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Difference: Weather और Climate में क्या होता है अंतर, जानें

Difference: क्या आप भी वेदर यानि मौसम और क्लाईमेट यानि जलवायु को लेकर दुविधा में पड़ जाते हैं। यदि हां, तो इस लेख के माध्यम से हम आपको वेदर और क्लाइमेट के बीच अंतर बताएंगे। 

Difference: Weather और Climate में क्या होता है अंतर, जानें
Difference: Weather और Climate में क्या होता है अंतर, जानें

Difference:  मौसम और जलवायु, दोनों ही धरती का अभिन्न हिस्सा हैं। इन दोनों का ही मानव जीवन पर प्रभाव पड़ता है, जिससे हमारी गतिविधियां बदलती हैं। लेकिन, कई लोग मौसम और जलवायु को लेकर दुविधा में आ जाते हैं। क्या आप भी मौसम और जलवायु के बीच दुविधा में पड़ जाते हैं। यदि हां, तो यह लेख आपके लिए काम का लेख है। इसके माध्यम से हम आपको जलवायु और मौसम के बारे में बताने जा रहे हैं। तो, आइये शुरुआत करते हैं। 

 

सबसे पहले हम मौसम के बारे में समझते हैं।

 

क्या होता है मौसम

 

मौसम वातावरण का हिस्सा है। इसमें वर्षा, तापमान, नमी, हवा की रफ्तार व वायुमंडलीय दबाव जैसे कारक शामिल होते हैं। मौसम स्थिर नहीं रहता है। क्योंकि, यह समय-समय पर बदलता रहता है। जैसे कई बार तेज धूप निकलना, तेज बारिश होना और कई बार सामान्य दिन रहना। वहीं, इसके बदलने का क्रम कुछ दिन, सप्ताह या महीने के आधार पर भी हो सकता है। ऐसे में कई कारकों की वजह से मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहता है। 

 

सैटेलाइट के माध्यम से पता किया जाता है मौसम का पूर्वानुमान

 

सैटेलाइट के माध्यम से मौसम का पूर्वानुमान लगाया जाता है। इसके लिए मौसम वैज्ञानिक सैटेलाइट के माध्यम से आंकड़ें जुटाकर मौसम का पता लगाते हैं। इसके माध्यम से सर्दी, गर्मी, हवा और बाढ़ का पता लगाया जाता है। 



क्या होती है जलवायु 

 

किसी एक क्षेत्र में मौसम के लंबे समय तक बने रहने वाले पैटर्न को जलवायु कहते है। इसके माध्यम से किसी एक क्षेत्र में एक समयावधि में मौसम के बदलाव को देखा जाता है। 

 

इस तरह पता लगती है जलवायु

 

वैज्ञानिक वर्षा, तापमान, आर्द्रता, धूप, हवा और अन्य पर्यावरणीय कारकों के औसत से जलवायु को मापते हैं। यह किसी क्षेत्र में लंबी अवधि के लिए होती है, जो कि 30 साल तक हो सकती है। 



मौसम और जलवायु के बीच अंतर

 

1.जलवायु की गणना लंबे समय तक मौसम के डाटा के आधार पर की जाती है, जबकि मौसम कम समय में होने वाले वातावरण में बदलाव को लेकर है।

 

2.जलवायु और मौसम को कभी-कभी एक दूसरे के स्थान पर प्रयोग किया जाता है। लेकिन, इन दोनों को ही अलग-अलग तरीके से मापा जाता है। साथ ही इन्हें प्रभावित करने वाले कारक भी अलग होते हैं।

 

3.मौसम के तहत आपको तापमान, हवा की रफ्तार व बादल आदि को लेकर जानकारी मिलेगी। साथ ही इनका कुछ दिनों का पूर्वानुमान भी मिल जाएगा। लेकिन, जलावयु के मामले में आपको लंबे समय तक रहे तापमान या वर्षा के औसत आंकड़ों के बारे में जानकारी मिलेगी। 

 

4.जलवायु के अध्ययन को क्लाईमेटोलॉजी यानि जलवायु विज्ञान कहते हैं, जबकि मौसम के पैटर्न और भविष्यवाणियों पर केंद्रित वातावरण का वैज्ञानिक अध्ययन मिटियोरोलॉजी यानि मौसम विज्ञान कहलाता है।

 

बढ़ रही है ग्लोबल वॉर्मिंग

 

भारत में हर राज्य में आपको अलग-अलग मौसम देखने को मिल जाएंगे। जैसे उत्तर भारत में सर्दी से लेकर दक्षिण भारत में पड़ने वाली गर्मी। हालांकि, बीते वर्षों में यहां जलवायु में बदलाव हो रहा है। इसका प्रमुख कारण प्राकृतिक संसाधनों का अधिक इस्तेमाल और बड़ी संख्या में पेड़ों का कटना है। इस वजह से ग्लोबल वॉर्मिंग यानि वैश्विक तापमान बढ़ रहा है। नतीजन, आने वाले समय में धरती पर लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। वैज्ञानिकों ने बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण समुद्र के स्तर में वृद्धि की भविष्यवाणी की है, जिससे वर्षा के पैटर्न और अन्य क्षेत्रीय जलवायु कारक भी बदल सकते हैं।

 

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