्वारा पेंशन में दिया जाने वाला योगदान है. एक अनुमान के अनुसार अगर भारत के सभी योग्य सीनियर सिटीजन को 2000 हजार रुपये की पेंशन दी जाये तो देश की इकॉनमी पर सकल घरेलू उत्पाद का केवल 1.97% भाग ही खर्च होगा लेकिन लगभग 3.5 करोड़ लोगों को सम्मान से जीने का हक़ मिल जायेगा.

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