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जानिए ऐसे IAS अधिकारियों को जिन पर भारत को है गर्व

Feb 6, 2018 12:46 IST
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Top Ten IAS/IPS Officers of India
Top Ten IAS/IPS Officers of India

वस्तुतः एक सिविल सेवक यानि आईएएस अधिकारी या एक आईपीएस अधिकारी होना अपने आप में एक बहुत कठिन काम है लेकिन ध्यान देने योग्य बात यह है कि निजी क्षेत्र में काम करने वाले उम्मीदवारों की तुलना में इनका वेतन उनके आधे से भी कम होता है। यहां तक कि सिविल सेवकों को दिए गए अधिकारों में हाल ही में काफी कमी की गई है। भारत में जब बात लालफीताशाही और आम जनता के बीच भ्रष्टाचार की आती है तब सरकारी बाबुओं की छवि बहुत खराब दिखती है। लेकिन फिर भी लाखों लोग प्रत्येक वर्ष इस परीक्षा में पास होने के लिए शामिल होते हैं। अब एक सवाल बहुत स्वाभाविक है कि वास्तव में वह क्या चीज है जो दुनिया के सबसे कठिन भर्ती परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रत्येक वर्ष उम्मीदवारों को प्रेरित करती है?

इसका उत्तर बहुत सरल है। आईएएस बनने की इच्छा रखने वाले सभी उम्मीदवारों की मुख्य प्रेरणा नौकरी में मिलने वाला पैसा या अधिकार नहीं बल्कि देश की सेवा करने और इसके विकास एवं बेहतरी में योगदान करने का मिलने वाला अवसर है। उपर वर्णित सभी खामियों के बावजूद इसमें कोई दो राय नहीं है कि देश की प्रथामिक प्रशासन और कानून एवं व्यवस्था की जिम्मेदारी सिविल सेवकों के ही हाथों में होती है। वास्तव में यहां कई अनुकरणीय सिविल सेवकों, आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बारे में दिया गया है जिन्होंने हमारे देश को सही दिशा प्रदान करने में मदद की है। कुछ तो आमिर खान की सरफरोश जैसी लोकप्रिय फिल्म से प्रेरित होकर इस क्षेत्र में आए हैं तो कुछ कम लोकप्रिय फिल्म कटियाबाज– जिसमें यह दिखाया गया है कि कैसे सिविल सेवक अपने देश और देशवासियों की भलाई के लिए लगातार काम करते हैं।

आईएएस बनने की इच्छा रखने वालों की मदद करने के लिए हमने वास्तविक जीवन के कुछ 'दबंग' सिविल सेवकों की सूची बनाई है। इन सिविल सेवकों ने देश की सेवा के लिए अपने कर्तव्यों से उपर उठकर काम किया है।

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http://www.jagranjosh.com/imported/images/E/Articles/Ajit_Doval_2014.jpg1.अजीत डोवाल

हाल ही में अजीत डोवाल का नाम सुर्खियों में रहा । आतंकवादियों और राष्ट्रविरोधी तत्वों से अपनी सीमाओँ की रक्षा के लिए भारत द्वारा की गई सक्रिय कार्रवाई में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही । श्री डोवाल वर्तमान में प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं और इस पद पर आसीन होने वाले वह पांचवें व्यक्ति हैं। इससे पहले अजीत डोवाल ने बतौर आईएएस अधिकारी देश की सेवा की थी। वे केरल कैडर में 1968 में आईएएस नियुक्त हुए थे। भारत के स्पाई मास्टर के नाम से विख्यात अजीत डोवाल को यह उपनाम 2004-05 में खुफिया ब्यूरो के निदेशक के कार्यकाल के दौरान दिया गया था। उन्होंने एक दशक से भी अधिक समय तक आईबी के ऑपरेशंस विंग के प्रमुख के पद पर अपनी सेवाएं दी हैं।

जहां तक उनके काम का सवाल है, आईपीएस अधिकारी के तौर पर उन्होंने सराहनीय काम किए। उन्होंने कश्मीर, मिजोरम और पंजाब जैसे अशांत राज्यों में उग्रवाद विरोधी कार्रवाईयों में सक्रिय  भूमिका निभाई। उनकी उपलब्धियों में एक और उपलब्धि उस समय जुड़ गई जब उन्होंने 1971-1999 के दौरान इंडियन एयरलाइन्स के सभी 15 विमानों के अपहरण की कोशिश को नाकाम किया। जासूसी के दिनों में श्री डोवाल ने पाकिस्तान में उच्च– जोखिम वाले काम के लिए गुप्त एजेंट का भी काम किया है।

http://www.jagranjosh.com/imported/images/E/Articles/ASHOK-KHEMKA.jpg2.अशोक खेमका

भ्रष्टाचार पर अपने सक्रिय  कार्रवाईयों की वजह से प्रख्यात होने वाले अशोक खेमका एक आईएएस अधिकारी हैं। मूल रूप से कोलकाता निवासी श्री खेमका ने आईआईटी से शिक्षा प्राप्त की और 1991 में हरियाणा कैडर में आईएएस अधिकारी बनें । रीयल स्टेट की दिग्गज कंपनी डीएलएफ ग्रुप और सोनिया गांधी के दामाद – रॉबर्ट वाड्रा के बीच हुए 57 करोड़ रुपयों के जमीन– सौदे की अनियमितताओं को सबके सामने लाने के लिए इन्हें जाना जाता है। इससे पहले इन्होंने हरियाणा बीज विकास निगम के घोटाले का पर्दाफाश किया था। यहां निगम अधिक दाम में बीजों की बिक्री कर रहा था। श्री खेमका के नौकरी के 23 वर्षों में उनके 45 तबादले किए गए। हाल ही में हरियाणा बीज विकास निगम के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में नाकाम रहने के कारण उनके खिलाफ दो आरोपपत्र दाखिल किया गया है।

IAS बनने के लिए उपयुक्त जीवनशैली

http://www.jagranjosh.com/imported/images/E/Articles/durga-shakti.jpg3.दुर्गा शक्ति नागपाल

यदि आप सोचते हैं कि भारत सिर्फ दबंग पुरुष सिविल  सेवक ही दे सकता है तो सुश्री नागपाल आपकी इस सोच को गलत साबित करती हैं। दुर्गा शक्ति नागपाल ने अपना करिअर जून 2011  में पंजाब कैडर में बतौर आईएएस अधिकारी शुरु किया था। अपने पहले नाम जो कि हिन्दू धर्म में महिला शक्ति का प्रतीक है, को साकार करते हुए दुर्गा शक्ति नागपाल भ्रष्टाचार को उजागर कर देश की अभूतपूर्व सेवा कर रही हैं। पंजाब में बतौर आईएएस अधिकारी अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने मोहाली में जमीन घोटाले का पर्दाफाश किया था।

अगस्त 2012 में वे उत्तर प्रदेश कैडर में चली गईं। यहां उन्हें गौतम बुद्ध नगर का सब– डिवीजनल मैजिस्ट्रेट (एसडीएम) नियुक्त किया गया था। यहां उन्होंने ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश में 'रेत माफिया' के खिलाफ कार्रवाई की। उन्होंने यमुना और हिंडन नदी के किनारों पर रेत की अवैध खनन करने वालों को सबके सामने लाने के लिए विशेष जांच दल का गठन किया। इस अभियान के दौरान उनकी निगरानी में प्रशासन ने 24 डंपर ट्रकों और 300 ट्रॉलियों को जब्त करने में कामयाबी हासिल की। 15 लोगों को भी गिरफ्तार किया गया। सभी ईमानदार आईएएस अधिकारियों के जैसे ही उन्हें भी अपने अच्छे काम का पुरस्कार मिला। उन्हें निलंबित कर दिया गया।

http://www.jagranjosh.com/imported/images/E/Articles/Armstrong-Pame.png4.आर्मस्ट्रॉन्ग पाम

भारत की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है उसकी विविधता और जब बात आईएएस अधिकारियों और लोक सेवकों की आती है तो यह बिल्कुल सही साबित होती है। श्री आर्मस्ट्रॉन्ग पाम ने भी इसे सिद्ध कर दिखाया है। श्री पाम नागालैंड के जीमे जनजाति के पहले आईएएस अधिकारी हैं। मूलरूप से मणिपुर के मेंगलॉन्ग जिले के निवासी आर्मस्ट्रॉन्ग पाम को 'मिरैकल मैन' के नाम से जाना जाता है। इन्होंने मणिपुर से नगालैंड और असाम को जोड़ने वाली 100 किमी लंबी सड़क का निर्माण किया है। इसे "पीपुल्स रोड" के नाम से जाना जाता है।

उनकी उपलब्धि की सबसे महत्वपूर्ण  बात यह है कि इस सड़क को उन्होंने बिना किसी सरकारी मदद (वित्तीय) से बनाया है। यह सड़क आम जनता द्वारा दी जाने वाली धनराशी और सोशल मीडिया से जुटाए गए पैसों से बनी है। इसके लिए वे आगे आए और अपनी खुद का वेतन भी दिया। वे सच्चे नायक हैं और "जहां चाह, वहां राह" उद्धहरण उन पर बिल्कुल सटीक बैठता है।

Best IAS Interview Questions

http://www.jagranjosh.com/imported/images/E/Articles/Shivdeep-Lande.jpg5.शिवदीप वामन लांडे

यदि आप सोचते हैं कि सिर्फ सलमान खान है जो कई गुंडों और अपराधियों से एक साथ लड़ सकते हैं और आम जनता की समस्याओं को दूर कर सकते हैं तो आप गलत हैं। बिहार के आईपीएस अधिकारी शिवदीप वामन लांडे भी ऐसा करते हैं और इससे कहीं अधिक करते हैं। श्री लांडे मूल रूप से अकोला, महाराष्ट्र के निवासी हैं और बिहार कैडर के 2006 के आईपीएस अधिकारी के तौर पर नियुक्त हैं। अररिया, पूर्णियां और मुंगेर जिले में पुलिस अधीक्षक रहते हुए उन्होंने कानून और व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने में अविश्वसनीय काम किया है। ये बिहार के ऐसे जिले हैं जो अपने कुख्यात अपराधों के लिए जाने जाते हैं। इन्होंने अपराधियों और गुंडों, कॉस्मेटिक माफियाओं, शाम को लड़कियों को छेड़ने वालों पर शिकंजा कसा। जब उन्हें पटना का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया था तो राजधानी में अपराध की दर काफी कम हो गई थी।

अपने नौकरी के काम करने के साथ– साथ उन्होंने आम जनता की समस्याओँ को सुनने और उसे हल करने के लिए भी समय निकाला। जब पटना से उनका तबादला किया गया तो शहर के लोगों ने सरकार के इस फैसले के विरोध में मोमबत्ती जलाकर पदयात्रा की। इससे आम जनता में उनकी लोकप्रियता का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। अपराध से लड़ने के अलावा वे सामाजिक स्तर पर भी काफी सक्रिय  हैं । श्री लांडे गरीब लड़कियों का विवाह कराने एवं गरीब छात्रों के लिए छात्रावास की सुविधा मुहैया कराने वाले सामाजिक संगठन को अपने वेतन का 60% दान देते हैं।

http://www.jagranjosh.com/imported/images/E/Articles/B-Chandrakala.jpg6.बी. चंद्रकला

भारतीय नौकरशाही में महिला शक्ति की ओर वापस लौटते हैं। इसमें बी. चंद्रकला एक ऐसा नाम है जिसे भुलाया नहीं जा सकता। आंध्रप्रदेश की निवासी सुश्री चंद्रकला 2008 में उत्तर प्रदेश कैडर में आईएएस अधिकारी बनी थीं। बुलंदशहर की शक्तिशाली जिलाधिकारी के नाम से जाने जानी वाली बी. चंद्रकला भ्रष्टाचार एवं सरकारी कार्रवाईयों में अनियमितताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाने वाली अधिकारी के तौर पर लोगों में लोकप्रिय हैं। वे अन्य सरकारी अधिकारियों एवं राजनीतिज्ञों को उनके अधिकार का प्रयोग अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए करने और अपने काम न करने के लिए उन्हें सार्वजनिक रूप से बेनकाब करने के लिए जानी जाती हैं। बुलंदशहर में सड़कों के निर्माण के लिए खराब गुणवत्ता वाली सामग्रियों के इस्तेमाल करने वाले ठेकेदार पर बना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इस वीडियो ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया था। आज भी वे लोगों की भलाई के लिए काम कर रही हैं।

IAS अधिकारी का वेतन, भत्ते एवं अन्य सुविधाएं

http://www.jagranjosh.com/imported/images/E/Articles/S-R-Sankaran.jpg7.एस. आर. संकरन

श्री एस. आर. संकरन  को 'पीपुल्स आईएएस ऑफिसर' के नाम से जाना जाता है । वे 1956 में आंध्र प्रदेश कैडर में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में शामिल हुए थे। अपने आरंभिक वर्षों में 1959 में कर्नूल जिले में नांडयाल के सब– कलेक्टर और अदीलाबाद, खम्मम और नेल्लोर जिले में जिला कलेक्टर रहें । वर्ष 1971 में तत्कालीन इस्पात एवं खदान मंत्री मोहन कुमारमंगलम के सहायक बन कर केंद्र सरकार में शामिल हुए। यहां उन्होंने कोयला खदानों के राष्ट्रीयकरण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । इसके बाद वे अपने कैडर– आंध्रप्रदेश में वापस चले गए औऱ आंध्र प्रदेश सरकार के समाजिक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव के तौर पर अपनी सेवाएं दीं।

उनकी कई उपलब्धियों में से बंधुआ मजदूरी को समाप्त करने और अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति एवं गरीबों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए उनके जबरदस्त प्रयास सराहनीय रहे हैं। उन्होंने गरीब समर्थक नीतियों को तैयार करने में भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन नीतियों को तत्कालीन सरकार ने लागू भी किया था। एक और चीज जो उन्हें जनता के बीच बेहद लोकप्रिय बनाती है और वह है उनकी सरल और सीधी– साधी जीवनशैली। उन्होंने भौतिकतावादी वस्तुओं की सीमित इच्छा के साथ बेहद पारदर्शी जीवन बिताया है। नक्सली हिंसा को समाप्त करने के आंध्र प्रदेश सरकार के अभियान में 2004 में उन्होंने प्रमुख वार्ताकार के तौर पर भी काम किया। इस देश की जनता के लिए काम करने की उनकी प्रतिबद्धता प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा श्रोत है।

http://www.jagranjosh.com/imported/images/E/Articles/kiran-bedi.jpg8.किरण बेदी

यह अक्सर होता है कि जब कभी हम शक्तिशाली पुरुष आईपीएस अधिकारी के बारे में सोचते हैं तो हमेशा हमें सलमान खान याद आते हैं और जब बात महिला आईपीएस अधिकारी की हो रही हो तो सिर्फ किरण बेदी का नाम ही जेहन में आता है। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में शामिल होने वाली पहली महिला का खिताब किरण बेदी के नाम है। वह 1972 में आईपीएस बनी थीं। वर्ष 2007 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने से पहले उन्होंने बतौर आईपीएस अधिकारी 35 वर्षों तक देश की सेवा की। उन्हें केंद्र शासित प्रदेश कैडर में नियुक्त किया गया था। अपनी लंबी और शानदार करिअर के दौरान उन्होंने दिल्ली, गोवा, चंडीगढ़ और मिजोरम में काम किया। वे जिस जगह भी काम करने जातीं वहां अपराध की दर सबसे कम हो जाती थी। नियमित अपराधियों को पकड़ने के अलावा उन्होंने भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं को भी पकड़ा।

किरण बेदी के करिअर की एक प्रसिद्ध घटना है– प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की कार को रस्से से उठवा लेना। उस समय बेदी दिल्ली पुलिस के यातायात विभाग का कामकाज संभाल रही थीं। दिल्ली के यातायात विभाग में अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें 'क्रेन बेदी' का उपनाम भी मिला। ऐसा इसलिए क्योंकि यातायात का उल्लंघन करने वाले लोगों के वाहनों को वे क्रेन से हटवा दिया करती थीं।

आईएएस और पीसीएस में क्या अंतर है

http://www.jagranjosh.com/imported/images/E/Articles/vinod_rai.jpg9.विनोद राय

ये अखबारों के पहले पन्ने पर जगह बनाने वालों में एक और आईएएस अधिकारी हैं। भ्रष्टाचार को उजागर करने और सरकार की कार्रवाईयों में होने वाली अनियमितताओं पर गौर करने की इनकी आदत ने इन्हें सुर्खियों में लाया। विनोद राय 1972 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। इन्होंने त्रिशूर जिले के सब– कलेक्टर के तौर पर अपना करिअर शुरु किया था। त्रिशूर जिले में उन्होंने आठ वर्षों तक काम किया और त्रिशूर जिले के विकास में अपनी भूमिका की वजह से उन्हें दूसरा सक्थान थंपुरन का उपनाम मिला ।
उनका सबसे लोकप्रिय लोक सेवा कार्यकाल उस समय का है जब 2008 में उन्हें भारत का 11वां नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक नियुक्त किया गया था। अपने कार्यकाल में श्री राय ने भ्रष्टाचार के कई प्रमुख घोटालों को उजागर किया। इसमें कोलगेट घोटाला, 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला, दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल घोटाला और पद्मनाभस्वामी मंदिर लेखापरीक्षा शामिल है। फिलहाल वे बाहरी लेखा परीक्षकों के संयुक्त राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

http://www.jagranjosh.com/imported/images/E/Articles/Rajni-Sekhri-Sibal.jpg10. रजनी सेखरी सिबल

रजनी के बारे में बात करे तो 'थालीवा' का चेहरा सामने आ जाता है। ये न सिर्फ अपना पहला नाम दक्षिण के सुपरस्टार से साझा करती हैं बल्कि देश की सेवा करने की प्रतिबद्धता भी उनके समान ही रखती हैं। रजनी सेखरी सिबल 1986 बैच के हरियाणा कैडर की आईएएस अधिकारी हैं और जब बात महिला सिविल सेवकों की आती है तो ये एक और महिला शक्ति साबित होती हैं। इन्हें हरियाणा में जेबीटी शिक्षक भर्ती घोटाले को उजागर करने मे मदद करने के लिए जाना जाता है। इन्हें "चार मीटर कपड़े" के साथ हरियाणा के भूतपूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला को उनके पद से हटाने वाली महिला के तौर पर जाना जाता है।

जैसा कि हम सब जानते हैं, जीबीटी शिक्षक भर्ती घोटाला एक ऐसा घोटाला था जहां 3200 शिक्षकों द्वारा दिए गए साक्षात्कार के अंकों में पैसे देने वाले लोगों को नौकरी देने के लिए हेर– फेर किया गया था। हरियाणा के भूतपूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला भी इस घोटाले में शामिल थे। जब सुश्री सिबल से इस घोटाले का हिस्सा बनने को कहा गया तो उन्होंने इनकार कर दिया और इस वजह से उनका तबादला भी कर दिया गया।

हालांकि उसी समय उनके तेज दिमाग ने सोच लिया था कि वह इस घोटाले को सबके सामने लायेंगी । उन्होंने मोटे सूती पट्टियां लाने का आदेश दिया और सभी गलत कामों के सबूत वाले स्टील की आलमीरा (कपबोर्ड) को सील बंद कर दिया। फिर अपने अधीनस्थ अधिकारियों से उस कपड़े पर अलग– अलग जगहों पर हस्ताक्षर करने और तस्वीरें लेने को कहा। इस तरह कपबोर्ड में रखे सबूतों के साथ छेड़–छाड़ नहीं हो सकती थी। अंततः सीबीआई जांच की गई जिसमें हरियाणा के भूतपूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला भी दोषी पाए गए।

ये कुछ ईमानदार और प्रतिबद्ध सिविल  सेवकों के उदाहरण भर हैं जिन्होंने इस देश की आम जनता और नागरिकों के जीवन में बदलाव लाए। ऐसे कई अन्य हैं जो रोज कड़ी मेहनत करते हैं, कभी– कभी अपने और अपने प्रियजनों के जीवन को खतरे में डाल लेते हैं ताकि देश को हमारे लिए अच्छा बना सकें। हम ऐसे सभी अद्भुत अधिकारियों के प्रति जो एक ऐसे भारत का निर्माण करने के लिए काम कर रहे हैं जिस पर हमें गर्व हो, सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करते हैं।

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