18th Lok Sabha Elections 2024: लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण का मतदान 19 अप्रैल 2024 को पूरा हो गया. पहले फेज में कई राज्यों की लोकसभा सीटों पर वोटिंग करायी गयी थी. हालांकि, पहले फेज की वोटिंग के बाद यूपी की मुरादाबाद सीट से एक बुरी खबर आई थी, मुरादाबाद सीट से मैदान में उतरे बीजेपी प्रत्याशी कुंवर सर्वेश सिंह का आकस्मिक निधन हो गया.
मुरादाबाद बीजेपी प्रत्याशी के आकस्मिक निधन के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठने लगे कि इस सीट पर क्या चुनाव आयोग फिर से मतदान कराएगा या फिर नहीं. चलिए आज हम इसी के बारें में आप सभी को बताते है.
इस तरह की स्थिति भारतीय चुनाव प्रक्रिया में पहली बार नहीं है, ऐसी परिस्थिति पहले भी आई है, तो क्या इस सीट पर उपचुनाव होंगे? या फिर कोई अन्य तरीका अपनाया जायेगा. चलिये जानते है क्या कहता है नियम.
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वोटिंग के बाद प्रत्याशी का निधन:
आपको बता दें कि हाल ही में संपन्न हुए लोक सभा इलेक्शन 2024 के पहले फेज की वोटिंग के बाद मुरादाबाद सीट के बीजेपी प्रत्याशी की मौत हो गयी. मतदान के अगले दिन यानी 20 अप्रैल को बीजेपी प्रत्याशी कुंवर सर्वेश सिंह का निधन हो गया वह 71 वर्ष के थे.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब पार्टी ने उन्हें टिकट दिया था तब भी वह हॉस्पिटल में ही एडमिट थे. मिली जानकारी के अनुसार उनकी तबियत ठीक नहीं थी. सर्वेश साल 2014 के आम चुनाव में मुरादाबाद सीट से ही सांसद बने थे. इससे पहले वह 4 बाद यूपी विधान सभा के लिए विधायक चुने गए थे.
वोटिंग से पहले प्रत्याशी का निधन हो जाये तो?
यदि वोटिंग से पहले प्रत्याशी का निधन हो जाये तो चुनाव आयोग ऐसी स्थिति में सीधे चुनाव को रद्द कर देता है और उस सीट पर नई डेट की घोषणा और नए उम्मीदवार के साथ वोटिंग करायी जाती है.
यदि प्रत्याशी के नामांकन करने से पहले ही उसका निधन हो जाये तो पार्टी के पास दूसरा उम्मीदवार मैदान में उतारने का मौका रहता है और पार्टी किसी दूसरे को उम्मीदवार बना सकती है.
संभल सीट पर कुछ हुआ ऐसा:
आपको बताते चले कि समाजवादी पार्टी (सपा) ने संभल सीट से शफीकुर्रहमान बर्क को अपना प्रत्याशी घोषित किया था. लेकिन नामांकन से पहले ही उनका निधन हो गया, ऐसे स्थिति में पार्टी के पास दूसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने का मौका था. पार्टी ने बर्क के परिवार के जियाउर्रहमान बर्क को प्रत्याशी बनाया है.
इसी तरह के एक अन्य मामले में राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में करणपुर सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार गुरमीत सिंह कुन्नर का निधन हो गया था. क्योंकि उनका नामांकन हो चुका था ऐसी स्थिति में आयोग ने नई डेट पर चुनाव कराया था.
ऐसे ही साल 2018 में राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान बसपा के उम्मीदवार लक्ष्मण सिंह का निधन हो गया था जबकि उन्होंने अपना नामांकन कर दिया था, जिसके बाद उस सीट पर नई डेट पर वोटिंग करायी गयी थी.
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वोटिंग के बाद प्रत्याशी का निधन तो क्या कहता है नियम:
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, यदि वोटिंग के बाद मैदान में उतरे किसी प्रत्याशी की मौत हो जाये तो ऐसी स्थिति में आयोग वोटों की गिनती तक इंतजार करता है. जैसा की सब जानते है काउंटिंग के बाद किसी एक प्रत्याशी की जीत होती है.
यदि काउंटिंग के बाद मृतक उम्मीदवार की जीत हो जाती है तो ऐसी स्थिति में चुनाव को रद्द कर दिया जाता है, क्योंकि क्षेत्र के प्रतिनिधत्व के लिए उम्मीदवार अब जीवित नहीं है. अब उस सीट पर नए सिरे से जन प्रतिनिधित्त्व अधिनियम, 1951 की धारा 151A के तहत 6 महीने के भीतर चुनाव कराने होंगे.
यदि मतगणना के बाद किसी अन्य प्रत्याशी की जीत हो जाती है तो ऐसी स्थिति में चुनाव रद्द नहीं कराये जाते है. जिस उम्मीदवार को चुनाव में जीत मिलती है उसे ही विजेता मान लिया जाता है.
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