गाड़ी की नंबर प्लेट पर A/F का क्या मतलब होता है?

A/F means on number plate:कई वाहनों की नंबर प्लेट पर A/F लिखा होता है. जिसका मतलब होता है 'Applied for'. लेकिन क्या आप इसका मतलब और कारण जानते हैं?यदि नहीं तो आइये इस लेख में इसके कारण और मतलब के बारे में जानते हैं.
Created On: Nov 27, 2020 17:22 IST
Modified On: Nov 27, 2020 17:23 IST
Applied for number plate
Applied for number plate

गाड़ी नई हो या पुरानी प्रत्येक वाहन को मोटर वाहन अधिनियम 1989 के तहत पंजीकृत होना चाहिए. बिना किसी रजिस्ट्रेशन नंबर के गाड़ी चलाना गैर कानूनी माना जाता है. जब भी कोई गाड़ी दुपहिया, तिपहिया या चार पहिया आदि जब शोरूम से निकलती है तो उसको एक टेम्पररी नम्बर दिया जाता है. यदि किसी गाड़ी को टेम्पररी नम्बर नहीं दिया जाता है तो उसकी नम्बर प्लेट पर A/F लिखा जाता है.

A/F का मतलब होता है "Applied For" इसका मतलब यह है कि गाड़ी के मालिक ने गाड़ी के नए नंबर के लिए अप्लाई किया हुआ है और जब तक गाड़ी का परमानेंट नम्बर नहीं मिल जाता है तब तक उसको नम्बर प्लेट पर A/F या Applied For लिखने की छूट दी गयी है.
क्या नम्बर प्लेट पर A/F लिखना गैर कानूनी है  (Is it Legal to write A/F on number plate)

जी हाँ. यदि आप A/F लिखी नंबर प्लेट की गाड़ी को एक सप्ताह से अधिक तक चलाते हो तो ऐसा करना गैर कानूनी हैं; क्योंकि क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय अधिकारी (RTO) ने आपको A/F लिखने की सुविधा सिर्फ उस अवधि तक के लिए दी है जब तब कि आपको परमानेंट रजिस्ट्रेशन नम्बर नहीं मिल जाता है. जैसे ही आपको परमानेंट नम्बर मिलता है आपको अपनी गाड़ी पर A/F की जगह परमानेंट नम्बर लिखवाना होगा.

applied for car
image source:Muamat
नियम का उल्लंघन करने पर कितना जुर्माना होगा?
बिना रजिस्ट्रेशन नंबर वाला वाहन चलाना एक अपराध है. केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR), पंजीकरण के बिना वाहन चलाने की अनुमति नहीं देते हैं. A/F लिखवाकर गाड़ी चलाना भी अपराध की श्रेणी में आता है.
लोगों में यह एक गलत धारणा है कि लोग लंबे समय तक अपनी गाड़ी की नम्बर प्लेट पर  A/F लिखवाकर  चला सकते हैं और पुलिस कुछ नही कहेगी. ऐसा सोचना गलत है और यदि आप बिना नंबर की गाड़ी चलाते पकड़े गए तो आपको 10000 रुपये तक का जुर्माना या आपकी गाड़ी भी जब्त की जा सकती है.

नम्बर प्लेट के माध्यम से गाड़ी के मालिक का पता कैसे करें
नियमानुसार वाहन पंजीकरण संख्या एक सप्ताह के भीतर प्राप्त कर लिया जाना चाहिए. हालांकि, जाँच अभियान के दौरान अधिकारियों ने पाया कि लोगों ने एक महीने बाद भी वाहनों का पंजीकरण नही कराया था. हालांकि अधिकांश मामलों में यह डीलरों की गलती है. "जिन लोगों को अपने डीलरों से वाहन पंजीकरण संख्या प्राप्त करने में समस्या आ रही है, वे RTO के साथ शिकायत दर्ज कर सकते हैं".
अधिकारियों ने पाया है कि लगभग हर डीलर ने नियमों का उल्लंघन किया है. अब आरटीओ के पास यह अधिकार है कि वह नियमों का उल्लंघन करने वाले डीलरों का ट्रेड सर्टिफिकेट ख़त्म करने का नोटिस दे सकता है.

प्रत्येक डीलर को अलग-अलग प्रकार के वाहन बेचने के लिए अलग-अलग ट्रेड सर्टिफिकेट (Trade Certificate) लेने पड़ते है. डीलर द्वारा नए वाहन के लिए जारी किये गए ट्रेड सर्टिफिकेट नंबर को पंजीकरण संख्या नही माना जाना चाहिए. ट्रेड सर्टिफिकेट नंबर एक ऐसी संख्या होती है जो कि डीलर को RTO द्वारा आवंटित की जाती है जिसे डीलर नए वाहनों की बिक्री करने पर नम्बर प्लेट पर चिपका सकता है लेकिन इस संख्या को लम्बे समय तक टेम्पररी नंबर के तौर पर इस्तेमाल करना अपराध है.

ट्रेड सर्टिफिकेट नंबर चिपकाकर गाड़ी तभी तक चलायी जा सकती है जब तक कि गाड़ी का परमानेंट नम्बर नही मिल जाता है और यह अवधि ज्यादा से ज्यादा एक सप्ताह तक हो सकती है.

क्यों भारतीय वाहनों में अलग-अलग रंग की नम्बर प्लेट इस्तेमाल होती है?

यहाँ पर यह सवाल उठना बहुत लाजिमी है कि सरकार वाहन रजिस्ट्रेशन को लेकर इतनी सतर्क क्यों हैं. इसका सबसे बड़ा कारण सुरक्षा से जुड़ा हुआ हैं; जिसमें ऐसा हो सकता है कि कोई व्यक्ति अपराध अपहरण/आतंकवाद/एक्सीडेंट करने के लिए ऐसी गाड़ी का इस्तेमाल करे जिसका कि नंबर ही नही आया है. ऐसी हालत में जुर्म करने वाले को पकड़ना मुश्किल काम हो जायेगा. इसलिए नए वाहन का जल्दी से जल्दी रजिस्ट्रेशन होना ही सभी के हित में हैं. 

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