भारत में हाल ही में Right To Die With Dignity सुर्खियों में आ गया है। वजह है, दक्षिण भारत के एक राज्य द्वारा इसे अपना यहां लागू किया गया है। इसे लेकर सभी अस्पतालों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ऐसे में देशभर में यह अधिकार एक बार फिर से लोगों की जुबान पर है।
यह सम्मानपूर्वक मृत्यु का अधिकार है, जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी निर्णय लिया गया था। क्या होता है Right To Die With Dignity और भारत के किस राज्य में यह लागू है, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
क्या होता है Right To Die With Dignity
यदि कोई मरीज किसी लाइलाज बीमारी से जूझ रहा है और उसके बचने की कोई उम्मीद नहीं है। साथ ही, वह जीवन रक्षक उपचार को बंद करना चाहता है, तो डॉक्टर मरीज के इस फैसले का सम्मान करेंगे। साथ ही, क्षेत्रीय स्वास्थ्य अधिकारी इस मामले को प्रमाणित भी करेगा।
प्रमाणित करने के लिए अधिकारी द्वारा एक बोर्ड का गठन किया जाएगा, जिसमें सर्जन, न्यूरोसर्जन, एनेस्थेटिस्ट व इंटेसिविस्ट को रखा जाएगा। पैनल मरीज के फैसले की समीक्षा करेगा, जिसके बाद ही मरीज को गरीमा से मृत्यु का अधिकार मिल सकेगा।
किस राज्य में हुआ है लागू
गरिमा से मृत्यु का अधिकार हाल ही में दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक में लागू किया गया है। यह ऐसा करने वाला पहला राज्य बन गया है। इसे अभी बाकी राज्यों मे नहीं अपनाया गया है, हालांकि गोवा व महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इसे अपनाने को लेकर योजना बनाई जा रही है।
इच्छामृत्यु और गरिमा से मृत्यु अधिकार में क्या अंतर
सुप्रीम कोर्ट द्वारा साल 2023 जनवरी में Right To Die With Dignity को लेकर फैसला लिया गया था। गरिमा से मृत्यु अधिकार में मरीज को अपने आखिरी पलों में अपने जीवन को जारी रखने का अधिकार होता है कि वह इलाज को जारी रखना चाहता है या नहीं, जिससे वह मृत्यु को पूरे सम्मान के साथ प्राप्त कर सके।
कैसे देनी होगी सहमति
यदि किसी मरीज को ऐसा लगता है कि वह भविष्य में कोमा या फिर अन्य किसी लाइलाज बीमारी का शिकार हो सकता है, तो वह फैसला ले सकता है कि उसे जीवन रक्षक उपकरणों पर न रखा जाए। इसके लिए मरीज को लिखित में देना होगा, जो कि मेडिकल विल यानि कि स्वास्थ्य से जुड़े दस्तावेजों में शामिल होगा। साथ ही, इसके लिए परिवार की सहमति भी जरूरी होगी।
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