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COVID-19 से लड़ने के लिए वेंटीलेटर महत्वपूर्ण क्यों हैं?

वेंटिलेटर (Ventilator) एक ऐसी मशीन है जो उन रोगियों की मदद करती है जो किसी भी कारण से अपने आप ठीक से सांस नहीं ले पाते हैं. इसे अन्य नामों के रूप में भी जाना जाता है जैसे - ब्रीदिंग मशीन या रेस्पिरेटर या मैकेनिकल वेंटिलेटर आदि. लगभग 5% COVID-19 रोगियों को ठीक से साँस लेने के लिए वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है. भारत में अभी 40 हजार वर्किंग वेंटिलेटर हैं.
Mar 25, 2020 17:58 IST
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A patient at Ventilator support
A patient at Ventilator support
p>इंडियन सोसायटी ऑफ क्रिटिकल केयर के अध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी का कहना है कि भारत में अनुमानित 40,000 वर्किंग वेंटिलेटर हैं. यह संख्या COVID-19 से लड़ने के लिए अपर्याप्त लगती है क्योंकि चीनी आंकड़ों से पता चलता है कि लगभग 15% कोविड-19 के शिकार मरीज इतने गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं कि उनमें से लगभग 5% को आईसीयू में वेंटीलेटर पर रखना पड़ता है.

इसलिए अगर हम इस गणना के हिसाब से जोड़ें तो पता चलता है कि भारत में लगभग 40 हजार वेंटीलेटर काम करने की हालात में हैं और भारत की आबादी 1.36 अरब है. यदि इस आबादी के 10% लोगों के लिए भी वेंटीलेटर की जरूरत पड़ी तो भारत में समस्या विकट हो जाएगी. 

ऐसी स्थिति में यह जानने की उत्सुकता हर किसी को हो सकती है कि आखिर यह वेंटीलेटर क्या होता है और यह कोविड -19 से लड़ने में इतना मददगार क्यों माना जाता है?

वेंटीलेटर क्या होता है? (What is Ventilator)

वेंटिलेटर (Ventilator) एक ऐसी मशीन है जो उन रोगियों की मदद करती है जो किसी भी कारण से अपने आप ठीक से सांस नहीं ले पाते हैं. वेंटिलेटर दो महत्वपूर्ण कार्य करता है: फेफड़ों में अधिक ऑक्सीजन पहुंचाता है और कार्बन डाइऑक्साइड को वहां से बाहर निकालता है.

इसे अन्य नामों के रूप में भी जाना जाता है जैसे - ब्रीदिंग मशीन या रेस्पिरेटर या मैकेनिकल वेंटिलेटर आदि.

एक मध्यम स्तर के वेंटिलेटर की कीमत (ventilator costs in India) लगभग 4.75 लाख रुपये है, जबकि मध्यम स्तर के आयातित वेंटिलेटर में लगभग 7 लाख रुपये खर्च होते हैं. एक हाई क्वालिटी के आयातित वेंटिलेटर की लागत लगभग 12 लाख रुपये होती है.

वेंटीलेटर क्या काम करता है (What does Ventilator work)

COVID-19 से प्रभावित व्यक्ति को साँस लेने में दिक्कत होती है. COVID-19 फेफड़ों को प्रभावित करता है और गंभीर फेफड़ों के संक्रमण जैसे निमोनिया और तीव्र श्वसन संकट सिंड्रोम से लोगों को मारता है. वेंटिलेटर यांत्रिक श्वास मशीन हैं जो रोगियों को सांस लेने में मदद करती हैं और फेफड़ों को डैमेज होने से रोकती हैं.

ventiltor

यह मशीन सांस के लिए अतिरिक्त ऑक्सीजन को फेफड़ों में भेजने के लिए दबाव का उपयोग करती है और फेफड़ों से कार्बन डाइऑक्साइड को वापस लेती है. इस दबाव को सकारात्मक दबाव के रूप में जाना जाता है. रोगी आमतौर पर अपने दम पर साँस छोड़ते हैं, लेकिन वेंटिलेटर रोगियों को आराम से सांस लेने में सहायता करता है.

एक वेंटिलेटर को विशिष्ट दर पर सांस लेने के लिए सेट किया जा सकता है और प्रत्येक रोगी की आवश्यकता के अनुसार ऑक्सीजन की आपूर्ति को समायोजित किया जा सकता है.

वेंटीलेटर का उपयोग कब किया जाता है (When is Ventilator is used)

इसका उपयोग गंभीर श्वसन संक्रमण वाले लोगों के लिए किया जाता है, जैसे COVID-19, मौसमी इन्फ्लूएंजा और निमोनिया. जब अमायोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS) जैसे रोग से तंत्रिका और मांसपेशियों को नुकसान होता है, और  स्ट्रोक, और ऊपरी रीढ़ की हड्डी में चोट से रोगी को साँस लेने में दिक्कत होती है, तो वेंटिलेटर रोगी को सांस लेने में मदद करता है.

वेंटीलेटर में किस तरह का जोखिम शामिल है (Risk involved in Ventilator)

1. बहुत अधिक दबाव होने पर ऑक्सीजन विषाक्त हो सकती है और फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है.

2. इन्टूबेशन (intubation) के दौरान बैक्टीरिया फेफड़ों में प्रवेश कर सकता है और वेंटीलेटर से जुड़ा निमोनिया रोग हो सकता है.

3. वेंटीलेटर से ऑक्सीजन देते समय इस बात के चांस होते हैं फेफड़ों से हवा रिसकर फेफड़ों और छाती की दीवार के बीच की जगह में रह जाये जिससे मरीज की छाती में दर्द हो सकता है और फेफड़े भी क्षतिग्रस्त हो सकते हैं.

तो उपरोक्त व्याख्या से निष्कर्ष निकलता है कि COVID-19 से लड़ने के लिए वेंटीलेटर का उपयोग बहुत महत्वपूर्ण है. इसलिए भारत सरकार के संबंधित मंत्रालय को देश में पर्याप्त संख्या में वेंटिलेटर रखने की जरूरत है ताकि भारत COVID-19 के कारण उत्पन्न किसी भी अभूतपूर्व स्थिति से निपट सके.


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